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बलौदाबाजार वनमंडल में ‘युवान’ कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को प्रकृति संरक्षण से जोड़ा जा रहा है। वनमण्डलाधिकारी धम्मशील गणवीर के निर्देश पर विभिन्न वन परिक्षेत्रों में सीड बॉल रोपण, बीज रोपण और पर्यावरण जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं। इसका उद्देश्य वर्षा ऋतु में प्राकृतिक वन पुनर्जनन को बढ़ावा देना और स्थानीय युवाओं को जैव विविधता संरक्षण से जोड़ना है। शनिवार को इसी क्रम में विभिन्न वन परिक्षेत्रों में विद्यार्थियों के लिए वन भ्रमण और पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्थानीय बीजों से वन पुनर्जनन की तैयारी अभियान के तहत प्रत्येक वन परिक्षेत्र में ऐसे नाले और क्षेत्र चुने जा रहे हैं, जहां स्थानीय प्रजातियों के बीजों से सीड बॉल और बीज रोपण कर प्राकृतिक पुनर्जनन को बढ़ावा दिया जा सके। मिट्टी कटाव वाले क्षेत्रों में स्थानीय घास और अन्य उपयुक्त प्रजातियों के रोपण से मृदा एवं जल संरक्षण को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। युवाओं को इन गतिविधियों से जोड़ने के लिए हर शनिवार को ‘युवान’ कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाती है। ये कार्यक्रम बारनवापारा, देवपुर, सोनाखान, बलौदाबाजार और कोठारी वन परिक्षेत्रों के विभिन्न स्कूलों में आयोजित किए गए। इनमें शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चरौदा ‘ब’, शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चंहाट, शासकीय प्राथमिक शाला उपरानी, महकम स्कूल, शासकीय हायर सेकेंडरी शाला हटौद, शासकीय हाई स्कूल पंडरिया और शासकीय प्राथमिक शाला कोठारी शामिल हैं। इन गतिविधियों में लगभग 350 से 400 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। वन भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को वन और वन्यजीवों का महत्व, जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरण संतुलन, जल एवं मृदा संरक्षण तथा मानव जीवन में वनों की उपयोगिता के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। उन्हें यह भी बताया गया कि पर्यावरण संरक्षण में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और उनके छोटे-छोटे प्रयास भी प्रकृति संरक्षण में बड़ा योगदान दे सकते हैं। सीड बॉल बनाने और लगाने की दी गई जानकारी कार्यक्रम में विद्यार्थियों को स्थानीय फलदार और उपयोगी पौधों के सीड बॉल (बीज गोले) बनाने और उन्हें लगाने की जानकारी दी गई। साथ ही बताया गया कि इनका क्या महत्व होता है। छात्रों को औषधीय पौधों की पहचान, उनके उपयोग और प्राकृतिक रूप से जंगलों के पुनर्जनन (नए पेड़ उगने की प्रक्रिया) के बारे में भी समझाया गया। इसके अलावा उन्हें यह भी बताया गया कि मृदा कटाव क्यों होता है और इसे कैसे रोका जा सकता है। अधिकारियों ने समझाया कि ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाना और स्थानीय पौधों को बचाना पानी और मिट्टी को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी है। कार्यक्रम में छात्रों को सीड बॉल भी दिए गए और उन्हें बनाने व लगाने का तरीका भी सिखाया गया। सभी विद्यार्थियों ने पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का संकल्प लिया। वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को प्रकृति से जोड़ना और उन्हें पानी, मिट्टी और जैव विविधता के संरक्षण के लिए जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी ही भविष्य में पर्यावरण के सबसे बड़े संरक्षक बनेंगे।
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