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सूरजपुर जिले में बाल विवाह के दो मामले सामने आए हैं। इनमें एक 14 वर्षीय नाबालिग लड़की को उसके पति के घर से रेस्क्यू किया गया है। प्रशासन ने दोनों मामलों में कार्रवाई करते हुए बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम और पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर रेना जमील के निर्देश पर महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड लाइन और पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की। प्रशासन का कहना है कि सख्ती के डर से कुछ लोग तय मुहूर्त से पहले ही नाबालिगों की शादी करा रहे हैं। 14 साल की लड़की पति के घर में रह रही थी पहला मामला भटगांव के पास एक गांव का है। सूचना मिली थी कि 14 वर्षीय बालिका का विवाह कराया जा रहा है। टीम मौके पर पहुंची तो पता चला कि बालिका की शादी 4 दिसंबर 2025 को सारासोर मंदिर में कराई गई थी। उस समय लड़की की उम्र सिर्फ 13 साल 8 माह थी। शादी के बाद से वह लड़के के घर में पति-पत्नी की तरह रह रही थी। सामाजिक रीति-रिवाज की रस्में चल रही थीं, तभी टीम ने पहुंचकर बालिका को रेस्क्यू किया। फिलहाल बालिका को सखी वन स्टॉप सेंटर में रखा गया है और उसे बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया। 1098 पर सूचना मिलते ही पहुंची टीम दूसरा मामला प्रेमनगर क्षेत्र के एक दूरस्थ गांव का है। टोल फ्री नंबर 1098 पर नाबालिग की शादी की सूचना मिली थी। टीम जब गांव पहुंची तो परिजन जानकारी छिपाने लगे। सख्ती करने पर उन्होंने बताया कि प्रशासनिक कार्रवाई के डर से उसी सुबह बारात बुलाकर लड़की की शादी करा दी गई और उसे ससुराल भेज दिया गया। इसके बाद टीम वर पक्ष के गांव पहुंची। शुरुआत में लड़के और उसके पिता ने शादी से इनकार किया, लेकिन पूछताछ में मामला सामने आ गया। लड़की के माथे पर सिंदूर लगा मिला। इसके बाद बालिका को उसकी दादी के साथ सखी वन स्टॉप सेंटर भेजा गया। बाल विवाह पर जीरो टॉलरेंस जिला कार्यक्रम अधिकारी ने दोनों मामलों में संबंधित अधिकारियों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 और पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर रेना जमील ने कहा कि जिले में बाल विवाह को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई है। संयुक्त टीम 24 घंटे अलर्ट पर है और सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बाल विवाह की सूचना तुरंत 1098 या जिला प्रशासन को दें।
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