![]()
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में गर्मी ने अप्रैल में ही तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। ऐसे में भिलाई के मैत्रीबाग चिड़ियाघर में जानवरों को हीटवेव से बचाने के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। प्रबंधन ने सफेद बाघों सहित सभी वन्य प्राणियों के लिए शॉवर, कूलर और विशेष डाइट जैसी व्यवस्थाएं लागू की हैं। मैत्रीबाग में मौजूद 5 सफेद बाघों को गर्मी से बचाने के लिए विशेष निगरानी रखी जा रही है। शनिवार को बाघ ‘राणा’ और ‘सिंघम’ को शॉवर दिया गया, जिससे उनके शरीर का तापमान नियंत्रित रहे। पानी की फुहार से उन्हें राहत मिल रही है और वे ज्यादा सक्रिय भी नजर आ रहे हैं। पहले देखिए ये तस्वीरें… बाघों के केज में लगाए गए कूलर प्रबंधन ने बाघों के बाड़े में कूलर भी लगाए हैं। वहीं अन्य बाड़ों में भी हाई पावर कूलर लगाए जा रहे हैं, जिससे अंदर का माहौल ठंडा रखा जा सके। कोशिश की जा रही है कि जानवरों को ऐसा वातावरण मिले, जैसा जंगल में पेड़ों की छांव और नमी से मिलता है। बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले भी कूलर लगाए गए थे, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण उन्हें हटा दिया गया था। अब जल्द ही दोबारा कूलर लगाने की तैयारी की जा रही है। गर्मी अभी और बढ़ने की संभावना है, ऐसे में आने वाले दिनों में अतिरिक्त इंतजाम किए जा सकते हैं। फिलहाल, प्रबंधन की कोशिश है कि चिड़ियाघर में रहने वाले हर जानवर को इस तेज गर्मी से राहत मिल सके। सभी जानवरों के केज में पर्याप्त पानी सिर्फ बाघ ही नहीं, बल्कि अन्य जानवरों के लिए भी खास इंतजाम किए गए हैं। सभी बाड़ों में पानी के बर्तन दिन में कई बार भरे जा रहे हैं, जिससे पानी की कमी न हो। गर्मी में जानवरों को बार-बार पानी की जरूरत होती है, इसलिए इस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। गार्डन एरिया में भी जगह-जगह फव्वारे लगाए गए हैं। इससे आसपास की हवा ठंडी रहती है और तापमान थोड़ा कम महसूस होता है। जानवरों को इससे राहत मिलती है और वे अधिक सहज बने रहते हैं। डाइट पर खास फोकस खाने में भी बदलाव किया गया है। जानवरों की डाइट में अब अधिक तरल पदार्थ शामिल किए जा रहे हैं, जिससे उनके शरीर में पानी की कमी न हो और वे डिहाइड्रेशन से सुरक्षित रहें। खासकर उन जानवरों के खान-पान पर विशेष नजर रखी जा रही है, जिन्हें गर्मी अधिक प्रभावित करती है। मैत्रीबाग प्रबंधन का कहना है कि, उनका मुख्य उद्देश्य सभी जानवरों को सुरक्षित और स्वस्थ रखना है। गर्मी के इस दौर में हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए हर जरूरी कदम उठाया जा रहा है। सफेद बाघों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है, क्योंकि वे जल्दी प्रभावित हो सकते हैं। 1965 में हुई थी नींव, 1972 में बना जू बीएसपी की स्थापना के 8 साल बाद साल 1965 में मैत्री बाग की शुरुआत एक गार्डन के रूप में की गई थी। बच्चों के लिए झूले और फिसलपट्टी जैसी सुविधाओं से शुरू हुए इस परिसर को 1972 में जू का स्वरूप दिया गया। शुरुआती दौर में यहां केवल भालू और बंदर रखे गए थे। 1976-78 के बीच शेर और बाघ भी लाए गए। आज यह जू 5 श्रेणियों के करीब 400 वन्य प्राणियों का घर है, जिनमें सांभर, नीलगाय, हायना, लेपर्ड, लोमड़ी, लकड़बग्घा, घड़ियाल और अन्य प्रजातियां प्रमुख हैं। लगभग 140 एकड़ में फैला परिसर बोटिंग, टॉय ट्रेन, म्यूजिकल फाउंटेन और गार्डन जैसी कई मनोरंजन सुविधाओं से लैस है। सफेद बाघों का मुख्य केंद्र, देश को दिए 13 वाइट टाइगर मैत्री बाग जू देश में सफेद बाघों के सबसे महत्वपूर्ण संरक्षण केंद्रों में गिना जाता है। 1990 में नंदन कानन से यहां पहला सफेद बाघ जोड़ा लाया गया था। तब से लेकर अब तक कुल 19 सफेद बाघों का जन्म इसी जू में हुआ है। इनमें से 13 को राजकोट, कानपुर, बोकारो, इंदौर, मुकुंदपुर और रायपुर सहित छह राज्यों में भेजा जा चुका है। जया की मौत के बाद अब यहां 5 सफेद बाघ मौजूद हैं। देश में सफेद बाघों की कुल संख्या लगभग 160 आंकी जाती है, जिनमें से 19 अकेले मैत्री बाग की देन हैं। हर साल आते हैं 12 लाख पर्यटक मैत्रीबाग में हर साल लगभग 12 लाख पर्यटक पहुंचते हैं। छुट्टियों और त्योहारों के दिनों में यहां भारी भीड़ देखने को मिलती है। इसके बावजूद यहां होने वाला खर्च आय से कई गुना अधिक है। जू के संचालन में कुल 50 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें नियमित और ठेका कर्मचारी शामिल हैं।
<
