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प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के तहत राजधानी रायपुर में सोलर पैनल लगाने की रफ्तार काफी धीमी है। योजना के शुरू होने से अब तक सोलर सिस्टम लगाने के लिए रायपुर शहर के सिटी सर्किल-1 में 3964 लोगों ने आवेदन किया है। इनमें से महज 1250 लोगों के घर में ही सिस्टम
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राज्य में बिजली हाफ योजना का दायरा सीमित किए जाने के बाद अब लोगों के पास सोलर पैनल लगाने का ही विकल्प बचा है। बिजली बिल का भारी-भरकम बोझ सोलर पैनल लगाने से कुछ हद तक कम हो सकता है। इसे प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से सब्सिडी दी जा रही है। केंद्र के अधिकारियों ने रायपुर में योजना के क्रियान्वयन को लेकर बैठकें ली थी। रायपुर कलेक्टर ने भी अधिकारियों की बैठक लेकर योजना के तहत लोगों को प्रोत्साहित करने समेत उनके आवेदनों की संख्या बढ़ाने के निर्देश बिजली कंपनी को दिए।
इसके बाद बिजली कंपनी ने शिविर लगाकर लोगों को योजना के बारे में जानकारी दी। इसलिए अब आवेदनों की संख्या काफी बढ़ गई है। 4 अगस्त को राज्य सरकार ने 30 हजार सब्सिडी देने की घोषणा की। इसके बाद से आवेदनों की संख्या रायपुर सिटी सर्किट में जहां 400 से भी कम थी, वह बढ़कर 3964 तक पहुंच गई है। इनमें से 3925 लोग योजना का लाभ लेने के लिए पात्र पाए गए हैं।
उपभोक्ता के खाते में आती है सब्सिडी की राशि
केंद्र की इस योजना के चार अंग है। पहला सोलर पैनल लगाने वाला उपभोक्ता, दूसरा पैनल लगाने वाला वेंडर, तीसरा लोन देने वाला बैंक और चौथा योजना का प्रचार और प्रेरित करने और सिस्टम की सुरक्षा जांचने वाली इकाई बिजली कंपनी। योजना के तहत 3 किलोवॉट का पैनल लगाने का खर्च लगभग 1.80 लाख रुपए आ रहा है। इसमें केंद्र और राज्य सरकार की ओर से 1.08 लाख की सब्सिडी मिल रही है। यह सब्सिडी उपभोक्ता के खाते में बाद में आती है। इसलिए ज्यादातर लोग बैंकों से लोन लेकर सिस्टम लगा रहे हैं। आवेदन करने और वेंडर सलेक्शन के बाद लोग लोन के लिए बैंक पहुंचते हैं तो उन्हें लंबी-चौड़ी प्रक्रिया बताई जाती है। सामान्य लोन की तरह औपचारिकता और बैंक गारंटी इत्यादि की डिमांड की जाती है। नहीं देने पर आवेदन निरस्त किए जाते हैं।
सुरक्षा जांच जरूरी
इस पूरी प्रक्रिया में सिस्टम लगने के बाद सुरक्षा जांच बेहद जरूरी है। उपभोक्ता के द्वारा वेंडर चुनने के बाद घरों की छत पर सोलर पैनल लगाया जाता है। सोलर पैनल में लगने वाले सामान गुणवत्ता और कंपनी के आधार पर उपभोक्ता पसंद करता है। इसके बाद बिजली कंपनी के इंजीनियर मौके पर सिस्टम की सुरक्षा जांच करते हैं। इसमें किसी भी तरह की खामियां पाई जाने पर संबंधित वेंडर को सुधारने के निर्देश दिए जाते हैं। बिजली कंपनी के अफसरों के पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही सिस्टम एक्टिव होगा।
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