मिठाई में मिलावट का LIVE TEST:आयोडीन से घर पर ही करें खोया-पनीर की जांच; एक्सपर्ट से समझें खतरा, VIDEO में जानिए तरीके

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रक्षाबंधन खुशियों और मिठास का त्योहार है। इस दौरान मिठाइयों की खरीदारी बढ़ जाती है। घर-परिवार में मेहमानों के आने से दूध, खोया, पनीर, घी और इनसे बने खाद्य पदार्थों की मांग भी बढ़ती है। इसी दौरान मिलावट का खतरा भी बढ़ जाता है। मिठाई या कोई दूसरा खाद्य पदार्थ खरीदते समय थोड़ी सी लापरवाही सेहत पर भारी पड़ सकती है। ऐसे में सवाल है कि असली और मिलावटी मिठाई, खोया, पनीर और घी की पहचान कैसे करें? चांदी के वर्क में मिलावट का पता कैसे चले और मिलावट की शिकायत कहां करें? इन्हीं सवालों के जवाब जानने के लिए दैनिक भास्कर ने फूड एंड ड्रग विभाग के फूड एनालिस्ट अखिलेश श्रीवास्तव से बातचीत की। उन्होंने मिलावटी खाद्य पदार्थों की पहचान के लिए कुछ लाइव टेस्ट भी करके दिखाए। इनमें से कुछ आसान तरीके घर पर भी आजमाए जा सकते हैं। मिलावट करने वालों पर क्या कार्रवाई और सजा का प्रावधान है, यह भी जानिए। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… मांग बढ़ने पर मिलावट का खतरा फूड एनालिस्ट अखिलेश श्रीवास्तव ने बताया कि मिठाई बनाने में इस्तेमाल होने वाले खोया, मावा, पनीर, घी और दूध की गुणवत्ता पर ध्यान देना जरूरी है। त्योहार के दौरान इनकी मांग बढ़ने के साथ मिलावट की आशंका भी रहती है। इसलिए लोगों को सिर्फ कम कीमत देखकर सामान नहीं खरीदना चाहिए। खरीदारी करते समय दुकान की विश्वसनीयता और साफ-सफाई का भी ध्यान रखना चाहिए। ज्यादा चमकीला रंग और तेज खुशबू में मिलावट का खतरा एक्सपर्ट के मुताबिक, खोया या मावा मिठाई बनाने में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली सामग्री है। मिठाई को आकर्षक बनाने के लिए इसमें रंग और फ्लेवर डाले जाते हैं। लेकिन अगर मिठाई का रंग जरूरत से ज्यादा चमकीला हो या उसमें तेज और असामान्य खुशबू आ रही हो, तो सावधानी बरतनी चाहिए। इसका स्वाद भी सामान्य होना चाहिए। अगर मिठाई के रंग, गंध या स्वाद में कुछ अलग महसूस हो, तो उसे खरीदने या खाने से बचना बेहतर है। इसके अलावा कुछ आसान टेस्ट भी हैं, जिन्हें लोग घर पर करके खाद्य पदार्थों की शुद्धता की शुरुआती जांच कर सकते हैं। पनीर और खोये में स्टार्च की जांच फूड एनालिस्ट अखिलेश ने बताया कि पनीर या खोये की थोड़ी मात्रा को पानी के साथ गर्म करें और फिर ठंडा होने दें। इसके बाद आयोडीन टिंचर की 2 से 3 बूंद डालें। अगर मिश्रण का रंग नीला या नीला-काला हो जाता है, तो इसमें स्टार्च होने का संकेत मिल सकता है। स्टार्च का आयोडीन के साथ प्रतिक्रिया से नीला रंग बन सकता है। कच्चा और इंडस्ट्रियल स्टार्च मिलावट के लिए अक्सर घटिया दर्जे का कच्चा कॉर्न स्टार्च, अरारोट और आलू का पाउडर मिलाया जाता है। इस स्टार्च फैक्ट्रियों में रिफाइन करके बनाया गया पोषकत्व-हीन सफेद पाउडर होता है, जिसमें से सभी जरूरी तत्व निकाल दिए जाते हैं। जो शरीर के लिए हानिकारक