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बिलासपुर में आफत की बारिश…कॉलोनियां लबालब:कई कॉलोनियों में 12 घंटे बाद भी जलभराव, महिला की मौत, 18 करोड़ खर्च, लेकिन दूर नहीं हुई परेशानी




छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में गुरुवार से हो रही लगातार बारिश लोगों के लिए आफत बन गई। बारिश के तेज बहाव में आकर एक बुजुर्ग महिला की जान चली गई। वहीं, देर रात से लेकर शुक्रवार शाम तक सड़क से लेकर निचली इलाके और रिहायशी कॉलोनियों में पानी घुस गया। इसके चलते हर तरफ 6 से 8 फीट तक पानी भर गया। लोगों के घरों में पानी घुसने से भारी तबाही का नजारा देखने को मिला। जिन इलाकों में पिछले 20-25 साल में कभी पानी नहीं भरा, वहां भी इस बार लोगों को पूरी रात घर नहीं, बल्कि अपना सामान बचाने की मशक्कत करते रहे। हैरानी की बात है कि जिन इलाकों में जलभराव रोकने के लिए करोड़ों का काम हुआ है, वह इलाका भी जलमग्न नजर आया। वहीं, लोगों ने पूरे दिन ग्राउंड फ्लोर की जगह पहली मंजिल पर दिन बिताई। बारिश का सबसे ज्यादा असर अरपापार, रायपुर रोड, सकरी और शहर की बाहरी कॉलोनियों में देखने को मिला। जिन इलाकों में पिछले 20-25 साल में कभी पानी नहीं भरा, वहां भी इस बार बारिश का पानी घरों में घुस गया। देवनंदन नगर फेस-1 व 2, गीतांजलि सिटी फेस-1 व 2, फ्रेंड्स कॉलोनी, गुरु विहार, वसंत विहार, सरोज विहार, जोरापारा और जबड़ापारा सहित कई कॉलोनियों में पानी घरों के भीतर तक पहुंच गया। फ्रिज, कूलर, वॉशिंग मशीन, सोफा और घरेलू सामान पानी में डूब गए। सुबह तक लाखों नहीं, करोड़ों के नुकसान का अंदाजा लगाया जाने लगा। वहीं, लोगों को पूरे दिन ग्राउंड फ्लोर की जगह पहली मंजिल पर दिन बितानी पड़ी। देखिए तस्वीरें… SDRF को शहर में चलानी पड़ी नाव हालात इतने बिगड़ गए कि देवनंदन नगर सहित शहर के आधा दर्जन से अधिक इलाकों में एसडीआरएफ को रेस्क्यू करना पड़ा। इस दौरान टीम को कॉलोनियों में नाव चलाकर लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। लोगों का कहना है कि, पिछले दो दशक में कई बार तेज बारिश हुई, लेकिन इस तरह घरों में पानी कभी नहीं घुसा। इस बार बारिश के बाद पूरी कॉलोनियों की तस्वीर बदल गई। बारिश थमी तो कीचड़ और गंदगी बारिश थमने के बाद भी लोगों की परेशानी कम नहीं हुई। घरों से पानी निकालने, खराब हुए सामान को संभालने और कीचड़ साफ करने में पूरा दिन निकल गया। इस बारिश ने साफ कर दिया कि, शहर के कई हिस्सों में जल निकासी की व्यवस्था इतनी कमजोर है कि एक दिन की तेज बारिश भी सामान्य जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर सकती है। बाढ़ में बह गई बुजुर्ग महिला, झाड़ियों में मिली लाश मूसलाधार बारिश के बीच शुक्रवार सुबह काम पर जाने के लिए निकली एक बुजुर्ग महिला नाले के तेज बहाव में आकर बह गई। कुछ घंटे बाद महिला का शव राजकिशोर नगर स्थित ऊर्जा पार्क के पास अरपा नदी की झाड़ियों में फंसा मिला। स्थानीय लोगों की सूचना पर 112 की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। शिनाख्त के बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए