Facebook Twitter Youtube
  • Home
  • देश
  • विदेश
  • राज्य
  • अपराध
  • खेल
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • न्याय
  • राजनीति
  • साहित्य
  • धर्म-समाज
  • वीडियो
  • Home
  • देश
  • विदेश
  • राज्य
  • अपराध
  • खेल
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • न्याय
  • राजनीति
  • साहित्य
  • धर्म-समाज
  • वीडियो
Home » बिलासपुर में आयुष्मान से इलाज कराना जंग जीतने से कम नहीं, ज्यादातर अस्पताल में करते है परेशान
Breaking News

बिलासपुर में आयुष्मान से इलाज कराना जंग जीतने से कम नहीं, ज्यादातर अस्पताल में करते है परेशान

By adminMay 27, 2026No Comments5 Mins Read
Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
26 05 2026 aaushmancard1
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email


बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि। गरीबों को गंभीर बीमारियों के महंगे इलाज से मुक्ति दिलाने के लिए चल रही ‘आयुष्मान भारत योजना बिलासपुर के निजी अस्पतालों के खेल और प्रशासनिक ढर्रे के कारण दम तोड़ रही है। योजना के तहत अनुबंधित शहर के नामी अस्पतालों ने बाहर बड़े-बड़े होर्डिंग्स तो टांग दिए हैं कि यहां आयुष्मान कार्ड से इलाज होता है लेकिन भीतर कदम रखते ही मरीज और उनके परिजन एक बड़े मकड़जाल में फंस जाते हैं। नियमों के मुताबिक अस्पतालों को अपने मुख्य द्वार या काउंटर पर उन सभी बीमारियों और पैकेजों की सूची चस्पा करनी है जिनका इलाज वहां उपलब्ध है, लेकिन शहर के अधिकांश अस्पतालों ने इस नियम को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।

नतीजतन, दूर-दराज के गांवों और कस्बों से आए गरीब मरीज तीमारदारों के साथ एक काउंटर से दूसरे काउंटर तक सिर्फ यह पूछने के लिए भटक रहते है और कई मामलों में यह भी तय नहीं कर पाते है कि आयुष्मान से उनका इलाज हो पाएगा कि नहीं। नईदुनिया की टीम ने शहर के आयुष्मान से इलाज करने वाले कुछ चयनित अस्पतालों की स्थिति जानने पहुंची तो, कई मामले सामने आए, जिसमे इलाज के लिए पहुंचने वालों को कई तरह के दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

जहां आयुष्मान मित्र तो काउंटर में बैठे हुए मिले, जो आयुष्मान से इलाज करने के लिए पहुंचे मरीजों से ठीक से व्यवहार तक नहीं कर रहे थे और मोबाइल में ज्यादा व्यस्त मिले। जबकि मरीज पुछ रहे है कि क्या फला बीमारी का इलाज आयुष्मान से हो सकता है, यह तब बताने की जहमत उठाते हुए आयुष्मान मित्र नजर नहीं आए।वही नियमानुसार अस्पताल में यह चस्पा करना रहता है कि कौन से बीमारी का इलाज होता है और उनका पैकेज राशी कौन है, कौन सा डाक्टर इलाज करेगा।लेकिन किसी भी अस्पताल में इस तरह का सूचना बोर्ड मिलता ही नहीं है। साफ निश्शुल्क इलाज के लिए आने वाले मरीज यहां परेशान होते है।

केस 1

आयुष्मान से चयनित एक निजी अस्पताल में इलाज कराने के लिए पहुंचे तिफरा के मरीज रामखिलावन अपने पिता को दिल की बीमारी के इलाज के लिए आए हुए थे। बाहर आयुष्मान का बोर्ड देखकर वे अंदर गए, लेकिन दो घंटे तक भटकने के बाद आयुष्मान मित्र ने कहा कि हमारे यहां कार्ड से हार्ट का इलाज अभी बंद है, आप कहीं और ले जाइए।

केस 2

अधिकांश अस्पतालों में ‘आयुष्मान हेल्प डेस्क’ को जानबूझकर ऐसी जगह बनाया गया है जहां रोशनी तक नहीं पहुंचती। इलाज की सूची चस्पा न होने का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि अस्पताल प्रबंधन ऐन वक्त पर पैकेज न होने का बहाना बनाकर मरीजों से नकद पैसे वसूल लेता है।

इसलिए छिपाई जा रही है इलाज की सूची?

