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दुर्ग जिले के पाटन विधानसभा क्षेत्र में खरीफ सीजन शुरू होते ही किसानों को खाद, बीज और डीएपी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों की शिकायतों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और पाटन विधायक भूपेश बघेल ने सोमवार को कई सहकारी समितियों का दौरा किया और सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया। भूपेश बघेल के साथ जिला कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष राकेश ठाकुर भी मौजूद थे। उन्होंने पंडहोर, सोमनी, फेकारी, गाड़ाडीह, कुम्हली, जामगांव आर, बेलहारी निपानी, रानीतराई और सेलूद सहित कई समितियों का निरीक्षण किया। इस दौरान किसानों से सीधे बात कर खाद, बीज और ऋण वितरण की स्थिति की जानकारी ली। किसानों ने बताया कि समय पर खाद और बीज नहीं मिलने से बुवाई प्रभावित होने का खतरा है। कई किसान ऋण पुस्तिका लेकर समितियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें जरूरत के अनुसार खाद नहीं मिल रही है। यह खेती का सबसे महत्वपूर्ण समय है और खाद की कमी से उत्पादन पर असर पड़ सकता है। डीएपी की कमी पर सरकार को घेरा निरीक्षण के बाद भूपेश बघेल ने कहा कि कई समितियों में किसान लंबे समय से खाद का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन पर्याप्त मात्रा में डीएपी उपलब्ध नहीं है। कुछ जगह डीएपी पहुंच रही है, जबकि कई समितियों में इसकी भारी कमी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि पहले किसानों को 60 प्रतिशत नकद और 40 प्रतिशत खाद-बीज की सुविधा मिलती थी। अब इसे बदलकर 70:30 कर दिया गया है। पहले वित्तीय वर्ष शुरू होते ही किसान नकद राशि के साथ खाद भी प्राप्त कर लेते थे, लेकिन इस बार स्थिति अलग है। जरूरत के अनुसार नहीं मिल रही खाद भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि खाद वितरण का तरीका किसानों के हित में नहीं है। उनके मुताबिक आधा एकड़ और एक एकड़ वाले किसान को समान मात्रा में एक बोरी खाद दी जा रही है। वहीं बड़े रकबे वाले किसानों को भी जरूरत के अनुसार खाद नहीं मिल पा रही है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है। एनपीके वितरण को बताया किसानों के साथ अन्याय पूर्व मुख्यमंत्री ने डीएपी के विकल्प के रूप में एनपीके खाद दिए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एनपीके खाद किसानों को ज्यादा महंगी पड़ रही है। इससे किसानों की खेती की लागत बढ़ रही है और उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। दलाली की शिकायत से बढ़ा विवाद पंडहोर समिति के निरीक्षण के दौरान कुछ किसानों ने कथित दलाली की शिकायत भी की। बघेल ने कहा कि किसानों ने बताया कि कुछ लोगों के जरिए ऋण पुस्तिका जमा कराने वालों का काम पहले हो रहा है, जबकि सामान्य किसानों को इंतजार करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि शिकायत सही है तो यह सहकारी व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल है। केंद्र सरकार पर भी साधा निशाना भूपेश बघेल ने खाद संकट को अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों से जोड़ते हुए केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि वैश्विक हालात और केंद्र की नीतियों के कारण किसानों को पर्याप्त खाद नहीं मिल पा रही है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि इससे देश की कृषि व्यवस्था प्रभावित हो रही है। रमन सिंह बोले- प्राकृतिक खेती अपनाएं किसान वहीं विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंहने इस मुद्दे पर अलग राय रखी। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए केवल खाद की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि खेती की दिशा भी महत्वपूर्ण है। रासायनिक खाद के बजाय जैविक खेती पर जोर रमन सिंह ने कहा कि डीएपी, यूरिया और अन्य रासायनिक खादों के अधिक उपयोग का असर मिट्टी और मानव स्वास्थ्य पर पड़ता है। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाने की अपील की। उनका कहना है कि गोबर खाद और प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होगी, उत्पादन टिकाऊ बनेगा और लोगों का स्वास्थ्य भी सुधरेगा।
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