![]()
रायपुर जिले में “ज्ञानभारतम् मिशन” के तहत दुर्लभ पांडुलिपियों, हस्तलिपियों, ताम्रपत्र और ताड़पत्रों के संरक्षण का कार्य हो रहा है। कलेक्टर गौरव सिंह के मार्गदर्शन में ऐतिहासिक महत्व की पांडुलिपियों का संग्रहण कर उन्हें डिजिटल रूप से सुरक्षित किया जा रहा है, ताकि देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखा जा सके। इसी कड़ी में जैन धर्म से जुड़ी महत्वपूर्ण पांडुलिपियां एकत्र की गई हैं। नालंदा लाइब्रेरी की लाइब्रेरियन मंजुला जैन ने रायपुर के चूड़ी लाइन निवासी अजय गंगवाल से पांडुलिपियां प्राप्त कीं। साल 1915 में स्थापित चंद्र प्रभु दिगंबर जैन मंदिर में संरक्षित करीब 200 साल पुरानी 21 दुर्लभ चित्र लिपियां और पांडुलिपियां संग्रहित की गईं, जो जैन धर्म की परंपराओं और अनुष्ठानों से संबंधित हैं। रियासत और ताड़पत्रों में मिला ऐतिहासिक दस्तावेज इसके अलावा डॉ. एस एल कोका के संरक्षण में अंग्रेजी में लिखी महादेव लाल बारगाह की मूल पांडुलिपि भी मिली हैं, जिसमें सारंगढ़ रियासत के शासनकाल की प्रमुख घटनाओं का 100 पृष्ठों में विवरण दर्ज है। वहीं इतिहासकार रमेन्द्र नाथ मिश्र से ओड़िया भाषा में लिखे करीब 6000 पृष्ठों के 15 दुर्लभ ताड़पत्र प्राप्त हुए हैं, जिनमें धार्मिक, आयुर्वेदिक और ज्योतिष संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल हैं। मिश्र से ही कलचुरी शासन के अंतिम शासक राजा अमर सिंह देव की ओर से साल 1735 में देवनागरी लिपि में लिखा गया दुर्लभ ताम्रपत्र भी संग्रहित किया गया है। इन सभी ऐतिहासिक दस्तावेजों को ज्ञानभारतम् पोर्टल पर सुरक्षित किया जा रहा है, जिससे आने वाली पीढ़ियां भी इस समृद्ध धरोहर से जुड़ सकें।
<
