सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने जिम्मेदारी से बचने के लिए तर्क दिया कि दुर्घटना में मोटरसाइकिल चालक की भी गलती थी। साथ ही अन्य पक्षों को केस में शामिल न …और पढ़ें

HighLights
- अधिकरण ने खारिज की बीमा कंपनी की दलील
- पीछे से टक्कर मारना लापरवाही का स्पष्ट सबूत
- हर्जान युनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी देगी।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। अपर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, बिलासपुर के पीठासीन न्यायाधीश की अदालत ने एक अहम फैसले में सड़क हादसे का शिकार हुए हुई 70 वर्षीय वृद्ध मां दुलौरिन बाई को न्याय दिया है। कोर्ट ने आवेदिका के पक्ष में 16,53,456 रुपये का अंतिम मुआवजा अवार्ड पारित किया है। हर्जाना भुगतान की मुख्य जिम्मेदारी युनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी पर तय की गई है।
मामला 22 अप्रैल 2024 का है। ग्राम तिफरा निवासी समीर कुमार सूर्यवंशी अपनी मोटरसाइकिल से बिलासपुर के एक मेडिकल स्टोर में काम करने जा रहा था।
तिफरा ओवरब्रिज के पास रात्रि करीब 11 बजे, एक तेज रफ्तार कंक्रीट मिक्सर ट्रक सीजी 10 ईएस 2397 के चालक प्रकाश उरांव ने लापरवाही से गाड़ी चलाते हुए बाइक को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। इस दर्दनाक हादसे में समीर की मौके पर ही मौत हो गई।
सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने जिम्मेदारी से बचने के लिए तर्क दिया कि दुर्घटना में मोटरसाइकिल चालक की भी गलती थी। साथ ही अन्य पक्षों को केस में शामिल न करने की बात उठाई।
अदालत ने इन दलीलों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि ट्रक ने मोटरसाइकिल को पीछे से टक्कर मारी थी, जहां परिस्थितियां स्वयं चालक की गलती बयां करती हैं।
सर्वोच्च न्यायालय के सिद्धांतों के अनुसार दावेदार अपनी सुविधा से दुर्घटना में शामिल किसी भी एक वाहन के मालिक या बीमा कंपनी से पूरा मुआवजा वसूलने के लिए स्वतंत्र है।
ट्रक के सभी दस्तावेज वैध पाए जाने पर कोर्ट ने इंश्योरेंस कंपनी को एक माह के भीतर दावों की विभिन्न मदों सहित पूरी राशि ट्रिब्यूनल में जमा करने का आदेश दिया है।
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