बिलासपुर में 91 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आए तूफान के तीन दिन बाद भी बिजली व्यवस्था पूरी तरह बहाल नहीं हो सकी है। …और पढ़ें

HighLights
- कोनी और उसलापुर में लगातार बिजली कटौती से परेशानी
- जलापूर्ति ठप होने से लोगों को पानी संकट झेलना पड़ा
- चिंगराजपारा में रहवासियों ने खाली बाल्टी लेकर किया प्रदर्शन
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। न्यायधानी बिलासपुर में 91 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आए भीषण तूफान के 72 घंटे बीत जाने के बाद भी विद्युत व्यवस्था पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी है। आंधी-तूफान के कारण उखड़े पेड़ों और टूटे बिजली खंभों ने बिजली विभाग के मेंटेनेंस दावों की पोल खोल दी है। गुरुवार रात भी शहर के कई प्रमुख इलाके अंधेरे में डूबे रहे, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

पेड़ और होर्डिंग गिरने से बढ़ी समस्या
तूफान के दौरान शहर के कई चौक-चौराहों पर लगे बड़े होर्डिंग्स और फ्लैक्स उड़कर हाई-वोल्टेज तारों पर जा गिरे। मिशन अस्पताल के सामने विशाल पेड़ गिरने से कई बिजली पोल क्षतिग्रस्त हो गए। हालात ऐसे रहे कि गुरुवार को भी इस मार्ग को वनवे करना पड़ा। इसी तरह 27 खोली स्थित कोल लेबोरेटरी के पास भी पेड़ गिरने के कारण घंटों तक मरम्मत कार्य चलता रहा।
कोनी और उसलापुर में सबसे खराब हालात
नगर निगम के नए वार्डों जैसे कोनी, उसलापुर और घुरू-अमेरी में बिजली व्यवस्था सबसे ज्यादा प्रभावित रही। वार्ड नंबर चार और पांच में पिछले दो दिनों से बिजली आपूर्ति बाधित है। कोनी स्थित यूनिवर्सिटी के छात्र लो-वोल्टेज और बार-बार हो रही कटौती से परेशान रहे। दोपहर 12 बजे गई बिजली शाम चार बजे कुछ समय के लिए लौटी, लेकिन रातभर फिर बिजली गुल रही।
मेंटेनेंस के दावे फेल
भीषण गर्मी के बीच बिजली विभाग ने मेंटेनेंस के नाम पर कई बार बिजली कटौती की थी। बावजूद इसके, एक ही आंधी ने पूरे सिस्टम की तैयारियों की पोल खोल दी। उपभोक्ताओं को मोबाइल पर मेंटेनेंस के लगातार मैसेज तो मिलते रहे, लेकिन तय समय के बाद भी घंटों बिजली बहाल नहीं हो सकी। अधिकारियों की मशक्कत के बावजूद लोगों को राहत नहीं मिल पाई।
चिंगराजपारा में लोगों ने किया चक्काजाम
बुधवार रात कई इलाकों में बिजली और पानी की आपूर्ति शुरू नहीं होने पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। सरकंडा के चिंगराजपारा में रहवासियों ने खाली बाल्टी और बर्तन लेकर शनिचरी मार्ग पर चक्काजाम कर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और अधिकारियों से बातचीत कराने का आश्वासन दिया, जिसके बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ।
बिजली संकट से जलापूर्ति भी प्रभावित
लगातार बिजली गुल रहने का सीधा असर शहर की जलापूर्ति व्यवस्था पर पड़ा। अधिकांश पानी टंकियां नहीं भर सकीं, जिसके कारण कई कालोनियों में पानी की सप्लाई बाधित रही। लोग पूरे दिन नगर निगम और बिजली विभाग को कोसते नजर आए। निगम की टीमें बैकहो लोडर की मदद से मलबा हटाने में जुटी रहीं, लेकिन बिजली बहाली में देरी से जनता की परेशानियां लगातार बढ़ती रहीं।
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