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छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में अप्रैल महीने में ही भीषण गर्मी का असर दिखाई देने लगा है। यहां का तापमान करीब 36 से 40 डिग्री के आसपास पहुंचने से इंद्रावती नदी समेत कई नदी-नालों का जलस्तर घट गया है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात में भी पानी की एक-दो धार बह रही है। इसका असर न केवल पर्यटन पर दिख रहा है, बल्कि पर्यावरण और जनजीवन पर भी पड़ने लगा है। जहां आम दिनों में पर्यटकों की भीड़ रहती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। पर्यटकों में निराशा राजस्थान से पहुंचे पर्यटक शिवम शर्मा ने बताया कि, वे चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात की खूबसूरती देखने आए थे, लेकिन इस समय पतली धार ही नजर आ रही है। अगली बार मानसून के बाद आना बेहतर रहेगा। वहीं बलौदाबाजार, बेमेतरा और गरियाबंद से आए पर्यटकों ने भी पानी कम होने की बात कही, हालांकि उन्होंने बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना की। गर्मी का असर केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव जल, जंगल और जीव-जंतुओं पर भी पड़ रहा है। नदी-नाले सूखने से पेड़-पौधों और वन्य जीवों के सामने जल संकट खड़ा हो रहा है। इंद्रावती नदी का जलस्त्रोत हुआ कम बस्तर की जीवनदायिनी कही जाने वाली इंद्रावती नदी का भी जलस्त्रोत कम हो रहा है। इसी नदी पर चित्रकोट वाटरफॉल बना है। अभी अप्रैल का महीना भी खत्म नहीं हुआ और पारा चढ़ने लगा है। भीषण गर्मी की वजह से इंद्रावती नदी सूख रही है, जिससे एशिया का नियाग्रा कहे जाने वाले चित्रकोट वाटरफॉल में भी एक पतली धार में पानी नीचे गिर रहा है। कैसे बचाएं नदी-नाले और पर्यावरण गर्मी में खुद को ऐसे रखें सुरक्षित
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