सिम्स भेज दिया गया। महिला की पहचान लिंगियाडीह के ठाकुर देव मंदिर के पास रहने वाली 65 वर्षीय प्रमिला बाई के रूप में हुई। वो शीला अपार्टमेंट के पास स्थित नाले तक पहुंचीं, जहां लगातार बारिश के कारण पानी पूरी तरह उफान पर था। नाले का पानी सड़क के ऊपर से बह रहा था, लेकिन लोग और वाहन किसी तरह वहां से गुजर रहे थे। आशंका है कि, इसी दौरान पुल पार करते समय उनका पैर फिसल गया या वो जलभराव की चपेट में आकर पानी की तेज धारा में बह गईं। सरकंडा पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा कार्रवाई की और शव को पोस्टमार्टम के लिए मॉर्च्युरी भेज दिया है। पुलिस मामले में मर्ग कायम कर जांच कर रही है। 12 घंटे बाद भी कम नहीं हुआ पानी सरकंडा क्षेत्र के कई इलाको में रात 11 बजे तक बारिश का पानी कम नहीं हुआ था। इसके चलते लोग पूरे दिन के साथ ही शुक्रवार रात भी पहली मंजिल पर चढ़कर रात बितानी पड़ी। शिवम होम्स, चौबे कॉलोनी, बंधवापारा सहित कई कॉलोनियों के घरों में बारिश का पानी कम नहीं हुआ। बिजली नहीं, पीने के पानी की किल्लत शहर में भारी बारिश का असर बुजुर्ग से लेकर बच्चों के जनजीवन पर ज्यादा पड़ा। गुरुवार रात से शहर का अधिकांश इलाका जलमग्न होने के कारण बिजली बंद कर दी गई। ताकि, करंट न फैले। यह स्थिति पूरे दिन और रात तक बनी रही। बिजली नहीं होने के कारण पीने के पानी का सप्लाई बाधित रहा। इसके चलते लोगों को बोतल बंद पानी से काम चलाना पड़ा। 18 करोड़ खर्च, फिर भी भर रहा पानी, कहीं अधूरे नाले, कहीं ओवरलोड ड्रेनेज शहर में जलभराव रोकने नगर निगम ने पिछले तीन साल में चार प्रमुख इलाकों में करीब 18 करोड़ रुपए खर्च कर बड़े नाले बनाए। दावा किया गया कि इन इलाकों में बारिश में जलजामाव की समस्या दूर होगी। इसके बावजूद इस बार भी कई जगह सड़कें और बस्तियां जलमग्न रहीं। कहीं नाले अधूरे छोड़ दिए गए, कहीं पुराने संकरे नाले नहीं बदले गए और कहीं पूरा ड्रेनेज सिस्टम ओवरलोड हो गया। नतीजा, करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है। नाला बनने के बाद भी दूर नहीं हुई दिक्कतें सरकंडा के बंधवापारा में 5 करोड़ खर्च कर का नाला बनाया गया। दावा किया गया कि इससे बिरकोना खार से आने वाले पानी की निकासी इमलीभाठा से कोनी स्थित सुपर मल्टी स्पेशयलिटी अस्पताल तक 10 फीट चौड़ा नाला बनाया गया। लेकिन, इसके बाद भी यहां पानी निकासी की समस्या दूर नहीं हुई। अभी भी आसपास की कॉलोनियों में पानी भर गया। लिंक रोड और पुराना बस स्टैंड पर 7 करोड़ खर्च फिर भी स्थिति जस की तस पुराना दीप होटल से जवाली नाले तक 20 फीट चौड़ा नाला बनाया गया। दावा किया गया कि इससे पुराना बस स्टैंड और लिंक रोड में जलभराव की समस्या दूर होगी। लेकिन, बीच का 6 फीट पुराना नाला नहीं बदला गया। इसके चलते पुराना बस स्टैंड में जलजमाव की दिक्कतें अभी भी बनी हुई है। तालापारा, बालमुकुंद स्कूल से तैयबा चौक तक नाला बना बारिश में ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त करने का दावा करते हुए स्मार्ट सिटी के मद से तालापारा में 1 किमीलोमीटर लंबा नाला बनाया गया। इसके साथ ही बालमुकुंद स्कूल