नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। कलेक्टोरेट की न्याय शाखाओं में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका पर्दाफाश एडीएम कोर्ट के लिपिक विजय पांडेय की गिरफ्तारी से हुआ है। आरोपित लिपिक ने पिछले एक साल से वसूली का नेटवर्क फैला रखा था।
एडीएम शिवकुमार बनर्जी, ज्योति पटेल और अपर कलेक्टर एसएस दुबे के न्यायालयों के प्रकरणों का प्रभार अकेले इसी लिपिक के पास था।
मामलों की सुनवाई और आदेश जारी करने की महत्वपूर्ण भूमिका का फायदा उठाकर वह लोगों को जेल भेजने की धमकी देता और बचने के लिए मोटी रकम वसूलता था।
उसने कार्रवाई के मामले ही नहीं, कोर्ट में लंबित विवादित सीमांकन, विवादित नामांतरण, डायवर्सन, भूस्वामी हक मामले, विधि सामान्य राजस्व मामलों सहित प्राकृतिक आपदा से हुई क्षति में आर्थिक सहायता राशि स्वीकृति के मामलों में भी पीड़ितों से वसूली की थी।
वसूली कार्यालय काम के दिनों की अपेक्षा रविवार या अवकाश के दिनों में ही होती थी, ताकि लेनदेन करते उसे कोई देख न सके।
मातृत्व अवकाश का उठाया फायदा, खुद बना सर्वेसर्वा
न्यायालय में पदस्थ अपर डिवीजन क्लर्क के मातृत्व अवकाश पर जाने के बाद विजय पांडेय ने सभी महत्वपूर्ण प्रकरणों पर एकाधिकार जमा लिया था। वह खुद ही प्रकरणों से संबंधित लोगों को फोन कर न्यायालय बुलवाता था। कड़े कानूनी प्रविधानों का हवाला देकर वह सीधे जेल भेजने का डर दिखाता, जिससे घबराकर लोग बचाव का रास्ता पूछते और वहीं से सौदेबाजी शुरू होती थी।
इस मामले में एसीबी ने घूस लेते पकड़ा
आरोपित की गिरफ्तारी खाद्य एवं औषधि विभाग की एक पुरानी कार्रवाई से जुड़ी है। अगस्त 2025 में कोटा स्थित देवेंद्र कश्यप के होटल से पेड़ों की सैंपलिंग की गई थी। यह मामला एडीएम शिव कुमार बनर्जी के कोर्ट में लंबित था। विजय ने देवेंद्र को भारी जुर्माने का डर दिखाकर क्लीनचिट के बदले एक लाख रुपये मांगे थे। सौदा 20 हजार में तय हुआ, जिसमें से पांच हजार वह पहले ही ले चुका था। रविवार 10 मई को दूसरी किस्त के 15 हजार रुपये लेते हुए एसीबी की टीम ने उसे धर दबोचा।
फैक्ट फाइल: तीन एडीएम कोर्ट में लंबित मामले
न्यायालय लंबित प्रकरण
एडीएम शिव कुमार बनर्जी-25
एडीएम-2 ज्योति पटेल-65
अपर कलेक्टर एसएस दुबे-138
तबादला भी नहीं रोक पाया भ्रष्टाचार की राह
हैरानी की बात यह है कि एक वर्ष पूर्व तत्कालीन कलेक्टर अवनीश शरण ने भ्रष्टाचार की शिकायतों पर विजय पांडेय सहित कई लिपिकों का तबादला किया था। लेकिन अपनी पैठ और रसूख के दम पर विजय कुछ ही दिनों में वापस एडीएम कोर्ट की महत्वपूर्ण कुर्सी पर काबिज हो गया। रविवार को हुई इस कार्रवाई के बाद कलेक्टोरेट के अन्य कर्मचारियों में भी खुशी देखी गई, क्योंकि कई लोग उसके व्यवहार और अवैध वसूली से त्रस्त थे।
एक महिला अफसर पर भी लग चुके हैं गंभीर आरोप
भ्रष्टाचार का यह पहला मामला नहीं है। मार्च 2026 में एक महिला अफसर पर भी जमानत के बदले पांच हजार रुपये मांगने के आरोप लगे थे। जिला अधिवक्ता संघ ने इसके खिलाफ कलेक्टोरेट का घेराव भी किया था। हालांकि, कलेक्टर के आश्वासन के बावजूद अब तक उस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
अन्य राजस्व न्यायालयों की तुलना में मेरे कोर्ट में लंबित प्रकरणों की स्थिति काफी कम है। जिस मामले में आरोपित लिपिक को पकड़ा गया है उस मामले में 16 अप्रैल को आदेश जारी किया जा चुका है। आरोपित लिपिक को निलंबित करने का प्रस्ताव कलेक्टर को भेज दिया गया है।
– शिव कुमार बनर्जी, एडीएम, बिलासपुर
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