![]()
राज्य सरकार ने स्कूल शिक्षा विभाग के 1,535 अतिथि शिक्षकों के 4-5 महीने के लंबित/वर्तमान मानदेय भुगतान के लिए 13.81 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। 20 हजार रुपए प्रतिमाह की दर से जारी यह राशि सबसे ज्यादा बलरामपुर (1.98 करोड़), कोण्डागांव (1.27 करोड़) और बस्तर (1.20 करोड़) को मिली है। सरकार का दावा है कि इससे मानदेय भुगतान में राहत मिलेगी। लेकिन आंकड़े यह भी बताते हैं कि आदिवासी और दूरस्थ जिलों को प्राथमिकता दी गई है, जिससे शिक्षक उपलब्धता की चुनौती पर फोकस साफ दिखता है।
दूरस्थ जिलों पर फोकस, सरकार ने बदली प्राथमिकता
अतिथि शिक्षकों के मानदेय के लिए जारी आवंटन में मैदानी जिलों की तुलना में बस्तर और सरगुजा संभाग के जिलों को ज्यादा हिस्सेदारी मिली है। अकेले बलरामपुर, कोण्डागांव, बस्तर, सूरजपुर और कांकेर को मिलाकर 6.75 करोड़ रुपए जारी हुए हैं, जो कुल आवंटन का लगभग 49 फीसदी बैठता है। इससे संकेत है कि सरकार ने शिक्षक कमी वाले इलाकों को प्राथमिकता दी है। एक शिक्षक पर औसतन 90 हजार रुपए 13.81 करोड़ रुपए को 1535 अतिथि शिक्षकों पर बांटें तो प्रति शिक्षक औसतन करीब 89,967 रुपए बैठते हैं, यानी लगभग 4.5 महीने का मानदेय। यह आंकड़ा विज्ञप्ति में बताए गए 4-5 माह के भुगतान दावे से मेल खाता है। सबसे ज्यादा और सबसे कम आवंटन सबसे ज्यादा राशि: सबसे कम राशि: यह अंतर बताता है कि जिलों में अतिथि शिक्षकों की संख्या और आवश्यकता में बड़ा अंतर है। आंकड़ों में क्या कहती है तस्वीर जिलेवार जारी प्रमुख राशियों का योग करीब 13.80 करोड़ रुपए बैठता है, जो घोषित 13.81 करोड़ के लगभग बराबर है। यानी आवंटन में गणना संतुलित दिखाई देती है। सिर्फ भुगतान नहीं, चुनावी-सामाजिक संदेश भी यह आवंटन सिर्फ मानदेय भुगतान नहीं, बल्कि एक सियासी-सामाजिक संदेश भी माना जा रहा है। लंबे समय से अतिथि शिक्षक नियमित भुगतान और सेवा सुरक्षा की मांग उठाते रहे हैं। ऐसे में यह फैसला राहत जरूर देता है, लेकिन यह भी सवाल रहेगा कि मानदेय संकट का स्थायी समाधान कब निकलेगा। शिक्षा व्यवस्था पर असर अधिकारियों के मुताबिक राशि जारी होने से स्कूलों में पठन-पाठन प्रभावित नहीं होगा और अतिथि शिक्षकों की उपलब्धता बनी रहेगी। खासकर दूरस्थ इलाकों में जहां नियमित शिक्षकों की कमी है, वहां यह आवंटन शिक्षा तंत्र के सहारे की तरह देखा जा रहा है।
<
