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युवा कांग्रेस चुनाव में बड़ा उलटफेर:पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के बेटे का नामांकन रद्द, शैलेंद्र बंजारे और सत्येंद्र चेलक के बीच सीधी टक्कर




छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष चुनाव में बड़ा उलटफेर हुआ है। भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) ने स्क्रूटनी के बाद वैध उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के बेटे आदित्य भगत का नामांकन आयु सीमा पूरी नहीं होने के कारण निरस्त कर दिया गया है। इसके बाद अब प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए 17 उम्मीदवार चुनाव मैदान में रह गए हैं। प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए कुल 19 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था। स्क्रूटनी के दौरान आदित्य भगत को अपात्र घोषित कर दिया गया। भारतीय युवा कांग्रेस के नियमों के मुताबिक 28 मई 1990 के बाद जन्मे उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकते हैं। इसी नियम के आधार पर उनका नामांकन रद्द किया गया। मुकाबला दो गुटों के बीच सिमटने की चर्चा नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कांग्रेस के भीतर राजनीतिक सरगर्मी और तेज हो गई है। संगठन के अंदर चर्चा है कि प्रदेश अध्यक्ष पद की लड़ाई अब मुख्य रूप से शैलेंद्र बंजारे और सत्येंद्र चेलक के बीच सिमट गई है। बताया जा रहा है कि वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष आकाश शर्मा, विधायक देवेंद्र यादव और पूर्व मंत्री रुद्र गुरु का समर्थन शैलेंद्र बंजारे को मिल रहा है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव समेत कई वरिष्ठ नेताओं का समर्थन सत्येंद्र चेलक के पक्ष में माना जा रहा है। सिर्फ अध्यक्ष नहीं, कई पदों पर होंगे चुनाव युवा कांग्रेस चुनाव में प्रदेश अध्यक्ष के अलावा 16 प्रदेश उपाध्यक्ष, 53 प्रदेश महासचिव, जिला अध्यक्ष, जिला महासचिव, विधानसभा अध्यक्ष और ब्लॉक अध्यक्ष समेत कई पदों के लिए भी चुनाव होना है। मतदान प्रक्रिया जल्द शुरू होने की संभावना है। अध्यक्ष पद के 17 उम्मीदवार स्क्रूटनी के बाद प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए सत्येंद्र चेलक, शैलेंद्र बंजारे, विनोद कश्यप (भक्कू), भावेंद्र गंगोत्री, दीक्षा पांडे, जसमीत शर्मा (सोनू शर्मा), कपिल कांत नाग, मानव देशमुख, मृदुला भास्कर, परमीत बग्गा (हनी बग्गा), प्रशांत बोकड़े, प्रीतिका विश्वकर्मा, प्रीति वैष्णव, सागर बाघमारे, सजल चंद्राकर, शालिनी रामटेके और सोनिका पोर्ते चुनाव मैदान में हैं। संगठन से ज्यादा सियासी ताकत की परीक्षा युवा कांग्रेस का यह चुनाव केवल संगठन का नया अध्यक्ष चुनने तक सीमित नहीं माना जा रहा। कांग्रेस के भीतर इसे अलग-अलग नेताओं के प्रभाव और शक्ति संतुलन की परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष का नतीजा आने वाले समय में युवा कांग्रेस के साथ-साथ प्रदेश कांग्रेस की आंतरिक राजनीति पर भी असर डाल सकता है।



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