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भास्कर एक्सपर्ट – डॉ. अनुरूप साहू, शिशुरोग विशेषज्ञ (रेबीज पीड़ित बच्ची का इलाज इन्होंने किया)
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एक्सपर्ट के साथ भास्कर के इमरान नेवी की रिपोर्ट
बीजापुर जिले के छोटे से गांव की 11 साल की एक मासूम बच्ची ने वो कर दिखाया, जो अब तक मेडिकल साइंस में लगभग नामुमकिन माना जाता रहा है। इसी साल मार्च में एक आवारा कुत्ते ने बच्ची को काट लिया था। आमतौर पर वायरस के लक्षण 1 से 3 महीने में दिखते हैं। कुछ मामलों में 5 से 7 दिन में भी आ सकते हैं।
कभी-कभी लक्षण एक साल बाद भी उभर सकते हैं। इस बच्ची के मामले में कुछ दिनों तक तो सब सामान्य रहा। परिवार ने किसी हॉस्पिटल में ले जाने की बजाय पहले झाड़-फूंक और देशी इलाज का सहारा लिया। लेकिन अचानक बच्ची की तबीयत बिगड़ने लगी। पानी से डर लगने, मुंह से झाग आने और आसपास के लोगों पर झपटने जैसे लक्षण दिखने लगे।
ये सभी लक्षण रेबीज के थे। जब रेबीज के लक्षण विकसित हो जाते हैं, तो आमतौर पर इसका इलाज संभव नहीं होता। लेकिन इस बार चमत्कार हुआ है। जब बच्ची हॉस्पिटल आई थी, तब वह पागलों की तरह बर्ताव कर रही थी। हम समझ गए थे कि रेबीज के लक्षण हैंं। बच्ची पानी को देखकर ही डर रही थी। यहां तक कि उसने पानी भी पीना छोड़ दिया था।
इसके बाद हमने बच्ची को सिम्प्टोमेटिक इलाज और स्ट्रिक्ट ऑब्जर्वेशन में रखा। बच्ची मानसिक रूप से बेहद मजबूत थी। वो इलाज में पूरा सपोर्ट कर रही थी। हमने बच्ची को लक्षण के अनुसार दवाएं दीं और उसने तेजी से रिकवर करना शुरू किया।
रेबीज के लक्षण विकसित होने के बाद हमने कभी किसी को भी रिकवर होते नहीं देखा है, क्योंकि इसके लिए कोई विशेष एंटीरेबीज एन्सिफेलिटिक इंजेक्शन या दवाएं ही उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन बच्ची की इच्छाशक्ति ने उसे नई जिंदगी दी है। 10 दिन पहले ही बच्ची एडमिट हुई थी, अब वह पूरी तरह से स्वस्थ हो गई है और 18 अक्टूबर को उसे डिस्चार्ज भी कर दिया गया है।
हमने बच्ची के केस में रिस्क लिया, क्योंकि वह बहुत छोटी थी और उसकी इम्यूनिटी अच्छी थी। हम खुश हैं कि हम उसे बचा पाए, लेकिन सभी से अपील भी है कि कुत्ता काटने के बाद देशी इलाज न करवाएं। तत्काल एंटी रैबीज वैक्सीन की पूरी डोज लें। समय पर किया गया इलाज ही इस मामले में बचाव है।
पिता ने कहा- जब मैं गांव पहुंचा, तो बेटी को रस्सियों से बांधकर रखा था बच्ची के पिता ने बताया कि वे बाहर नौकरी करते हैं। उन्होंने बताया गया कि गांव में बच्ची पागलों की तरह हरकतें करने लगी थी। मैं जब गांव पहुंचा तो गांव के लोगों और परिवार के सदस्यों ने उसे रस्सियों से बांधकर रखा था। फिर बेटी को बीजापुर हॉस्पिटल लेकर आया।
यहां एक रात बिताने के बाद डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज जाने की सलाह दी और उसे रेफर कर दिया गया। इसके बाद हम मेकॉज पहुंचे। यहां जाकर हमें सही इलाज मिला। डॉक्टरों ने हमारी बच्ची को नया जीवन दिया है।
जानिए: क्या होता है रेबीज एक घातक वायरस जनित रोग है, जो आमतौर पर संक्रमित जानवर खासतौर पर कुत्ते, बिल्ली या बंदर के काटने या नोचने से फैलता है। एक बार अगर इसके लक्षण शरीर में विकसित हो जाएं तो यह लगभग सभी मामलों में यह जानलेवा साबित होता है।
बचाव: 24 घंटे में एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाएं यदि किसी को कुत्ता, बिल्ली या कोई जंगली जानवर काटता है तो तुरंत बहते पानी और साबुन से घाव को अच्छी तरह धोएं। उसके बाद 24 घंटे के अंदर स्वास्थ्य केंद्र में जाकर एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाएं। कुल 5 टीकों का कोर्स होता है, जिसे समय पर पूरा करना बेहद जरूरी है।
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