नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। मंगला चौक स्थित आईसीआईसीआई बैंक में उपशाखा प्रबंधक रही तनीशा अग्रवाल और उसके बैंककर्मी पति विकास द्विवेदी ने मिलकर 1.38 करोड़ रुपये का गबन किया है। आरोपितों ने ज्वेल लोन (गोल्ड) के असली सोने के पैकेट बदलकर उनमें नकली गहने भर दिए और ग्राहकों के खातों से फर्जीवाड़ा कर बड़ी राशि पार कर दी। बैंक की शिकायत पर सिविल लाइन पुलिस ने आरोपित दंपती के खिलाफ अपराध दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी है।
आंतरिक जांच में गबन का यह चौंकाने वाला मामला सामने आया
पुलिस के अनुसार आईसीआईसीआई बैंक की आंतरिक जांच में गबन का यह चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बैंक प्रबंधक अरूप पाल ने शिकायत दर्ज कराई है कि तनीशा अग्रवाल ने पद का दुरुपयोग करते हुए अगस्त 2024 से सितंबर 2025 के बीच सुनियोजित तरीके से धोखाधड़ी की। जांच में पाया गया कि आरोपित महिला अधिकारी ने आठ बचत खातों से करीब 87.95 लाख रुपये फर्जी तरीके से निकाले। इसके लिए उन्होंने ग्राहकों के जाली हस्ताक्षर किए और बैंक रिकॉर्ड के वाउचर तक गायब कर दिए।
सुरक्षित गोल्ड लोन सिस्टम में भी सेंध
इतना ही नहीं, आरोपितों ने बैंक के सुरक्षित गोल्ड लोन सिस्टम में भी सेंध लगाई। ऑडिट के दौरान चार ज्वेल (गोल्ड) लोन पाउचों में सोने के स्थान पर नकली आभूषण मिले, जिनकी कीमत 21 लाख रुपये से अधिक है। सीसीटीवी फुटेज में तनीशा को बैंक के बाहर संदिग्ध गतिविधियां करते हुए ज्वेल (गोल्ड) पाउच ले जाते हुए देखा गया है। पूरे घोटाले में उनके पति विकास द्विवेदी की भी सक्रिय भूमिका रही है, जिनके खाते से संदिग्ध लेनदेन के सबूत मिले हैं। वारदात का पर्दाफाश होने के बाद से ही दोनों फरार हैं।
ऑडिट के दौरान हुई जानकारी
17 सितंबर 2025 को दैनिक बैंकिंग मिलान के दौरान पाया गया कि वित्तीय लेनदेन रिपोर्ट (एफटीआर) के अंतिम पन्ने फटे हुए थे। इसके बाद जब गहराई से जांच हुई, तो पता चला कि ग्राहकों की फिक्स्ड डिपॉजिट और ज्वेल लोन खातों में भारी हेराफेरी की गई है।
नकली सोने का खेल
उपशाखा प्रबंधक तनीशा ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए असली सोने के गहने निकालकर उनकी जगह उसी वजन के नकली आभूषण पैकेटों में भर दिए थे। कुछ मामलों में तो ग्राहकों के नाम पर फर्जी तरीके से ज्वेल लोन स्वीकृत कर राशि हड़प ली गई, जबकि ग्राहकों को इसकी भनक तक नहीं थी।
एफडी पर लिया फर्जी लोन
एक महिला ग्राहक की 30 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट पर आरोपितों ने उनकी जानकारी के बिना आई-मोबाइल ऐप के जरिए दो बार ओवरड्राफ्ट लोन ले लिया। यह धोखाधड़ी ग्राहक के घर जाकर बैंकिंग सेवा देने के बहाने पासवर्ड हासिल कर की गई थी।
शातिर ठग दंपती फरार
शातिर पति-पत्नी ने बैंक के खातों व लोन के गहनों की ठगी की राशि को 20 अलग-अलग खातों के माध्यम से ठिकाने लगाया गया है। वारदात के बाद से तनीशा और विकास दोनों बैंक से नदारद हैं और उनके मोबाइल बंद हैं। पुलिस ने धारा 318(4) और 3(5) बीएनएस के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है।
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