होता है। अक्सर मिलावटखोर सिर्फ स्टार्च नहीं मिलाते। स्टार्च के साथ पनीर या खोए को असली जैसा दिखाने के लिए डिटर्जेंट, यूरिया, पाम ऑयल या सिंथेटिक दूध जैसी खतरनाक चीजें भी मिला देते हैं। यह मिश्रण लिवर और किडनी को स्थायी रूप से डैमेज कर सकता है। हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCl) की मदद से मिठाइयों (जैसे जलेबी या लड्डू) में प्रतिबंधित और घटिया रसायनों (जैसे मैटेनिल येलो या कोल तार डाई) की पहचान आसानी से की जा सकती है। मिलावटखोर जलेबी को गहरा पीला या नारंगी रंग देने के लिए अक्सर सस्ते और कैंसर पैदा करने वाले केमिकल ‘मैटेनिल येलो’ का इस्तेमाल करते हैं। एसिड डालते ही मिश्रण का निचला हिस्सा या पूरा घोल गहरा गुलाबी, मैजेंटा या क्रिमसन रेड (गहरा लाल) रंग में बदल जाता है, तो इसका मतलब है कि जलेबी में खतरनाक केमिकल रंग मिलाया गया है। घी या मक्खन में स्टार्च की जांच फूड एनालिस्ट ने अनुसार, एक पारदर्शी कटोरी में करीब आधा चम्मच घी या मक्खन लें और उसमें आयोडीन टिंचर की 2 से 3 बूंद डालें। अगर रंग नीला हो जाए, तो इसमें मैश किए हुए आलू, शकरकंद या अन्य स्टार्चयुक्त पदार्थ की मौजूदगी का संकेत हो सकता है। दुकान की सफाई और मिठाई रखने का तरीका भी करें चेक फूड एनालिस्ट ने बताया कि मिठाई खरीदते समय सिर्फ स्वाद और कीमत पर ध्यान देना काफी नहीं है। यह भी देखना जरूरी है कि मिठाई को किस तरह रखा गया है। मिठाई ढकी हुई है या खुली पड़ी है, उसके आसपास गंदगी तो नहीं है और दुकान में साफ-सफाई का ध्यान रखा जा रहा है या नहीं। खुली मिठाई पर धूल या मक्खियां बैठ रही हों, तो ऐसी जगह से खरीदारी करने से बचना चाहिए। छेने की मिठाई से पानी या तरल अलग हो रहा है तो सतर्क रहें रसगुल्ले, रबड़ी, कलाकंद या अन्य दूध से बनी मिठाइयों को ध्यान से देखें। अगर उत्पाद अपनी सामान्य स्थिति से अलग होकर जरूरत से ज्यादा पानी छोड़ रहा है या परतें अलग दिखाई दे रही हैं या सूंघने में दुर्गंध आ रही है या सतह पर फफूंदी दिख रही हो तो यह ताजगी या गुणवत्ता में खराबी का संकेत हो सकता है। पनीर बहुत ज्यादा सफेद या अलग दिखे तो रहें सतर्क फूड एनालिस्ट के मुताबिक पनीर खरीदते समय सिर्फ उसका सफेद रंग देखकर उसकी गुणवत्ता का फैसला नहीं करना चाहिए। पनीर की ताजगी, उसकी गंध और बनावट भी देखनी चाहिए। अगर पनीर बहुत ज्यादा सख्त है, उससे अलग तरह की गंध आ रही है या उसका स्वाद सामान्य नहीं लगता है, तो उसे खाने से बचना चाहिए। पैक्ड पनीर खरीदते समय निर्माण तिथि और एक्सपायरी या बेस्ट-बिफोर डेट जरूर जांचनी चाहिए। पैक्ड सामान खरीदें तो लेबल जरूर पढ़ें उन्होंने बताया ग्राहक को पैक्ड दूध, पनीर, घी या अन्य खाद्य पदार्थ खरीदते समय पैकेट पर दी गई जानकारी ध्यान से पढ़नी चाहिए। निर्माण या पैकिंग की तारीख के साथ एक्सपायरी, यूज बाय या बेस्ट-बिफोर डेट जरूर देखें। FSSAI के नियमों के अनुसार, पैक्ड खाद्य पदार्थों के लेबल पर आमतौर पर FSSAI लोगो और लाइसेंस नंबर, बैच या लॉट नंबर, निर्माता या ब्रांड से जुड़ी जानकारी, शुद्ध मात्रा