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Home » यात्रियों के लिए खुशखबरी, बिलासपुर में अब काम्पोजिट स्लीपर से बदलेगी रेलयात्रा
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यात्रियों के लिए खुशखबरी, बिलासपुर में अब काम्पोजिट स्लीपर से बदलेगी रेलयात्रा

By adminApril 12, 2026No Comments3 Mins Read
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11 04 2026 indian railways bilaspur zone
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धीरेंद्र सिन्हा, नईदुनिया बिलासपुर: भारतीय रेलवे (Indian Railways) के तेजी से हो रहे आधुनिकीकरण के बीच बिलासपुर जोन की पटरियों पर भी जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। देशभर में काम्पोजिट स्लीपर लगाने की योजना के तहत यहां भी चरणबद्ध तरीके से पारंपरिक स्लीपर को बदला जाएगा।

उच्चस्तरीय बैठक में लिए गए अहम निर्णय

रेल भवन, नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक में रेलवे ट्रैक सिस्टम को और उन्नत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। इनमें ब्रिज एप्रोच, पाइंट्स और क्रासिंग जैसे जटिल हिस्सों में काम्पोजिट स्लीपर लगाने का निर्णय प्रमुख है। ये स्लीपर कांक्रीट और लोहे की तुलना में हल्के होने के साथ अधिक भार सहन करने में सक्षम हैं। इनकी भार वहन क्षमता प्रति वर्ग सेंटीमीटर लगभग 700 किलोग्राम तक बताई गई है।

बेहतर तकनीक से बढ़ेगा यात्रियों का आराम

काम्पोजिट स्लीपर की खासियत इसकी बेहतर कुशनिंग है, जो ट्रेनों के गुजरने के दौरान झटकों को कम करती है। इससे यात्रियों को अधिक आरामदायक यात्रा अनुभव मिलेगा। साथ ही इन्हें विशेष परिस्थितियों के अनुसार डिजाइन किया जा सकता है, जिससे ब्रिज और जटिल ट्रैक क्षेत्रों में इनकी उपयोगिता और बढ़ जाती है।

AI आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम भी लागू होगा

रेलवे ने ट्रैक की निगरानी के लिए एआई आधारित तकनीक अपनाने का भी निर्णय लिया है। इसके तहत ग्राउंड पेनिट्रेशन रडार से ट्रैक के नीचे की स्थिति का आकलन किया जाएगा। वहीं मैग्नेटिक पार्टिकल टेस्टिंग के जरिए वेल्डिंग में मौजूद सूक्ष्म खामियों का पता लगाया जाएगा। यह तकनीक रेलवे को अधिक सुरक्षित, स्मार्ट और टिकाऊ बनाएगी।

पहले लकड़ी के स्लीपर का होता था उपयोग

आजादी से पहले रेलवे ट्रैक पर सागौन, साल और देवदार की लकड़ी से बने स्लीपर उपयोग में लाए जाते थे। इनका वजन लगभग 70 से 100 किलोग्राम होता था। हालांकि ये हल्के और लगाने में आसान थे, लेकिन दीमक और नमी से प्रभावित होते थे। इनकी औसत आयु 15 से 25 वर्ष थी, जिससे रखरखाव अधिक करना पड़ता था।

वर्तमान में कांक्रीट स्लीपर का उपयोग

वर्तमान समय में रेलवे में प्री-स्ट्रेस्ड कांक्रीट (पीएससी) स्लीपर का व्यापक उपयोग हो रहा है। इनका वजन 250 से 300 किलोग्राम तक होता है। ये मजबूत और टिकाऊ होते हैं, जिससे ट्रेनों की गति और सुरक्षा में सुधार होता है। इनकी आयु 40 से 60 वर्ष तक होती है, लेकिन भारी होने के कारण इन्हें बिछाना और बदलना चुनौतीपूर्ण होता है।

अब आएंगे आधुनिक काम्पोजिट स्लीपर

काम्पोजिट स्लीपर रीसाइकल्ड प्लास्टिक, ग्लास-कार्बन फाइबर, रबर और रेजिन से तैयार किए जाते हैं। इनका वजन लगभग 90 से 150 किलोग्राम होता है। ये हल्के, मजबूत और मौसमरोधी होते हैं। इनकी आयु 40 से 50 वर्ष तक हो सकती है। ये दीमक और पानी से सुरक्षित रहते हैं और कम रखरखाव की जरूरत होती है, जिससे यह रेलवे के लिए किफायती विकल्प बनते हैं।

यात्री सुविधा और सुरक्षा को लेकर रेलवे सदैव सजग है। आधुनिकीकरण के बीच AI सहित ब्रिज एप्रोच, पाइंट्स और क्रासिंग पर काम्पोजिट स्लीपर लगाने रेलवे की प्राथमिकता है। लेकिन बिलासपुर जोन को लेकर अभी कोई आधिकारिक पत्र या आदेश नहीं आया है।

-संतोष कुमारसीनियर पीआरओ, दपूमरे बिलासपुर

काम्पोजिट स्लीपर की विशेषताएं



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