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बीजापुर महादेव तालाब के सौंदर्यीकरण और निर्माण कार्य में लगातार हो रही देरी पर बीजापुर नगर पालिका परिषद ने सख्त रुख अपनाया है। करीब तीन वर्ष पहले शुरू हुई 5 करोड़ 18 लाख रुपये की इस परियोजना की बेहद धीमी प्रगति को देखते हुए परिषद ने ठेका निरस्त करने का प्रस्ताव पारित कर शासन को भेज दिया है। परियोजना में अब तक केवल 15 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो सका है। शहर के सौंदर्यीकरण और जल संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही इस परियोजना का कार्यादेश मई 2023 में जारी किया गया था। इसके बावजूद निर्माण कार्य अपेक्षित गति नहीं पकड़ सका। नगर पालिका के अनुसार अब तक ठेकेदार को लगभग 69 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है, लेकिन मौके पर कार्य प्रगति बेहद सीमित है। एसओआर के बिना भुगतान की मांग नगरपालिका अधिकारी बी.एल. नुरेटी ने बताया कि ठेकेदार कुछ ऐसे कार्यों का भुगतान मांग रहा था, जिनका एसओआर (शेड्यूल ऑफ रेट्स) उपलब्ध नहीं था। वहीं, परियोजना के महत्वपूर्ण हिस्से जैसे टो-वॉल और पिचिंग का निर्माण अब तक शुरू भी नहीं हो पाया है। शासन की मंजूरी के बाद होगी री-टेंडरिंग लगातार देरी और असंतोषजनक प्रगति को देखते हुए नगर पालिका परिषद ने ठेका निरस्त करने का प्रस्ताव पारित किया है। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद शेष निर्माण कार्य नए ठेकेदार के माध्यम से री-टेंडरिंग कर पूरा कराया जाएगा। नागरिकों में बढ़ा असंतोष निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार को लेकर शहर के वरिष्ठ नागरिक राजू गांधी ने भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि लोगों को यह समझ नहीं आ रहा कि आखिर काम किस वजह से रुका हुआ है। उनका कहना है कि यदि ठेकेदार समय पर काम पूरा नहीं कर पा रहा है तो उसे ब्लैकलिस्ट कर किसी सक्षम एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए। शासन के फैसले का इंतजार करीब तीन साल बीत जाने के बाद भी करोड़ों रुपये की इस परियोजना का अधिकांश हिस्सा अधूरा होने से स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। अब सभी की निगाहें शासन के निर्णय पर टिकी हैं कि ठेका निरस्त होने के बाद महादेव तालाब का निर्माण कार्य कब दोबारा शुरू होगा और परियोजना को समय पर पूरा किया जा सकेगा।
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