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राजनांदगांव में नागरिकों के मनोरंजन के लिए चल रही “मस्ती की पाठशाला” का रविवार को 7 सप्ताह के सफल आयोजन के बाद रंगारंग समापन हो गया। यह कार्यक्रम 3 मई को शुरू हुआ था। अंतिम दिन बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों ने खेल-कूद और सांस्कृतिक गतिविधियों का जमकर आनंद लिया। इस मौके पर महापौर मधुसूदन यादव और कलेक्टर जितेंद्र यादव भी मौजूद रहे। महापौर ने सभी नागरिकों, पार्षदों, निगम कर्मचारियों, यातायात टीम और सहयोगी संस्थाओं का आभार जताया। उन्होंने बताया कि लोगों की मांग पर शुरू की गई यह पाठशाला हर रविवार सुबह 6 बजे से आयोजित होती थी और काफी लोकप्रिय रही। उन्होंने कहा कि 16 जून से नया शिक्षा सत्र शुरू होने और मानसून आने के कारण फिलहाल इसे रोक दिया गया है। आगे इसे और बड़े स्तर पर आयोजित करने का आश्वासन भी दिया गया। कलेक्टर ने भी कार्यक्रम की सराहना करते हुए लोगों का उत्साह बढ़ाया। समापन के दिन कार्यक्रम की शुरुआत योग से हुई। इसके बाद रस्साकसी, मटकी फोड़, रस्सी कूद, पिट्टूल, भौरा, बैडमिंटन, सांप-सीढ़ी, कराटे और तीरंदाजी जैसे खेल खेले गए। बच्चों के लिए झूला, फिसल पट्टी और रिंग डालने जैसे खेल खास आकर्षण रहे। चित्रकला प्रतियोगिता में बच्चों ने अपनी प्रतिभा दिखाई और उन्हें पुरस्कार भी दिए गए। गीत-संगीत और जुम्बा डांस ने माहौल को और भी खुशनुमा बना दिया। छत्तीसगढ़ी और हिंदी गानों पर लोग खूब झूमे। महापौर ने भी गाना गाकर माहौल को मनोरंजक बना दिया। वहीं, बाली अखाड़ा के बच्चों ने आग के करतब दिखाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में आए लोगों ने नगर निगम के इस प्रयास की खूब सराहना की। उन्होंने कहा कि मोबाइल के समय में इस “मस्ती की पाठशाला” ने उन्हें बचपन की यादें फिर से दिला दीं। बच्चों में भी इतना उत्साह था कि वे सुबह जल्दी उठकर यहां आने की जिद करते थे। कार्यक्रम की लोकप्रियता को देखते हुए बच्चों, युवाओं और महिलाओं ने महापौर से मांग की है कि दिसंबर में ठंड के समय भी दोबारा “मस्ती की पाठशाला” का आयोजन किया जाए। समापन अवसर पर अच्छे प्रदर्शन करने वालों को पुरस्कार दिए गए। महाकाल सेना और बड़े व्यापारिक संगठनों ने महापौर, आयुक्त और निगम अध्यक्ष का सम्मान किया। साथ ही लोगों को चाय-बिस्कुट भी बांटे गए। छत्तीसगढ़ डेंटल कॉलेज की ओर से स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया गया और लोगों को काढ़ा भी वितरित किया गया।
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