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महानदी के रायपुर-बलौदाबाजार सीमा पर स्थित चिखली और कुरूद रेत घाटों पर शुक्रवार रात करीब 3 बजे खनन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने छापा मारा। इस दौरान 4 चेन माउंटेन मशीनें जब्त की गईं। हालांकि हाइवा गाड़ियां मौके से फरार हो गईं। प्रशासन की इस कार्रवाई को लेकर अब स्थानीय ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल दिखावा है। उनके अनुसार, जब्त की गई चार मशीनें सिर्फ नाममात्र की हैं, जबकि बाकी मशीनें जंगल में छिपा दी गई हैं। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि फरार हुए हाइवा वाहनों में से कई बड़े नेताओं के हैं, इसलिए उन्हें नहीं पकड़ा गया। मशीनें जंगल में छिपा दी गईं- उप सरपंच उपसरपंच फागू सेन ने बताया कि रात भर हाइवा की लंबी कतारें लगी रहती हैं। ग्रामीण राम प्रसाद ने कहा, “जो चार मशीन जब्त हुई हैं, वो तो दिखावा है। बाकी मशीनें जंगल में छिपा दी गईं।” रवि बंजारे ने नदी की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लगातार रेत खनन से महानदी की कमर टूट चुकी है। पहले नदी में पानी होता था, अब सिर्फ गहरे गड्ढे रह गए हैं और नदी सूख रही है। 24 घंटे गीली रेत खोदकर लोडिंग जानकारी के अनुसार, चिखली, कुरूद और हरदी जैसे रेत घाटों पर रेत माफिया सक्रिय है। यहां से रोजाना 500 से अधिक ओवरलोड हाइवा रेत निकाली जाती है, जबकि मुश्किल से 10 प्रतिशत हाइवा पर ही रॉयल्टी काटी जाती है। नियमानुसार, रेत खनन सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक मैन्युअल तरीके से होना चाहिए, लेकिन माफिया 24 घंटे गीली रेत खोदकर लोडिंग कर रहे हैं। ग्रामीणों ने रखी यह मांग ग्रामीणों ने अब मांग की है कि, सभी घाटों पर 24 घंटे सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, जंगल में छिपी हुई सभी मशीनें जब्त की जाएं। रेत माफियाओं और उन्हें संरक्षण देने वाले नेताओं के खिलाफ चोरी का मामला दर्ज किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक यह कार्रवाई नहीं होती, महानदी सूखती रहेगी।
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