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Home » रसमड़ा मंदिर हत्याकांड में सेवादार को उम्रकैद की सजा:दुर्ग कोर्ट ने 3 साल बाद सुनाया फैसला, अधजली लाश की गुत्थी सुलझी
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रसमड़ा मंदिर हत्याकांड में सेवादार को उम्रकैद की सजा:दुर्ग कोर्ट ने 3 साल बाद सुनाया फैसला, अधजली लाश की गुत्थी सुलझी

By adminMay 7, 2026No Comments4 Mins Read
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दुर्ग जिले के रसमड़ा स्थित सतबहनिया मंदिर में हुए चर्चित हत्याकांड में अदालत ने आखिरकार फैसला सुना दिया है। सत्र न्यायाधीश के. विनोद कुजुर की अदालत ने मंदिर के सेवादार रामचरण चन्द्राकर को हत्या और सबूत मिटाने का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। लगभग तीन साल तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने यह निष्कर्ष निकाला कि आरोपी रामचरण चन्द्राकर ने मुकेश उर्फ राजू की टंगिया और त्रिशूल से बेरहमी से हत्या की थी। हत्या के बाद उसने शव को जलाकर मृतक की पहचान मिटाने का प्रयास भी किया। पूजा करने पहुंचे लोगों ने देखा भयावह मंजर यह घटना 30 जुलाई 2023 की दोपहर करीब 3:30 बजे की है। सूचनाकर्ता रामनारायण मिश्रा अपने साथी कृष्णा साहू के साथ रसमड़ा स्थित मंदिर में पूजा करने पहुंचे थे। जब वे सतबहनिया मंदिर की ओर गए, तो वहां का दृश्य देखकर हैरान रह गए। मंदिर के मंच पर एक व्यक्ति जलती हुई अवस्था में पड़ा था। उसके सिर के पास त्रिशूल रखा था और आसपास खून फैला हुआ था। शव का चेहरा बुरी तरह जल चुका था, जिससे उसकी पहचान करना मुश्किल हो रहा था। दोनों ने तत्काल डायल-112 पर पुलिस को सूचना दी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोला हत्या का राज मौके पर पहुंची पुलिस ने शुरुआती जांच में ही हत्या की आशंका जताई। शव को मेडिकल कॉलेज राजनांदगांव भेजा गया, जहां पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि मृतक की मौत जलने से नहीं, बल्कि धारदार हथियार से किए गए हमले से हुई थी। मंदिर का सेवादार ही निकला कातिल जांच के दौरान पुलिस को मंदिर के सेवादार रामचरण चन्द्राकर पर संदेह हुआ, क्योंकि घटना के बाद से वह फरार था। पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। जांच में सामने आया कि 27 जुलाई 2023 को आरोपी और मृतक राजू की पहचान साल्हेकसा में हुई थी। घटना वाले दिन दोनों नशे की हालत में मंदिर परिसर में मौजूद थे। राजू वहां मछली खा रहा था, जिसे लेकर दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया। इसी विवाद के बाद रामचरण चन्द्राकर ने राजू की हत्या कर दी। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ा कि रामचरण ने टंगिया और त्रिशूल से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हत्या के बाद शव जलाया, फिर कोयला ट्रेन से भाग निकला हत्या के बाद आरोपी ने शव को जलाकर पहचान मिटाने की कोशिश की। पुलिस जांच में सामने आया कि वारदात के बाद रामचरण टंगिया को मंदिर के पास झाड़ियों में छिपाकर रेलवे ट्रैक की ओर भाग गया। वह कोयले से भरी मालगाड़ी में चढ़कर मुढ़ीपार पहुंचा और वहां से लोकल ट्रेन पकड़कर रायपुर रेलवे स्टेशन पहुंच गया। रायपुर में वह दिन में मजदूरी करता था और रात रेलवे स्टेशन में बिताता था। 5 महीने बाद हुआ गिरफ्तार पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी परिवार से मिलने शक्तिनगर आया हुआ है। इसके बाद पुलिस ने ग्रीन चौक के पास उसे करीब 5 महीने बाद 8 जनवरी 2024 को गिरफ्तार कर लिया। घटनास्थल से मिले थे कई अहम सबूत पुलिस ने मौके से खून से सनी मिट्टी, राख, टूटा हुआ त्रिशूल, खून लगे कपड़े, मोटरसाइकिल और आरोपी का फटा आधार कार्ड जब्त किया था। बाद में आरोपी के मेमोरेंडम के आधार पर हत्या में इस्तेमाल टंगिया भी बरामद किया गया। अदालत ने माना कि घटनास्थल से मिले सबूत, मेडिकल रिपोर्ट, आरोपी की फरारी और बरामद हथियार परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की ऐसी श्रृंखला बनाते हैं जो आरोपी के अपराध को साबित करती है। कोर्ट बोला- अपराध गंभीर, लेकिन “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” नहीं सजा के दौरान सरकारी पक्ष ने अदालत से मृत्युदंड की मांग की। लोक अभियोजक एम.के. दिल्लीवार ने तर्क दिया कि आरोपी ने बेहद क्रूर तरीके से हत्या की और साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया। वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ता सुदर्शन महलवार ने कहा कि आरोपी का यह पहला अपराध है और वह आदतन अपराधी नहीं है, इसलिए नरमी बरती जानी चाहिए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने कहा कि: ”आजीवन कारावास सामान्य नियम है और मृत्युदंड अपवाद। वर्तमान मामला गंभीर है, लेकिन इसे विरल से विरलतम श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।” हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए नरमी नहीं बरती जा सकती। आरोपी को उम्रकैद की सजा सत्र न्यायालय ने आरोपी रामचरण चन्द्राकर को धारा 302 IPC के तहत आजीवन कारावास और 1000 रुपए अर्थदंड एवं धारा 201 IPC के तहत 5 वर्ष सश्रम कारावास और 1000 रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। जुर्माना नहीं भरने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। कोर्ट ने आरोपी को सजा भुगतने के लिए केंद्रीय जेल दुर्ग भेजने का आदेश दिया है। ढाई साल बाद मिला इंसाफ रसमड़ा का सतबहनिया मंदिर हत्याकांड उस समय जिले के सबसे चर्चित मामलों में शामिल हो गया था। मंदिर परिसर में अधजली लाश मिलने से सनसनी फैल गई थी। अब करीब ढाई साल बाद अदालत के फैसले ने इस रहस्यमयी हत्या की गुत्थी पर कानूनी मुहर लगा दी है।



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