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बीजापुर जिला मुख्यालय में शुक्रवार को तेंदूपत्ता संग्राहकों को कैश भुगतान सुनिश्चित करने की मांग को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी ने धरना-प्रदर्शन और रैली निकाली। प्रदर्शन के बाद कांग्रेस नेताओं ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि, भाजपा सरकार ने विधानसभा चुनाव के दौरान ‘मोदी की गारंटी’ के तहत तेंदूपत्ता संग्राहकों से कई वादे किए थे। सरकार बनने के 27 महीने बाद भी इनमें से एक भी वादा पूरा नहीं किया गया है। मंडावी के अनुसार, संग्रहण केंद्रों पर कैश भुगतान, तेंदूपत्ता दर में वृद्धि, फड़मुंशियों के मानदेय में बढ़ोतरी और मजदूरों की मजदूरी बढ़ाने जैसे वादे अब तक अधूरे हैं। अंदरूनी इलाकों में बैंकिंग सुविधाओं की कमी विधायक ने यह भी बताया कि, जिले के अंदरूनी इलाकों में बैंकिंग सुविधाओं की कमी है। कई आदिवासी परिवारों के पास बैंक खाते या आधार कार्ड तक नहीं हैं। जिससे ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था से उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने रोजगार के अभाव में ग्रामीणों के तेलंगाना और महाराष्ट्र की ओर पलायन बढ़ने पर भी चिंता व्यक्त की। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि, तेंदूपत्ता से होने वाली आय आदिवासी परिवारों के लिए आजीविका का एक महत्वपूर्ण स्रोत रही है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था से यह प्रभावित हो रही है। पार्टी ने बस्तर के जल, जंगल और जमीन पर उद्योगपतियों की नजर होने का भी आरोप लगाया। ये हैं प्रमुख मांगें कांग्रेस की तरफ से सौंपे गए ज्ञापन में कई प्रमुख मांगें शामिल हैं। इनमें तेंदूपत्ता संग्रहण केंद्रों पर नगद भुगतान, वर्तमान दर 5500 रुपए प्रति मानक बोरा को बढ़ाकर 7000 रुपए करना, नए फड़ खोलना, नेशनल पार्क एवं अभ्यारण्य क्षेत्रों में संग्रहण की अनुमति देना, फड़मुंशियों को 25 हजार वार्षिक मानदेय, 15 दिनों तक निर्बाध संग्रहण, परिवहन किराए और मजदूरी दर में वृद्धि शामिल है।
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