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बिलासपुर में जलभराव की समस्या से स्थायी राहत दिलाने के लिए करीब 100 करोड़ रुपए की जल निकासी योजना बनाई गई है। इसके तहत 28 बड़े नालों और स्टॉर्म वाटर ड्रेन के निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस मानसून में योजना पर काम शुरू होने की संभावना नहीं है। नगर निगम प्रशासन अभी भी जलभराव वाले क्षेत्रों का सर्वे करा रहा है, जबकि योजना को मंजूरी मिलने और टेंडर प्रक्रिया पूरी होने में समय लगेगा। दरअसल, हर साल बारिश के दौरान शहर के कई इलाकों में जलभराव की गंभीर समस्या सामने आती है। इसी को देखते हुए नगर निगम ने बड़े स्तर पर जल निकासी व्यवस्था विकसित करने की योजना बनाई थी। हालांकि, समय पर प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण योजना फाइलों में ही अटकी हुई है। मानसून की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन निगम के इंजीनियर अब भी प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कर रहे हैं। प्रस्ताव को राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की मंजूरी मिलना बाकी है। इसके बाद टेंडर और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू हो सकेगा। वहीं, मामले में मेयर का कहना है कि सर्वे पूरा होने के बाद रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसके बाद जरुरत के हिसाब से स्वीकृति के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। कलेक्टर ने मांगा जवाब, फिर भी आगे नहीं बढ़ी फाइल जलभराव की समस्या से राहत दिलाने के लिए कलेक्टर संजय अग्रवाल ने निगम आयुक्त, जोन कमिश्नरों और इंजीनियरों से प्रस्तावित नालों की उपयोगिता ब्यौरा मांगा था। अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि प्रभावित लोगों की संख्या और संभावित राहत के आधार पर प्राथमिकता तय कर अंतिम प्रस्ताव भेजें। हालांकि, एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी फाइल प्रक्रिया में आगे नहीं बढ़ सकी है। बारिश में फिर बढ़ेगी परेशानी, राहत की उम्मीद कम जल निकासी योजनाओं पर काम शुरू नहीं होने से इस मानसून में भी न तो नए नालों का निर्माण हो सकेगा और न ही जल निकासी व्यवस्था में कोई बड़ा सुधार होगा। ऐसे में जिन इलाकों में हर साल बारिश के दौरान सड़कें जलमग्न हो जाती हैं, वहां के लोगों को इस बार भी वही समस्याएं झेलनी पड़ सकती हैं। फिलहाल बारिश का दौर शुरू नहीं हुआ है, लेकिन बारिश होते ही शहर में जलभराव की स्थिति बनने की आशंका बनी हुई है। जानिए शहर के इन इलाकों में होना था काम जरहाभाठा छात्रावास नाला नेहरू चौक से चांटापारा और वाजपेयी मैदान होते हुए अरपा नदी तक नाला निर्माण का प्रस्ताव है। वर्तमान में बारिश का पानी आसपास के रिहायशी इलाकों में भर जाता है। योजना पूरी होने पर बड़ी आबादी को राहत मिलने की उम्मीद है। सरकंडा-कोनी क्षेत्र इंदिरा विहार, कृषि महाविद्यालय, कोनी और वेटनरी कॉलेज से होते हुए एसटीपी तक नाला निर्माण प्रस्तावित है। सालों से अधूरे पड़े नाले के कारण चौबे कॉलोनी, वसंत विहार, जोरापारा और आसपास के इलाकों में घुटनों तक पानी भर जाता है। नेहरू नगर क्षेत्र श्रीराम केयर अस्पताल के पीछे स्थित 3 से 4 फीट चौड़े नाले को 6 से 7 फीट तक चौड़ा करने की योजना है। नाले की क्षमता कम होने से पारिजात कॉलोनी समेत कई कॉलोनियों में बारिश के दौरान बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं। मंगला और अरपा नदी क्षेत्र मंगला फुटहा तालाब से मुंडा हॉस्पिटल तक और पटेल समाज भवन से अरपा नदी तक नए नाले का निर्माण प्रस्तावित है। महर्षि स्कूल रोड का कच्चा नाला हर साल टूट जाता है, जिससे आसपास की कई कॉलोनियां जलमग्न हो जाती हैं। इन इलाकों में होता है जलभराव सरकंडा, चांटापारा, जरहाभाठा, मंगला, पारिजात कॉलोनी, चौबे कॉलोनी, वसंत विहार, जोरापारा, इंदिरा विहार और कोनी क्षेत्र बारिश के दौरान सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल हैं। कई जगहों पर सड़कें घंटों तक पानी में डूबी रहती है और घरों में भी पानी घुस जाता है। हर साल नालों की सफाई में खर्च होता है 10 करोड़ नगर निगम प्रशासन बारिश से पहले हर साल जलभराव की समस्या से निपटने के लिए 10 करोड़ रुपए खर्च करता है। इसके तहत नालों की सफाई कराई जाती है। लेकिन जब बारिश होती है, तब समस्या जस की तस रहती है। निचली बस्ती ही नहीं, बल्कि कई रिहायशी इलाकों के घरों में घुस जाता है। मेयर बोलीं- नाला बनाने सर्वे किया जा रहा मेयर पूजा विधानी ने कहा कि नाला निर्माण के लिए इंजीनियर सर्वे कर रहे हैं। आदेश देर से मिलने की वजह से सर्वे शुरू होने में भी देरी हुई। सर्वे पूरा होने के बाद रिपोर्ट बनाई जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर जरूरत के अनुसार मंजूरी के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। शहर के सभी प्रमुख जलभराव वाले इलाकों की पहचान की जा रही है। बड़ी-छोटी नालियों की सफाई का दावा
नगर निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे का कहना है कि जल भराव की समस्या को देखते ही शहर की छोटी और बड़ी नालियों की सफाई की जा रही है। एक बार सफाई हो चुकी है। दूसरी बार सफाई अभियान चल रहा है।
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