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छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में हाथियों की मौजूदगी लगातार बढ़ रही है। जिले में 130 से अधिक हाथियों का मूवमेंट दर्ज किया गया है। रात होने के बाद हाथियों के झुंड किसानों के खेतों में पहुंच रहे हैं। रविवार रात धर्मजयगढ़ वन मंडल के अलग-अलग रेंज में लगभग 15 किसानों की धान और मक्का की फसल को हाथियों ने खाकर और पैरों से रौंदकर नष्ट कर दिया। नुकसान का आकलन किया जा रहा है। रायगढ़ वन मंडल में 38 और धर्मजयगढ़ वन मंडल में 94 हाथियों की मौजूदगी बताई जा रही है। रविवार रात धर्मजयगढ़ रेंज के आमगांव में हाथियों का दल खेतों तक पहुंचा, जहां उन्होंने 5 किसानों की धान की फसल को नुकसान पहुंचाया। वहीं दर्रीडीह और ओंगना में 3 किसानों की फसल, क्रोंधा में 1 किसान की फसल, छाल रेंज के लामीखार में 1 किसान की मक्का फसल, हाटी तेंदुमुडी में 3 किसानों की धान की फसल और बोरो रेंज के कुमा में 2 किसानों की धान की फसल को नुकसान हुआ। सुबह होने से पहले जंगल की ओर गए हाथी जानकारी के अनुसार रात में हाथियों के आने की सूचना मिलने पर ग्रामीणों और वनकर्मियों ने उन्हें खेतों से भगाने का प्रयास किया, लेकिन हाथियों का दल खेतों में डटा रहा और सुबह होने से पहले वापस जंगल की ओर चला गया। सुबह विभागीय कर्मचारियों ने नुकसान का आकलन शुरू किया। जिले में 132 हाथियों की मौजूदगी जिले के दोनों वन मंडलों में 132 हाथी अलग-अलग जंगलों में विचरण कर रहे हैं। धरमजयगढ़ वन मंडल में हाथियों की संख्या अधिक है। यहां विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार 31 नर, 37 मादा और 26 शावक हैं। रायगढ़ वन मंडल की बात करें तो यहां 5 नर, 26 मादा और 7 शावक मौजूद हैं। सबसे अधिक 20 हाथियों की संख्या घरघोड़ा रेंज के नवापारा टेंडा में है। इसके बाद घरघोड़ा के अमलीडीह में 15, धरमजयगढ़ रेंज के आमगांव में 15 और चैनपुर में 15 हाथी विचरण कर रहे हैं। छाल रेंज में लगातार निगरानी छाल रेंजर राजेश चौहान ने बताया कि छाल रेंज में हाथियों के हर मूवमेंट पर नजर रखी जा रही है। फसल और अन्य नुकसान न हो इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, जिन क्षेत्रों में हाथियों की मौजूदगी रहती है, उन गांवों में हाथी मित्र दल के सदस्यों की ओर से मुनादी भी कराई जाती है। विभाग लगातार हाथियों की निगरानी कर रहा है।
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