से तैयबा चौक तक 3 करोड़ का नाला बनाया गया। लेकिन, निर्माण कार्य होने के बाद भी यहां बारिश का पानी भर गया। यदुनंदन कॉलोनी में 3.27 करोड़ का नाला, काम अधूरा तिफरा के यदुनंदन नगर से शनि मंदिर तक 400 मीटर लंबा और 10 फीट चौड़ा नाला बनाया गया है। दावा किया गया कि इससे कॉलोनी में बारिश का पानी नहीं भरेगा और लोगों को सुविधा मिलेगी। लेकिन, अब भी कॉलोनी के कई हिस्सों में अब भी पानी भरता है। इसकी वजह शनि मंदिर के पास आखिरी छोर का काम अब तक अधूरा है। रेलवे यार्ड में भरा पानी, ट्रेनें कैंसिल, सड़क संपर्क भी टूटा, बिजली भी बंद बिलासपुर में रिकॉर्ड बारिश से शहर से लेकर गांव तक पानी ही पानी नजर आया। बिलासपुर-कोरबा, बिलासपुर-रायगढ़ मार्ग, नेशनल हाईवे, मस्तूरी तिराहा, पारा घाट टोल प्लाजा, दुबट्टा मोड़, भैंसो पुल, कुटीघाट और कोसा माना डेरा-मल्हार एनीकट पर पानी भरने से आवाजाही ठप रही। कुटीघाट में लीलागर नदी पुल के ऊपर 3 से 4 फीट तक बहती रही। बिलासपुर स्टेशन और यार्ड में ट्रैक डूबने से 7 ट्रेनें रद्द करनी पड़ीं, जबकि 4 ट्रेनों का परिचालन बदला गया। वहीं शनिचरी, व्यापार विहार और एसबीआर कॉलेज सब-स्टेशन समेत 17 ट्रांसफार्मर पानी में आने से कई इलाकों की बिजली एहतियातन बंद रखी गई। 2021 में हुई थी 4.8 इंच बारिश 24 जुलाई 2021 में 24 घंटे में 123.2 मिमी बारिश हुई थी। इस बार 415.6 मिमी बारिश दर्ज हुई, जिसने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। जिले में सीपत और तखतपुर में 110.2-110.2 मिमी, मस्तूरी में 96.2 और सकरी में 95.4 मिमी बारिश हुई। ट्रैक पर भरा पानी, रेल की रफ्तार थमी बिलासपुर स्टेशन और यार्ड में ट्रैक पर पानी भरने से 7 ट्रेनें रद्द करनी पड़ीं। 4 ट्रेनों का परिचालन बदला गया। कुछ ट्रेनें चांपा और दाधापारा से ही वापस लौटीं, जबकि एक मेमू ट्रेन बीच रास्ते में ही समाप्त करनी पड़ी। तीन सब-स्टेशन बंद, कई इलाके अंधेरे में विघुत वितरण कंपनी के ईडी एके अम्बस्थ ने बताया कि, लगातार बारिश से शनिचरी, व्यापार विहार और एसबीआर कॉलेज सब-स्टेशन में पानी भर गया। इसके अलावा शहर के 17 ट्रांसफार्मर भी जलमग्न हो गए। लोगों की सुरक्षा को देखते हुए प्रभावित इलाकों की बिजली आपूर्ति एहतियातन बंद रखी गई। मैदान में उतरा प्रशासन, 1700 फूड पैकेट बांटे देर रात से हुई मूसलाधार बारिश के बाद शहर के निचले इलाकों, कॉलोनियों और सड़कों में जलभराव हो गया। कई घरों में पानी घुसने पर जिला प्रशासन, नगर निगम और एसडीआरएफ ने आधी रात से राहत व बचाव अभियान शुरू किया। कलेक्टर संजय अग्रवाल और निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे ने खुद कमान संभाली। होमगार्ड के जिला कमांडेंट दीपांकर नाथ के नेतृत्व में एसडीआरएफ ने देर शाम और रात तक रेस्क्यू में जुटा रहा। संयुक्त टीमों ने चौबे कॉलोनी, बंधवापारा, खमतराई, बहतराई, सिरगिट्टी, जोरापारा, विजयापुरम, मंगला, सकरी, व्यापार विहार, कुदुदंड, तोरवा, तारबाहर, तिफरा और नेहरू नगर समेत कई इलाकों में जेसीबी, जेट सक्शन और पंपिंग मशीनों से जल निकासी कराई। जहां लोग घरों में फंसे थे, वहां बोट और ट्रैक्टर से