छत्तीसगढ़

प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना का लाभ किसानों तक नहीं पहुंचा, 94 प्रतिशत पात्र किसान अब भी बाहर

छोटे और सीमांत किसानों के बुढ़ापे में हर महीने तीन हजार रुपये का सहारा देने वाली प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (पीएम-केएमवाई) का ‘मान’ ही किसानों तक नहीं पहुंच पा रहा है। प्रदेश में प्रचार-प्रसार इतना सुस्त है कि किसान योजना से अनजान हैं।

प्रदेश में 33.13 लाख से अधिक पात्र किसान हैं, लेकिन सात वर्षों से अधिक समय में महज 2.02 लाख ने ही योजना में पंजीयन कराया है। यानी करीब 94 प्रतिशत पात्र किसान अब भी इससे बाहर हैं। किसान संगठनों का कहना है कि गांव-गांव तक योजना की जानकारी नहीं पहुंचने से बड़ी संख्या में पात्र किसान इसके लाभ से वंचित हैं।

पेंशन का यह ‘मानधन’ सरकारी फाइलों में सिमट गया है। केंद्र सरकार द्वारा 12 सितंबर 2019 को योजना शुरू की गई थी। देशभर में योजना से करीब 25 लाख किसान पंजीकृत हैं।

पंजीयन के लिए किसान की उम्र 18 से 40 वर्ष और अधिकतम दो हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि होना जरूरी है। किसान को उम्र के अनुसार हर महीने 55 से 200 रुपये तक अंशदान करना होता है। उसके अंशदान के बराबर राशि केंद्र सरकार भी जमा करती है। 60 वर्ष की उम्र पूरी होने पर नियमित अंशदान वाले किसान को हर महीने पेंशन मिलती है। पेंशन प्राप्त कर रहे सदस्य की मृत्यु होने पर उसके जीवनसाथी को सदस्य की पेंशन का 50 प्रतिशत यानी 1500 रुपये प्रतिमाह पारिवारिक पेंशन के रूप में देने का प्रविधान है।

फरवरी-2026 तक की स्थिति के अनुसार प्रदेश में सीमांत (ढाई एकड़ या कम) किसानों की संख्या 24,34,321 है। लघु (ढाई से पांच एकड़) किसान 8,79,477 हैं, अल्प सीमांत (पांच से 10 एकड़) 4,93,056 हैं, मध्यम (10 से 25 एकड़) 1,80,823 हैं और बड़े (25 एकड़ से ज्यादा) किसानों की संख्या 23,095 है।

योजना को लेकर अधिकारियों से चर्चा कर समीक्षा की जाएगी। पात्र किसानों को योजना से जोड़ने के लिए पंजीयन की स्थिति, अड़चनों और जागरूकता के स्तर की जानकारी ली जाएगी। राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि पात्र किसानों तक योजना का लाभ पहुंचे और इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। यह बात कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने कही।

भारतीय किसान संघ के प्रदेश महामंत्री नवीन शेष का कहना है कि योजनाओं का पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में पात्र किसानों तक जानकारी नहीं पहुंच पाती। सरकार को गांव-गांव शिविर लगाकर किसानों को योजना की जानकारी देने के साथ ही मौके पर पंजीयन की सुविधा उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि अधिक से अधिक पात्र किसान योजना का लाभ उठा सकें।

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