बिलासपुर के हिर्री थाना क्षेत्र में कोल डिपो की आड़ में कोयले की बड़ी हेराफेरी का भंडाफोड़ हुआ है। एसईसीएल अमेरा विश्रामपुर क्षेत्र से उद्योगों के लिए …और पढ़ें

HighLights
- खदान से निकला जी-6 श्रेणी का कीमती कोयला रास्ते में बदला
- पेण्ड्रीडीह चौक के पास ट्रेलरों से उतारा 5-5 टन महंगा कोयला
- हिर्री पुलिस ने वाहन मालिक और तीन चालकों को गिरफ्तार कर जेल भेजा
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। हिर्री पुलिस ने कोयले की हेराफेरी करने वाले गिरोह पर बड़ी कार्रवाई करते हुए कोल डिपो मालिक, वाहन मालिक और तीन चालकों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि डिपो संचालक और उसके गुर्गे उच्च गुणवत्ता वाले कोयले को रास्ते में उतारकर उसकी जगह कम गुणवत्ता का कोयला उद्योगों में सप्लाई कर रहे थे। पुलिस ने डिपो संचालक समेत सभी आरोपित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
पेंड्रा में रहने वाले आशीष केशरी ने हिर्री थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि वह कोल परिवहन एवं लिफ्टिंग का काम करता है। उसने एसईसीएल अमेरा विश्रामपुर क्षेत्र से जी-6 श्रेणी का उच्च गुणवत्ता वाला कोयला ट्रेलरों में लोड कर गोपाल स्पंज एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड सिलतरा भेजा था। रास्ते में पेण्ड्रीडीह चौक के पास वाहन मालिक गंगा प्रसाद साहू और अन्य आरोपित ने ट्रेलरों को नरेश अग्रवाल के कोल डिपो में ले जाकर प्रत्येक वाहन से करीब पांच-पांच टन उच्च गुणवत्ता का कोयला उतार लिया। इसके बाद ट्रेलरों में कम गुणवत्ता वाला 4700 जीसीव्ही का कोयला भरकर उद्योग में सप्लाई कर दिया गया।
एसएसपी रजनेश सिंह, एएसपी मधुलिका सिंह और डीएसपी डीआर टंडन के निर्देशन में थाना प्रभारी दामोदर मिश्रा ने टीम गठित कर कार्रवाई की। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर पंचनामा तैयार किया तथा कोयले के नमूने जांच के लिए भेजे। जांच के दौरान आरोप सही पाए जाने पर डिपो मालिक नरेश अग्रवाल, ट्रेलर मालिक गंगा प्रसाद साहू और ड्राइवर फिरोज अंसारी, निसार अंसारी एवं इमरान अंसारी को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपित के खिलाफ बीएनएस की धारा 316(3), 317(4) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि कोयला परिवहन और डिपो संचालन से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
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पहले भी सामने आ चुका है कोयला हेराफेरी का मामला
जिले में कोयले की हेराफेरी का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी पुलिस ने कोल डिपो की आड़ में कोयले की अफरा-तफरी करने वाले गिरोह के खिलाफ कार्रवाई की थी। उस मामले में भी आरोपियों द्वारा उच्च गुणवत्ता वाले कोयले में कम गुणवत्ता का कोयला मिलाकर उद्योगों को सप्लाई करने की बात सामने आई थी। लगातार सामने आ रहे मामलों से यह संकेत मिल रहा है कि कोयला परिवहन और डिपो संचालन में संगठित तरीके से गड़बड़ी की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि कुछ डिपो संचालक और वाहन मालिक मिलकर कोयले की गुणवत्ता में हेरफेर कर आर्थिक लाभ कमा रहे हैं। इस तरह की गतिविधियों से उद्योगों को नुकसान होने के साथ-साथ शासन को भी राजस्व हानि पहुंचती है। पुलिस अब ऐसे मामलों में सख्ती बरतने और लगातार निगरानी रखने की बात कह रही है।
ऐसे किया जाता था कोयले का खेल
जांच में सामने आया कि आरोपित बेहद सुनियोजित तरीके से कोयले की हेराफेरी करते थे। एसईसीएल खदानों से निकलने वाले उच्च गुणवत्ता के जी-6 श्रेणी के कोयले को उद्योगों तक पहुंचाने के दौरान ट्रेलरों को बीच रास्ते कोल डिपो ले जाया जाता था। वहां से महंगे और उच्च गुणवत्ता वाले कोयले को उतार लिया जाता था। इसके बाद ट्रेलरों में कम गुणवत्ता का सस्ता कोयला भर दिया जाता था और उसी को उद्योगों में सप्लाई कर दिया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया में वाहन मालिक, चालक और डिपो संचालक की भूमिका सामने आई है। पुलिस को आशंका है कि इस तरह की हेराफेरी लंबे समय से चल रही थी। कोयले के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं और रिपोर्ट आने के बाद मामले में और खुलासे हो सकते हैं। पुलिस अब परिवहन से जुड़े दस्तावेज और सीसीटीवी फुटेज भी खंगाल रही है।
पुलिस टीम ने ऐसे खोला पूरा मामला
मामले की शिकायत मिलते ही हिर्री पुलिस ने जांच तेज कर दी। थाना प्रभारी दामोदर मिश्रा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने सबसे पहले घटनास्थल का निरीक्षण किया और ट्रेलरों की गतिविधियों की जानकारी जुटाई। इसके बाद संबंधित डिपो में पहुंचकर जांच की गई, जहां पुलिस को कोयले की गुणवत्ता में अंतर मिला। पुलिस ने गवाहों के बयान दर्ज किए और कोयले के नमूने जब्त कर परीक्षण के लिए भेजे। विवेचना में आरोपित की भूमिका स्पष्ट होने के बाद पांचों आरोपित को गिरफ्तार किया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है। यदि और नाम सामने आते हैं तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। जिले में कोयला परिवहन और डिपो संचालन पर पुलिस और प्रशासन की नजर बनी हुई है।
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