महिलाओं, बच्चों व बुजुर्गों को सुरक्षित निकाला गया। राहत शिविरों में भोजन, पेयजल और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। जिन परिवारों के घरों में खाना नहीं बन सका, उन्हें नगर निगम ने 1700 फूड पैकेट वितरित किए। कलेक्टर, निगम आयुक्त, एसएसपी रजनेश सिंह, जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल और जिला कमांडेंट दीपांकर नाथ लगातार प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करते रहे। एसडीआरएफ ने करीब 204 लोगों का किया रेस्क्यू जगदंबा कॉलोनी – 25
बंधवापारा – 70
श्रीकांत वर्मा मार्ग, मित्र विहार – 20
गीतांजलि सिटी – 20
मंगला – 5
देवनंदन नगर – 20
विजयापुरम – 15
चौबे कॉलोनी – 4
रिस्दा मल्हार – 25 एसडीआरएफ ने मरीज तक पहुंचाया ऑक्सीजन सिलेंडर जगदंबा कॉलोनी में तीन फीट पानी भरा था। सूचना मिलने पर एसडीआरएफ ने एक मरीज तक ऑक्सीजन सिलेंडर पहुंचाया। चौबे कॉलोनी में पांच फीट पानी के बीच फंसी एक बुजुर्ग महिला को भी सुरक्षित बाहर निकाला। पूर्व पार्षद ने संभाला मोर्चा वार्ड-62 शास्त्री नगर के पूर्व पार्षद राजेश शुक्ला ने कपिल नगर, बंगाली पारा, गुरु विहार और रुद्र विहार कॉलोनी में सफाई कर्मचारियों के साथ नालियों की सफाई कर जल निकासी कराई। शहर कांग्रेस कमेटी ने बांटे भोजन पैकेट शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा के नेतृत्व में रेलवे, बंधवापारा और फोकटपारा में प्रभावित लोगों को चाय-नाश्ता व भोजन उपलब्ध कराया गया। करीब 1200 फूड पैकेट बांटे गए और एसडीआरएफ के राहत कार्य में सहयोग किया गया। जनजीवन सामान्य करने के निर्देश शहर विधायक अमर अग्रवाल ने टास्क फोर्स को जलनिकासी, स्वच्छता, पेयजल और बिजली व्यवस्था जल्द बहाल करने के निर्देश दिए। साथ ही सिम्स और जिला अस्पताल को संभावित मौसमी बीमारियों के मद्देनजर सतर्क रहने को कहा। पूर्व विधायक बोले- पानी में डूबा जनता का विश्वास पूर्व विधायक शैलेश पांडेय ने कहा कि बारिश ने नगर निगम और स्मार्ट सिटी के दावों की पोल खोल दी। उन्होंने आरोप लगाया कि कई घरों में पानी घुसने, व्यापार प्रभावित होने और न्यायालय परिसर तक में जलभराव के बावजूद शहर विधायक और महापौर नजर नहीं आए। संभाग में भी बारिश का असर बिलासपुर संभाग के सभी जिलों में अच्छी बारिश हुई। बिलासपुर के बाद सबसे ज्यादा 170 मिमी बारिश जांजगीर में दर्ज की गई। सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 75 मिमी, मुंगेली में 58.8 मिमी, कोरबा में 47.4 मिमी, सक्ती में 38.5 मिमी, रायगढ़ में 34 मिमी और जीपीएम में 33.7 मिमी बारिश हुई। लगातार बारिश से संभाग के कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित रहा। आज भी भारी बारिश का अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार निम्न दाब, सक्रिय मानसून द्रोणिका और पश्चिमी विक्षोभ के असर से 18 जुलाई को अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। बिलासपुर संभाग और आसपास के जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना जताई गई है।



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