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रायपुर नगर निगम नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने विपुल इलाके में चल रहे नाला निर्माण को लेकर बड़ा आरोप लगाया है। उनका कहना है कि नाले के नाम पर जिस जमीन पर काम शुरू किया गया, वहां सीमांकन के बाद शासकीय भूमि पर कब्जे का मामला सामने आया है। रिपोर्ट के बाद फिलहाल निर्माण कार्य रोक दिया गया है। उनका कहना है कि, मामला सिर्फ एक नाले तक सीमित नहीं है। सवाल शहर की सार्वजनिक जमीन और करदाताओं के पैसे का है। आरोप है कि, होटल बेबीलॉन और क्वींस क्लब ने सरकारी जमीन अतिक्रमण का कब्जा किया है। जिससे शहर की ड्रेनेज व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। वीआईपी इलाके में सीमांकन के बाद खुला मामला जानकारी के मुताबिक, 9 अप्रैल को नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी और स्थानीय पार्षद रेणु जयंत साहू ने मौके का निरीक्षण किया था। दोनों ने बिना सीमांकन नाला निर्माण पर आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बाद नगर निगम आयुक्त के हस्तक्षेप से 17 अप्रैल को सीमांकन कराया गया। सीमांकन रिपोर्ट में दावा किया गया कि, कई नामचीन संस्थानों ने शासकीय जमीन पर कब्जा कर रखा है। बेबीलोन होटल पर 0.0100 हेक्टेयर शासकीय भूमि पर कब्जे का आरोप। क्वींस क्लब पर 0.0060 हेक्टेयर भूमि पर कब्जे का आरोप। रामस्वरूप निरंजन चैरिटेबल ट्रस्ट पर 0.1100 हेक्टेयर भूमि पर कब्जे की बात सामने आई। पार्षद का आरोप- जनप्रतिनिधियों को रखकर दूर कराया सीमांकन पार्षद रेणु जयंत साहू ने आरोप लगाया कि, जोन-9 के अधिकारी राकेश शर्मा को कई बार पत्र लिखे गए, लेकिन सीमांकन जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी के बिना कराया गया। उनका कहना है कि पूरी प्रक्रिया पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं, क्योंकि आसपास चल रहे अविनाश बिल्डर्स के आवासीय प्रोजेक्ट की जमीन को लेकर भी संदेह है। अब निगम प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल नेता प्रतिपक्ष और पार्षद की मांग है कि, पार्षदों की मौजूदगी में दोबारा पारदर्शी सीमांकन कराया जाए। साथ ही जब तक उच्चस्तरीय जांच पूरी नहीं होती, तब तक नाला निर्माण शुरू न किया जाए। अब निगाहें रायपुर नगर निगम पर हैं। देखना यह है कि प्रशासन सरकारी जमीन पर कब्जे के आरोपों में कार्रवाई करता है या मामला फाइलों तक सीमित रह जाता है।
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