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सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले से जुड़े मामलों में पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को जमानत दे दी है। सोमवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ में मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा कि मामले के कई सह-आरोपी पहले ही जमानत पर बाहर हैं और ट्रायल पूरा होने में अभी लंबा समय लगेगा। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने निरंजन दास को भी उन्हीं शर्तों पर जमानत दी है, जो अन्य आरोपियों पर लागू की गई हैं। कोर्ट ने शर्त रखी है कि निरंजन दास को छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहना होगा। वे केवल जांच और कोर्ट में पेशी के लिए ही राज्य में आ सकेंगे। साथ ही उन्हें समय-समय पर सुनवाई में उपस्थित होना होगा। अब तक प्रदेश में हुए शराब, कोयला, डीएमएफ और अन्य आर्थिक घोटालों से जुड़े मामलों में 2 निलंबित IAS अधिकारियों और पूर्व आबकारी मंत्री समेत 10 आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट राज्य से बाहर रहने की शर्त पर जमानत दे चुका है। सितंबर 2025 में हुई थी गिरफ्तारी सुनवाई के दौरान कोर्ट में बताया गया कि निरंजन दास पर राज्य की आबकारी नीति तैयार करने में अहम भूमिका निभाने और उससे कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के आरोप हैं। उन्हें शराब घोटाले से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में 18 सितंबर 2025 और 19 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में निरंजन दास जमानत की शर्तों में ढील देने के लिए आवेदन कर सकते हैं। कई आरोपी जेल से बाहर, राज्य छोड़ने की शर्त लागू छत्तीसगढ़ में शराब घोटाला, कोल लेवी, डीएमएफ और अन्य आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों में कई बड़े आरोपी फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। इनमें पूर्व आईएएस अधिकारी, कारोबारी और सरकारी तंत्र से जुड़े लोग शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट से जमानत पाने वालों में रिटायर्ड IAS अनिल टुटेजा, निलंबित IAS रानू साहू, निलंबित IAS समीर विश्नोई, राज्य सेवा अधिकारी सौम्या चौरसिया, एपी त्रिपाठी, पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, कारोबारी सूर्यकांत तिवारी, केके श्रीवास्तव और रिटायर्ड IAS निरंजन दास शामिल हैं। इन सभी पर एक जैसी शर्तें लागू की गई हैं, जिसके तहत उन्हें छत्तीसगढ़ से बाहर रहना होगा, ताकि गवाहों और जांच को प्रभावित न किया जा सके। अधिकांश मामलों में ट्रायल अभी जारी है। अब जानिए क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED जांच कर रही है। ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है। दर्ज FIR में 3200 करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है। ED ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था। A, B और C कैटेगरी में बांटकर किया गया घोटाला A: डिस्टलरी संचालकों से कमीशन 2019 में डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी 75 रुपए और बाद के सालों में 100 रुपए कमीशन लिया जाता था। कमीशन को देने में डिस्टलरी संचालकों को नुकसान ना हो, इसलिए नए टेंडर में शराब की कीमतों को बढ़ाया गया। साथ ही फर्म में सामान खरीदी करने के लिए ओवर बिलिंग करने की राहत दी गई। B: नकली होलोग्राम वाली शराब को सरकारी दुकानों से बिकवाना डिस्टलरी मालिक से ज्यादा शराब बनवाई। नकली होलोग्राम लगाकर सरकारी दुकानों से बिक्री करवाई गई। नकली होलोग्राम मिलने में आसानी हो, इसलिए एपी त्रिपाठी के माध्यम से होलोग्राम सप्लायर विधु गुप्ता को तैयार किया गया। होलोग्राम के साथ ही शराब की खाली बोतल की जरूरत थी। खाली बोतल डिस्टलरी पहुंचाने की जिम्मेदारी अरविंद सिंह और उसके भतीजे अमित सिंह को दी गई। खाली बोतल पहुंचाने के अलावा अरविंद सिंह और अमित सिंह को नकली होलोग्राम वाली शराब के परिवहन की जिम्मेदारी भी मिली। सिंडिकेट में दुकान में काम करने वाले और आबकारी अधिकारियों को शामिल करने की जिम्मेदारी एपी त्रिपाठी को सिंडिकेट के कोर ग्रुप के सदस्यों ने दी। शराब बेचने के लिए प्रदेश के 15 जिले शॉर्ट लिस्टेड किए गए शराब बेचने के लिए प्रदेश के 15 जिलों को चुना गया। शराब खपाने का रिकॉर्ड सरकारी कागजों में ना चढ़ाने की नसीहत दुकान संचालकों को दी गई। डुप्लीकेट होलोग्राम वाली शराब बिना शुल्क अदा किए दुकानों तक पहुंचाई गई। इसकी एमआरपी सिंडिकेट के सदस्यों ने शुरुआत में प्रति पेटी 2880 रुपए रखी थी। इनकी खपत शुरू हुई, तो सिंडिकेट के सदस्यों ने इसकी कीमत 3840 रुपए कर दी। डिस्टलरी मालिकों को शराब सप्लाई करने पर शुरुआत में प्रति पेटी 560 रुपए दिया जाता था, जो बाद में 600 रुपए कर दिया गया था। ACB को जांच के दौरान साक्ष्य मिला है कि सिंडिकेट के सदस्यों ने दुकान कर्मचारियों और आबकारी अधिकारियों की मिलीभगत से 40 लाख पेटी से अधिकारी शराब बेची है। C: डिस्टलरीज की सप्लाई एरिया को कम/ज्यादा कर अवैध धन उगाही करना देशी शराब को CSMCL के दुकानों से बिक्री करने के लिए डिस्टलरीज के सप्लाई एरिया को सिंडिकेट ने 8 जोन में विभाजित किया। इन 8 जोन में हर डिस्टलरी का जोन निर्धारित होता था। 2019 में सिंडिकेट की ओर से टेंडर में नई सप्लाई जोन का निर्धारण प्रतिवर्ष कमीशन के आधार पर किया जाने लगा। एपी त्रिपाठी ने सिंडिकेट को शराब बिक्री का जोन अनुसार विश्लेषण मुहैया कराया था, ताकि क्षेत्र को कम-ज्यादा करके पैसा वसूल किया जा सके। इस प्रक्रिया को करके सिंडिकेट डिस्टलरी से कमीशन लेने लगा। EOW के अधिकारियों को जांच के दौरान साक्ष्य मिले हैं कि तीन वित्तीय वर्ष में देशी शराब की सप्लाई के लिए डिस्टलरीज ने 52 करोड़ रुपए पार्ट C के तौर पर सिंडिकेट को दिया है। ………………………… इससे संबंधित ये खबरें भी पढ़िए… 01. शराब घोटाला केस…सौम्या चौरसिया को मिली बेल: ED और EOW ने किया था गिरफ्तार, 45 दिन बाद जेल से बाहर आएगी छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला केस में गिरफ्तार पूर्व सीएम भूपेश बघेल की डिप्टी सेक्रेटरी रहीं सौम्या चौरसिया को हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। हालांकि, कोर्ट ने कुछ शर्तें भी रखी हैं। ऐसे में उनका जेल से बाहर आना मुश्किल है। पढ़ें पूरी खबर…
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