भास्कर न्यूज | सुकमा पिछड़े जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से मलेरिया से बचाव के लिए डाक्टरी इलाज पर जोर देने जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। पहली बार इस अभियान में गांव के बैगा, गुनिया को शामिल किया गया है। जिनके द्वारा मलेरिया की चपेट में आने पर झाड़फूंक न करा सीधे अस्पताल जाने की सलाह दे रहे हैं। जबकि इससे पहले छोटी-छोटी बीमारी का इलाज कराने के लिए ग्रामीण बैगा और गुनिया के पास झाड़फूंक कराने पहुंचते थे और बीमारी बढ़ने पर अपनी जान गंवा बैठते थे। संभाग के पिछड़े जिले में विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर मलेरिया से बचाव और ग्रामीणों में जागरूकता बढ़ाने के लिए जिला एवं पंचायत स्तर पर जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जिला अस्पताल और लाइवलीहुड कॉलेज में विद्यार्थियों को मलेरिया से बचाव की जानकारी देने के साथ स्वस्थ रहने के उपाय बताए गए। वहीं बीमार होने पर ग्रामीणों को बैगा गुनिया के पास झाड़फूंक कराने जाने से बचने की समझाइश भी दी गई। जिले के मलेरिया प्रभावित एवं अति संवेदनशील ग्राम गोंदपल्ली में विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। यहां ग्रामीणों के साथ-साथ पारंपरिक स्वास्थ्य सलाहकार बैगा, गुनिया, पेरमा एवं बड़े समुदाय के प्रमुखों की उपस्थिति में एक विशाल सम्मेलन आयोजित हुआ। इस सम्मेलन में मलेरिया से बचाव के उपायों पर चर्चा की गई और सामूहिक रूप से यह निर्णय लिया गया कि किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या होने पर इलाज में देरी नहीं की जाएगी। बीमार होने पर मरीजों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने में सभी मिलकर सहयोग करेंगे। अब तक गांवों में मलेरिया जैसे रोगों के लिए पारंपरिक उपचार करने वाले बैगा और गुनिया स्वयं ग्रामीणों को जागरूक कर रहे हैं। जिला मलेरिया सलाहकार एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ग्रामीणों को मच्छरदानी के नियमित उपयोग, घर एवं आसपास साफ-सफाई बनाए रखने, जलजमाव रोकने तथा समय पर मलेरिया जांच कराने की अपील की। स्वास्थ्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मलेरिया का प्रभावी नियंत्रण तभी संभव है जब ग्रामीण लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराएं और इलाज में देरी न करें। इस अवसर पर समुदाय के लोगों ने भी स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों की सराहना की और मलेरिया उन्मूलन में सहयोग का संकल्प लिया।
<