  • अस्पतालों द्वारा इस जानकारी को सार्वजनिक न करने के पीछे एक सोची-समझा गणित काम कर रहा है।
  • पसंदीदा मरीजों का चयन: सूची न होने से अस्पताल प्रबंधन यह तय करता है कि उसे किस मरीज को भर्ती करना है और किसे नहीं। जिन बीमारियों में सरकार से ज्यादा रिफंड (पैकेज राशि) मिलता है, उन्हें चुपचाप भर्ती कर लिया जाता है, जबकि कम मुनाफे वाले मरीजों को डाक्टर नहीं है या पैकेज ब्लाक है कहकर लौटाया दिया जाता है।
  • कैश काउंटर की तरफ मोड़ना: गंभीर स्थिति में पहुंचे मरीज के परिजनों के पास जब कोई विकल्प नहीं बचता, तो वे मजबूरी में कर्ज लेकर निजी वार्ड और नकद इलाज के लिए तैयार हो जाते हैं।

क्या कहते है लोग

आयुष्मान से इलाज कराना जंग जीतने से कम नहीं

ग्रीन पार्क निवासी प्रयास नामदेव का कहना है कि आयुष्मान भारत से इलाज कराना है सरकारी अस्पताल ही ठीक है।क्योंकि ज्यादातर निजी अस्पताल में आयुष्मान से इलाज कराना जंग जीतने से कम नहीं है।कई तरह से परेशान किया जाता है, मन करता है तो इलाज करते है, नहीं तो बाहर का रास्ता दिखा गया जाता है।

नहीं मिलती है किसी भी प्रकार की जानकारी

जरहाभाठा निवासी मोनू शुक्ला का कहना है कि आयुष्मान से इलाज करने वाले 90 प्रतिशत अस्पताल में इलाज के बारे में नोटिस ही चस्पा नहीं किया गया है। जिससे यह पता नहीं चल पाता है कि कौना सी बीमारी का इलाज किया जाता है। कोई बताता भी नहीं है, व्यवस्था सुधारने की जरुरत है।

ये है जिम्मेदार

जिले का स्वास्थ्य विभाग व आयुष्मान भारत का संचालन करने वाली टीम

आयुष्मान भारत के संचालन और मरीजों को इसका लाभ मिल रहा है कि नहीं, इसकी निगरानी करने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग के साथ आयुष्माान भारत का संचलान करने वाली टीम का है।लेकिन ये सिर्फ खानापूर्ति कर रहे है। नियम और मापदंड है, लेकिन जिनका पालन सही तरीके से नहीं कराया जा रहा है। इसी वजह से मरीज परेशान हो रहे है।

यह सीधे तौर पर मरीजों के अधिकारों का हनन है। नियमों के तहत हर अनुबंधित अस्पताल को इलाज की सूची हिंदी में स्पष्ट रूप से लगानी है। जिन अस्पतालों में सूची चस्पा नहीं मिलेगी, उन पर अर्थदंड लगाया जाएगा और दोबारा गड़बड़ी मिलने पर उनका अनुबंध रद्द करने की अनुशंसा राज्य नोडल एजेंसी को भेजी जाएगी।”डा़ शुभा गरेवाल, सीएमएचओयह भी पढ़ें- मासूम से दुष्कर्म के बाद जंगल में छुपा था युवक, ड्रोन से पुलिस ने खोज निकाला



<



Advertisement Carousel

theblazeenews.com (R.O. No. 13229/12)

×
Popup Image



Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
admin
  • Website

Related Posts

बिजली कटौती से नाराज कांग्रेस ने घेरा कार्यालय

May 27, 2026

जहां कभी पानी के लिए था संघर्ष, वहां अब घर-घर शुद्ध पेयजल

May 27, 2026

छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष का हार्ट अटैक से निधन:BJP प्रशिक्षण शिविर में रूपनारायण की बिगड़ी तबीयत, कैबिनेट मंत्री का था दर्जा

May 27, 2026

Comments are closed.

samvad add RO. Nu. 13783/159
samvad add RO. Nu. 13783/159
Stay In Touch
  • Facebook
  • Twitter
  • YouTube
  • Telegram
Live Cricket Match

[covid-data]

Our Visitor

072107
Views Today : 49
Views Last 7 days : 1861
Views Last 30 days : 5023
Total views : 94854
Powered By WPS Visitor Counter
About Us
About Us

Your source for the Daily News in Hindi. News about current affairs, News about current affairs, Trending topics, sports, Entertainments, Lifestyle, India and Indian States.

Our Picks
Language
Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
  • Home
© 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.