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राजनांदगांव में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की 135वीं जयंती ‘शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो’ के उद्घोष के साथ मनाई गई। नगर के सिविल लाइन स्थित सांस्कृतिक भवन में मुख्य समारोह आयोजित किया गया, जिसमें हजारों लोग उपस्थित रहे। जयंती समारोह का मुख्य आकर्षण नगर के विभिन्न वार्डों से निकाली गईं 19 झांकियां थीं। इन झांकियों में डॉ. आंबेडकर के जीवन संघर्ष, भारतीय संविधान के निर्माण, नारी सशक्तिकरण और सामाजिक समानता के दृश्यों को दर्शाया गया। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन पर युवा और श्रद्धालु थिरकते हुए शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए देर शाम डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर सांस्कृतिक भवन पहुंचे। डॉ. आंबेडकर केवल समाज के नहीं,बल्कि आधुनिक भारत के निर्माता मुख्य कार्यक्रम की शुरुआत पूज्य भंते महेंद्र महाथेरो और पूज्य भंते धर्मपाल ने बुद्ध वंदना, त्रिशरण और पंचशील के साथ की । ‘नेशनल दस्तक’ के संपादक शंभू कुमार सिंह (दिल्ली) ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. आंबेडकर केवल एक समाज के नहीं, बल्कि आधुनिक भारत के निर्माता हैं। उन्होंने युवाओं को वैचारिक रूप से सशक्त होने का आह्वान किया। कार्यक्रम में पीयूष वासनिक और उनकी टीम ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। उन्होंने ‘भीम गीत’ प्रस्तुत किए, जिसके बाद बुद्ध वंदना और क्रांतिकारी गीतों की गूंज से परिसर ‘जय भीम’ के नारों से भर गया देर रात तक चला उत्साह यह आयोजन रात्रि 2 बजे तक निरंतर चलता रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता कविता वासनिक ने की। कार्यक्रम में बौद्ध समाज के वरिष्ठ नागरिकों, प्रबुद्ध बुद्धिजीवियों, महिलाओं और युवाओं ने भारी संख्या में शिरकत की, जो सामाजिक एकजुटता और जागरूकता का एक अनूठा उदाहरण बना।
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