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रायपुर की नारकोटिक्स कोर्ट नशे के मामलों में बेहद सख्त रुख अपना रही है। गांजा, हेरोइन, कोकीन, प्रतिबंधित टैबलेट, कैप्सूल और सिरप की तस्करी के मामलों में रोजाना सुनवाई हो रही है। फास्ट ट्रैक तर्ज पर गवाही तेज होने से 14 माह में 220 से अधिक मामलों में 320 से ज्यादा तस्करों को सजा दी गई, जिसमें जुर्माने से लेकर 20 साल तक का कारावास शामिल है। कोर्ट ने सूखे नशे को समाज के लिए घातक बताया है। विशेष न्यायाधीश पंकज कुमार सिन्हा, किरण थवाईत, शैलेश शर्मा और दिलेश कुमार यादव की अदालतों में 2021 से 2025 तक के 210 से अधिक मामलों की सुनवाई पूरी हो चुकी है। जानिए… पिछले डेढ़ साल में किसे कितने साल की हुई सजा 20 साल की सजा अजहरुद्दीन कुरैशी 20 साल कारावास और 2 लाख अर्थदंड नरेश निहाल 20 साल कारावास और 2 लाख अर्थदंड 15 साल की सजा
प्रवीण देवांगन: 15 साल सश्रम कारावास और 1.50 लाख अर्थदंड
शरद नायक: 15 साल सश्रम कारावास और 1.50 लाख अर्थदंड
जुगनू अंसारी व अन्य: 15-15 साल कारावास और 1.50 लाख अर्थदंड
सुनील निषाद व अन्य: 15-15 साल कारावास और 1.50 लाख अर्थदंड
सतीश दौलत, अन्य: 15-15 साल जेल, अर्थदंड। 10 साल की सजा मनप्रीत सिंह व दविंदर सिंह: 10-10 साल जेल और 1-1 लाख रु.अर्थदंड
एहसान खान एवं सरफराज खान: 10-10 साल कारावास और एक-एक लाख रुपए अर्थदंड
गणेश बागर्ती व अन्य: 10-10 साल कारावास और 1-1 लाख अर्थदंड
शोभा व अन्य: 10 साल जेल, 1 लाख अर्थदंड
रिचिक अग्रहरि: 10 साल जेल, 1 लाख अर्थदंड।
(8 केस में) 5 साल + की सजा पंकज बिसेन व अन्य: 8-8 साल कारावास और 80 हजार रुपए अर्थदंड
विकास देशमुख: 7 साल का कारावास और 75 हजार रुपए अर्थदंड
भार्गव तांडी: 7 साल का कारावास और 70 हजार रुपए अर्थदंड
शुभांक पोल, अन्य: 7-7 साल सश्रम कैद व 1 लाख रुपए अर्थदंड
रत्नेश सोनी: 6 साल जेल और 60 हजार अर्थदंड। 2026 में पिछले तीन माह में 51 तस्करों को दी गई सजा 20 साल की सजा: 02 मामले
15 साल की सजा: 13 मामले
10 साल की सजा: 08 मामले
तस्करी के बदलते तौर-तरीके
कोर्ट की सख्ती के बाद तस्करों ने रूट और तरीका बदल दिया है। पहले गांजा सड़क मार्ग से आता था, अब छोटी खेप में ट्रेन और कूरियर से भेजा जा रहा है। सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को डिलीवरी में फंसाया जा रहा है, जबकि हैंड-टू-हैंड डिलीवरी बंद हो गई है। फास्ट ट्रैक की तरह सुनवाई
पहले नारकोटिक्स मामलों में गवाह मुकरने और फॉरेंसिक रिपोर्ट में देरी बड़ी बाधा थी, लेकिन अब स्थिति बदली है। पुलिस और अभियोजन की डे-टू-डे मॉनिटरिंग से गवाही तेज हुई है, साक्ष्य के अभाव में आरोपी छूटने पर लगाम लगी है और रिपोर्ट भी समय पर आ रही है। नारकोटिक्स के मामले में एसीपी कोतवाली को नोडल बनाया गया है। कार्रवाई से लेकर कोर्ट की प्रक्रिया और गवाही, सभी की डे-टू-डे मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि तस्करों को सख्त सजा मिल सके। कोर्ट से जमानत या बरी होने वालों की भी निगरानी की जा रही है।- डॉ. संजीव शुक्ला, पुलिस कमिश्नर
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