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Home » सिम्स के डॉक्टरों ने बचाई युवक की जान:बिलासपुर में कटी हुई श्वासनली की सफल सर्जरी, 2 घंटे तक चला ऑपरेशन
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सिम्स के डॉक्टरों ने बचाई युवक की जान:बिलासपुर में कटी हुई श्वासनली की सफल सर्जरी, 2 घंटे तक चला ऑपरेशन

By adminJune 10, 2026No Comments4 Mins Read
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बिलासपुर के छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) के डॉक्टरों ने युवक की जान बचाई है। युवक की श्वासनली (विंड पाइप) कट गई थी। गंभीर हालत में पहुंचे मरीज की डॉक्टरों ने करीब दो घंटे तक जटिल सर्जरी कर जान बचाई। यह घटना 1 जून की है। सुबह करीब 7 बजे 26 वर्षीय शादाब खान को गंभीर हालत में सिम्स के कैजुअल्टी वार्ड लाया गया। उसके गले में गहरा घाव था और श्वासनली कट जाने के कारण उसे सांस लेने में काफी परेशानी हो रही थी। घाव से हवा का आवागमन साफ दिखाई दे रहा था, जो डॉक्टरों के अनुसार बेहद गंभीर स्थिति थी। शरीर में ऑक्सीजन का स्तर भी लगातार कम हो रहा था। डॉक्टरों ने तुरंत लिया ऑपरेशन का फैसला मरीज की हालत को देखते हुए ईएनटी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. आरती पाण्डेय, सह प्राध्यापक डॉ. विद्याभूषण साहू और सहायक प्राध्यापक डॉ. श्वेता मित्तल ने तुरंत जांच की। डॉक्टरों ने बिना देर किए मरीज को आपातकालीन ऑपरेशन थिएटर में ले जाने का निर्णय लिया। सबसे बड़ी चुनौती मरीज का श्वास मार्ग सुरक्षित करना था, क्योंकि थोड़ी सी देरी भी जानलेवा साबित हो सकती थी। दो घंटे चली जटिल सर्जरी ऑपरेशन थिएटर में सबसे पहले डॉक्टरों ने आपातकालीन ट्रेकियोस्टॉमी कर मरीज का श्वास मार्ग सुरक्षित किया। इससे ऑक्सीजन का स्तर सामान्य किया गया। इसके बाद करीब दो घंटे तक चली जटिल सर्जरी में श्वासनली की मरम्मत की गई। साथ ही गर्दन की अन्य क्षतिग्रस्त संरचनाओं को भी ठीक किया गया। पांच परतों में की गई मरम्मत सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने श्वासनली, उसके ऊपर की मांसपेशियों, फैशियल लेयर और त्वचा को क्रमवार पांच परतों में जोड़कर मरम्मत की। डॉक्टरों की सूक्ष्म तकनीक, अनुभव और धैर्यपूर्ण प्रयासों से मरीज की गंभीर चोट का सफल इलाज किया गया। सिर में भी मिली गंभीर चोट, रायपुर किया गया रेफर सर्जरी के बाद जांच में मरीज के सिर की हड्डी में कई जगह फ्रैक्चर और सीटी स्कैन में मस्तिष्क के भीतर रक्तस्राव (ब्रेन हेमरेज) के संकेत मिले। सिम्स में न्यूरोसर्जन उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीज को प्राथमिक उपचार देकर आगे के इलाज के लिए पंडित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय और अस्पताल, रायपुर रेफर किया गया। वहां उसका इलाज जारी है। एनेस्थीसिया टीम की भी रही अहम भूमिका इस जटिल सर्जरी में एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष और प्रोफेसर डॉ. मधुमिता मूर्ति और सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रशांत कुमार पैंकरा के नेतृत्व में एनेस्थीसिया टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीम ने पूरे ऑपरेशन के दौरान मरीज की स्थिति को स्थिर और सुरक्षित बनाए रखा। समय पर इलाज और टीमवर्क से बची जान ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. आरती पाण्डेय ने बताया कि मरीज को सांस लेने में काफी दिक्कत हो रही थी। टीम ने तुरंत निर्णय लेते हुए उसका श्वास मार्ग सुरक्षित किया और श्वासनली की जटिल सर्जरी की। उन्होंने कहा कि इस तरह की चोटें बेहद दुर्लभ और जानलेवा होती हैं, लेकिन समय पर उपचार और बेहतर टीमवर्क की वजह से मरीज की जान बचाई जा सकी। सिम्स में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का दावा सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने इस सफलता पर डॉक्टरों की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सिम्स में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और विशेषज्ञ सेवाओं के जरिए लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। वहीं, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि अस्पताल में आने वाले हर गंभीर मरीज को त्वरित और गुणवत्तापूर्ण उपचार देना उनकी प्राथमिकता है।

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) के डॉक्टरों ने एक युवक की जान बचाई है। युवक की श्वासनली कट गई थी, जिसके बाद डॉक्टरों ने दो घंटे की जटिल सर्जरी कर उसे नया जीवन दिया। यह घटना 1 जून की है। सुबह करीब 7 बजे 26 वर्षीय शादाब खान को गंभीर हालत में सिम्स के कैजुअल्टी वार्ड लाया गया। उसके गले में गहरा खुला घाव था और श्वासनली कटने के कारण उसे सांस लेने में परेशानी हो रही थी। घाव से हवा का स्पष्ट आवागमन हो रहा था, जो चिकित्सकीय दृष्टि से अत्यंत गंभीर स्थिति थी। मरीज के शरीर में ऑक्सीजन का स्तर लगातार गिर रहा था। ईएनटी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. आरती पाण्डेय, सह प्राध्यापक विद्याभूषण साहू और सहायक प्राध्यापक डॉ. श्वेता मित्तल ने तत्काल स्थिति का आकलन किया। चिकित्सकों ने तुरंत मरीज को आपातकालीन ऑपरेशन थिएटर ले जाने का निर्णय लिया। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती मरीज के श्वास मार्ग को सुरक्षित करना था, क्योंकि थोड़ी सी भी देरी जानलेवा साबित हो सकती थी। ऑपरेशन थिएटर में पहुंचते ही डॉक्टरों ने आपातकालीन ट्रेकियोस्टॉमी कर मरीज का श्वास मार्ग सुरक्षित किया। इससे ऑक्सीजन संतृप्ति सामान्य स्तर पर लाई गई। इसके बाद दो घंटे की जटिल सर्जरी शुरू हुई, जिसमें श्वासनली की मरम्मत के साथ गर्दन की अन्य क्षतिग्रस्त संरचनाओं को भी पुनर्स्थापित किया गया।



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