और अन्य जरूरी विवरण दिए जाते हैं। इसके अलावा सामग्री यानी इंग्रीडिएंट्स की सूची देखकर भी यह समझा जा सकता है कि उत्पाद में क्या-क्या इस्तेमाल किया गया है। पैकेट फूला हुआ, फटा हुआ, लीक हो रहा हो या किसी तरह से खराब दिख रहा हो तो उसे नहीं खरीदना चाहिए। उपभोक्ता चाहें तो FSSAI की FoSCoS सुविधा के जरिए लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन की जानकारी भी वेरिफाई कर सकते हैं। ग्राहक को बिल जरूर लेना चाहिए, ताकि किसी तरह की शिकायत होने पर खरीदारी का रिकॉर्ड मौजूद रहे। मिलावटी मिठाई मिले तो छत्तीसगढ़ में ऐसे करें शिकायत छत्तीसगढ़ में मिठाई, खोया, पनीर, घी या किसी अन्य खाद्य पदार्थ में मिलावट अथवा खराब गुणवत्ता का शक होने पर उपभोक्ता राज्य के फूड सेफ्टी विभाग तक शिकायत पहुंचा सकते हैं। FSSAI की राज्यवार उपभोक्ता शिकायत हेल्पडेस्क में भी कर सकते है। शिकायत करते समय संबंधित दुकान या प्रतिष्ठान का नाम और पता, खरीदे गए खाद्य पदार्थ का नाम, खरीद की तारीख और मिलावट या खराबी को लेकर क्या संदेह है, इसकी जानकारी देना उपयोगी होगा। अगर संभव हो तो उत्पाद की फोटो, पैकेट का लेबल और खरीद का बिल भी सुरक्षित रखें। इसके अलावा उपभोक्ता FSSAI के Food Safety Connect शिकायत पोर्टल पर भी अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने के बाद उसकी स्थिति ट्रैक करने की सुविधा है। FSSAI के अनुसार, शिकायत संबंधित खाद्य व्यवसाय या प्रतिष्ठान तक भेजी जा सकती है और समाधान संतोषजनक नहीं होने पर मामला आगे संबंधित राज्य खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण के पास कार्रवाई के लिए भेजा जाता है। छत्तीसगढ़ सरकार की सीएम हेल्पलाइन 1076 भी नागरिकों के लिए शिकायत दर्ज करने और उसकी स्थिति जानने का एकीकृत मंच उपलब्ध कराती है। हालांकि, मिलावटी खाद्य पदार्थ के मामले में सबसे पहले शिकायत में स्पष्ट रूप से फूड सेफ्टी/खाद्य पदार्थ में मिलावट का जिक्र करना चाहिए, ताकि मामला संबंधित विभाग तक पहुंच सके। मिलावटखोरों के लिए सजा का भी प्रावधान हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट विराट वर्मा ने बताया कि गंभीर मामलों में आरोपी को कोर्ट के माध्यम से 6 माह से 7 साल तक की सजा भी मिल सकती है। इसे लेकर BNS और फूड सेफ्टी एक्ट में अलग-अलग प्रावधान दिए गए हैं। …………………. राखी से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… 55 लाख तक की सोने-हीरे वाली राखियां: नेचर थीम में फूल-पत्तियां, एनिमल डिजाइन, लेदर बेल्ट पर जड़ी ज्वेलरी; चांदी की राखी ₹1000 से रक्षाबंधन पर इस बार सराफा बाजार में राखियों की ऐसी रेंज सामने आई है, जिसकी कीमत सुनकर लोग हैरान हो जाएंगे। सोने और हीरे से जड़ी राखियां 2 लाख से लेकर 50-55 लाख रुपए तक की तैयार कराई जा रही हैं। ये सामान्य राखियों की तरह बड़े पैमाने पर नहीं बनतीं, बल्कि ग्राहक की पसंद, बजट और डिजाइन के मुताबिक खास ऑर्डर पर तैयार की जाती है। पढ़ें पूरी खबर…
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