31 अगस्त से दादाबाड़ी में 15 दिन की तप आराधना:साध्वी मंजुलाश्री बोलीं-जीवन में बदलाव जरूरी, तभी आत्मकल्याण संभव, 33 उपवास पूरे करने पर सम्मान

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आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के तहत श्री जिनकुशल जैन दादाबाड़ी में साध्वी मंजुलाश्रीजी ने कहा कि जीवन में बदलाव जरूरी है। उन्होंने कहा कि केवल आर्थिक स्थिति सुधारना ही बदलाव नहीं है। विचार और व्यवहार में अच्छा बदलाव भी जरूरी है। मनुष्य जीवन का उपयोग आत्मिक विकास और सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए करना चाहिए। साध्वीश्री ने कहा कि लोग अक्सर परिस्थितियों को बदलने की बात करते हैं, लेकिन इसकी शुरुआत खुद से करनी चाहिए। सही सोच, मजबूत इच्छा और लगातार प्रयास से जीवन में बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जैसे पत्थर को आकार देकर सुंदर मूर्ति बनाई जाती है, वैसे ही सही दिशा मिलने पर व्यक्ति भी अपने जीवन को बेहतर बना सकता है। प्रवचन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। 31 अगस्त से तप आराधना दादाबाड़ी में 31 अगस्त से अक्षयनिधि, समवसरण और कषायविजय तप की 15 दिन की विशेष आराधना शुरू होगी। इस दौरान तपस्वियों के लिए देववंदन, एकासना सहित अन्य धार्मिक गतिविधियां होंगी। यह आयोजन साध्वी मंजुलाश्रीजी म.सा. आदि ठाणा की निश्रा में होगा। आयोजन समिति के अनुसार श्रद्धालु भी इन गतिविधियों में शामिल हो सकेंगे। 33 उपवास पूरे करने पर सम्मान चातुर्मास के दौरान चल रही तप आराधना में आदित्य पारख ने 33 उपवास पूरे किए। इसके बाद श्रीसंघ की ओर से उनका सम्मान किया गया। इस मौके पर श्रद्धालुओं ने उनकी तपस्या की सराहना की और मंगलकामना की। बच्चों के लिए संस्कारम शिविर चातुर्मास के तहत दादाबाड़ी परिसर में बच्चों के लिए संस्कारम शिविर भी लगाया जाएगा। इसमें धार्मिक और संस्कार से जुड़ी गतिविधियों के साथ रूबिक क्यूब सिखाया जाएगा। आयोजकों के अनुसार खेल के जरिए बच्चों में ध्यान लगाने, धैर्य रखने और समस्या का हल खोजने की क्षमता विकसित करने का प्रयास किया जाएगा। शिविर में प्रेरक कहानियां और अन्य शिक्षाप्रद गतिविधियां भी रखी जाएंगी।
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