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महिला आयोग की राष्ट्रीय अध्यक्ष विजया रहाटकर बुधवार को बिलासपुर पहुंची, जहां उन्होंने कहा कि धर्मांतरण से जुड़े कई मामलों पर महिला उत्पीड़न की आशंका होती है। इस तरह की शिकायतों पर आयोग गंभीरता से जांच करती है। देश के किसी एक राज्य को महिलाओं के खिलाफ अपराधों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि हर प्रदेश की परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं। कहीं घटनाएं ज्यादा सामने आती हैं, तो कहीं कम रिपोर्ट होती हैं, इसलिए तुलना करना सही नहीं है। महिलाओं के उत्पीड़न की शिकायतें लगातार सामने आती रहती हैं। हर साल देशभर से करीब 1 लाख मामले राष्ट्रीय महिला आयोग तक पहुंचते हैं। पीड़ित महिला दिल्ली तक नहीं पहुंच पाती, इसलिए आयोग की टीमें खुद राज्यों और जिलों में जाकर सुनवाई करती हैं, ताकि महिलाओं को न्याय मिल सके। 58 मामलों की सुनवाई, एक भी नहीं सुलझा राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम ने बुधवार को प्रार्थना सभा भवन में महिलाओं से जुड़े 58 मामलों की सुनवाई की, लेकिन एक भी केस मौके पर नहीं सुलझ पाया। ज्यादातर मामलों को पुलिस, सखी वन स्टॉप सेंटर और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को रेफर कर दिया गया। दोपहर करीब 2:15 बजे आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर पहुंचीं। पहले उन्होंने छोटा सा संबोधन दिया, फिर एक-एक कर शिकायतें सुनीं। कई महिलाएं पति और सास-ससुर की शिकायत लेकर पहुंचीं, लेकिन सुनवाई के दौरान पुलिस के खिलाफ भी शिकायतें सामने आईं। महिला उत्पीड़न पर आयोग लेता है संज्ञान राष्ट्रीय अध्यक्ष रहाटकर ने कहा कि धर्मांतरण से जुड़े मामले चिंताजनक है। इस तरह के कई मामले महिला उत्पीड़न जुड़ा होता है। नासिक के हालिया मामले पर भी आयोग ने संज्ञान लिया है और जांच जारी है। उन्होंने कहा कि धर्म और बाबा के अंध विश्वास के प्रति महिलाओं को जागरूक होना जरूरी है। राइस मिल संचालक की शिकायत लेकर पहुंची युवती एक महिला ने बताया कि उसके पति ने दूसरी महिला के लिए रेलवे से वीआरएस ले लिया और जरूरी डिक्लेरेशन नहीं भरा, जिससे परिवार को मेडिकल और पास जैसी सुविधाएं नहीं मिल रहीं। बेटी की नर्सिंग पढ़ाई तक छूट गई। इस पर आयोग ने रेलवे को पत्र लिखने के निर्देश दिए। तखतपुर की एक युवती ने राइस मिल संचालक पर निजी फोटो और चैट वायरल कर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। आयोग ने पुलिस को आईटी एक्ट में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। मस्तूरी और मल्हार से आए वैवाहिक विवादों में दोनों पक्षों को समझाइश दी गई, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। जानलेवा हमले की शिकायत भी पहुंची बिहान की कार्यकर्ता प्रभा यादव ने बैमा के युवक पर दो बार जानलेवा हमला करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने पहले केस दर्ज नहीं किया, बाद में दबाव पड़ने पर किया। आयोग ने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया। थाने वाले केस भी आयोग में बुलाए 58 में से 15 केस पहले से महिला थाने में दर्ज थे, जहां काउंसिलिंग होनी थी, लेकिन इन्हें भी आयोग की सुनवाई में बुला लिया गया। बाद में फिर थाने को ही लौटा दिया गया। 12 नए केस भी थानों को भेजे गए। बाकी मामलों को नवा बिहान, एसपी ऑफिस और सखी सेंटर को रेफर किया गया। संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने पर जोर रहाटकर ने कहा कि महिला सुरक्षा केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि समाज की संवेदनशीलता से भी जुड़ा है। उन्होंने थानों और संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि महिला प्रकरणों में संवेदनशील रवैया अपनाएं और पीड़ित महिलाओं को कानूनी के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक सहयोग भी दें। बेटियों को डिफेंस में जाने की सलाह ऑडिटोरियम में हुए ‘शी सर्व्स’ वर्कशॉप में अध्यक्ष रहाटकर और मेयर पूजा विधानी ने बेटियों को डिफेंस और प्रशासनिक सेवाओं में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया। महिलाओं को AI और डिजिटल ट्रेनिंग कार्यशाला में महिला समूहों को ‘यशोदा AI’ और डिजिटल टूल्स की ट्रेनिंग दी गई। बताया गया कि इससे वे अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग और डिजाइन खुद कर सकती हैं। प्री-मैरिटल काउंसिलिंग सेंटर का सुझाव कलेक्ट्रेट में बैठक के दौरान अध्यक्ष ने ‘तेरे मेरे सपने’ योजना लागू करने का सुझाव दिया। इसके तहत शादी से पहले काउंसिलिंग सेंटर खोले जाएंगे, ताकि बाद में विवाद कम हों।
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