डिजिटल डेस्क, नईदुनिया। देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में शामिल पद्म पुरस्कार 2026 समारोह इस बार मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लिए खास उपलब्धि लेकर आया। सोमवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मध्य प्रदेश की चार और छत्तीसगढ़ की तीन हस्तियों को पद्मश्री सम्मान से नवाजा। इन लोगों को समाज, साहित्य, कला और जनसेवा के क्षेत्र में लंबे समय से किए गए योगदान के लिए यह सम्मान दिया गया।
इस वर्ष कुल 131 लोगों को पद्म पुरस्कार प्रदान किए गए। इनमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्मश्री पुरस्कार शामिल रहे। देशभर से चुनी गई हस्तियों को उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए सम्मानित किया गया।
मध्य प्रदेश की चार हस्तियों को मिला सम्मान
मध्य प्रदेश से इस बार चार लोगों को पद्मश्री पुरस्कार मिला। इनमें भोपाल के वरिष्ठ साहित्यकार कैलाश चंद्र पंत, सागर के पारंपरिक मार्शल आर्ट कलाकार भगवानदास रैकवार, मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर और श्री नारायण व्यास शामिल हैं। सम्मान की घोषणा के बाद उनके परिवारों और क्षेत्रों में उत्साह का माहौल देखा गया।
कैलाश चंद्र पंत को साहित्य में योगदान के लिए सम्मान
कैलाश चंद्र पंत का जन्म 26 अप्रैल 1936 को इंदौर जिले में हुआ था। उन्होंने साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। अपने लंबे करियर में वे व्याख्याता, प्राचार्य और पत्रकार जैसी कई जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। उनके लेखन ने सामाजिक सोच और वैचारिक दिशा को मजबूत करने का काम किया है।
भगवानदास रैकवार ने बचाई पारंपरिक युद्ध कला
सागर निवासी भगवानदास रैकवार बुंदेली पारंपरिक युद्ध कला के विशेषज्ञ माने जाते हैं। उन्होंने तलवारबाजी, लाठी-डंडा और अन्य पारंपरिक युद्ध कलाओं को वर्षों तक संरक्षित रखा। साथ ही नई पीढ़ी को प्रशिक्षण देकर इस विरासत को जीवित बनाए रखा। इसी योगदान के लिए उन्हें “अनसंग हीरो” श्रेणी में पद्मश्री सम्मान दिया गया।
मोहन नागर की समाजसेवा को मिली पहचान
मोहन नागर लंबे समय से शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। बैतूल से शुरू हुई उनकी सामाजिक यात्रा ने राज्य स्तर पर कई विकास कार्यों को नई दिशा दी। उन्होंने विभिन्न संस्थाओं के साथ मिलकर सामाजिक जागरूकता और विकास के लिए उल्लेखनीय काम किया।
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छत्तीसगढ़ की तीन हस्तियों को भी मिला पद्मश्री
छत्तीसगढ़ से समाजसेविका बुधरी ताटी, जनजातीय क्षेत्रों में सेवा देने वाले डॉ. रामचंद्र गोडबोले और उनकी पत्नी सुनीता गोडबोले को पद्मश्री सम्मान मिला। इन तीनों ने आदिवासी इलाकों में लंबे समय तक निःस्वार्थ सेवा करते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
वर्षों की मेहनत को मिला राष्ट्रीय सम्मान
सम्मानित हुई सभी हस्तियों की खासियत यह रही कि उन्होंने बिना प्रचार-प्रसार के लगातार अपने क्षेत्र में काम किया। अब देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल पद्मश्री मिलने से न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में गर्व का माहौल है।
डॉ. भाई और दीदी के नाम से जानते हैं लोग
धीरे-धीरे गोडबोले दंपती का जीवन अबूझमाड़ और बस्तर की पगडंडियों में ही रच-बस गया। सुबह क्लीनिक में मरीजों का उपचार और दोपहर बाद दूरस्थ गांवों तक पैदल पहुंचकर स्वास्थ्य सेवा देना उनकी दिनचर्या बन गई। आदिवासी समाज उन्हें डा. भाई और दीदी के नाम से पुकारने लगा।
गोडबोले दंपती ने केवल इलाज तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने कुपोषण, एनीमिया, नशामुक्ति, स्वास्थ्य जागरूकता और शिक्षा के क्षेत्र में लगातार काम किया। ग्रामीण युवाओं को प्राथमिक स्वास्थ्य प्रशिक्षण देकर गांव स्तर पर स्वास्थ्य सहायता तैयार करने का प्रयास भी किया।
एक लाख से अधिक लोगों का किया इलाज डॉ. रामचंद्र गोडबोले अब तक एक लाख से अधिक लोगों का इलाज कर चुके हैं। दंतेवाड़ा, नारायणपुर, बीजापुर, सुकमा और अबूझमाड़ के अनेक गांव आज भी उनके सेवा कार्यों के साक्षी हैं।
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