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अयोध्या में सरयू नदी के तट पर रामायणकालीन औषधि पार्क बनाया जा रहा है। उसमें बस्तर में मिलने वाली 80 तरह की जड़ी-बूटियां भी उगाई जाएंगी। दरअसल, बस्तर का अधिकांश हिस्सा दंडकारण्य में आता है और मान्यता है कि प्रभु श्रीराम ने वनवास के 14 वर्ष का ज्यादातर
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सरयू तट पर बस्तर की जड़ी-बूटियां उगाकर देशभर के भक्तों को यही दिखाने की कोशिश है कि प्रभु ने किन जड़ी-बूटियों के सहारे वनवासकाल बिताया था। 80 वैराइटी वाले औषधीय पौधों में कुछ पौधे पहले चरण में भेजे जाएंगे। इनमें हड़जोड़, मौलश्री, अड़ूसा, निर्गुंडी, गिलोय, पदमगिलोय, तुलसी डोंगरी का पौधा, विधारामांद, पाताल गरूड़ी, हनुमान गरुड़, रामदातौन, रामकांदा, दूधकांदा, पाताल कुम्हड़ा, कंदमूल, कोदो, कुटी, देवधान के साथ वाघमार शामिल हैं।
बता दें कि निरगुंडी और गरुड़ी जैसे कई पौधे सिर्फ बस्तर में ही मिलते हैं। दिल्ली के श्री राम सांस्कृतिक शोध संस्थान की ओर से बनाया जा रहा सरयू नदी के तट पर यह ऐसा खुला संग्रहालय होगा, जहां जड़ी-बूटियां उगाने के साथ पार्क में भगवान के जीवन प्रसंगों को भी उकेरा जाएगा।
श्रद्धालुओं के लिए यह नए तरह का अनुभव होगा। यहां जड़ी-बूटियां उगाने के लिए बस्तर में अभी से काम शुरू हो गया है। शोध संस्थान ने औषधीय पौधे उगाने की जिम्मेदारी बस्तर के विजय भारत और डॉ मनोज पाणिग्रही को दी है। भारत ने बताया कि वे संस्थान में बतौर कार्यकारिणी सदस्य काम रहे हैं। पौधे तैयार करने की जिम्मेदारी उन्हें ही मिली है।
बस्तर के कई जिलों में 50 से ज्यादा वैद्य उगाएंगे पौधे अयोध्या में सरयू तट पर करीब 7 एकड़ में औषधीय पौधे लगाए जाने हैं। पहले चरण में यह काम करीब 50 डिसमिल में होगा। यहां शोध संस्थान की मांग के अनुसार बस्तर से पौधों की सप्लाई होगी। इसके लिए बस्तर संभाग के अलग-अलग जिलों में करीब 50 वैद्य औषधीय पौधे तैयार करेंगे। इन पौधों को तैयार करने में 3 से 4 माह लगते हैं। तय समय में काम पूरा हो, इसके लिए आने वाले दिनो में वैद्यों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
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