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बलौदाबाजार के पलारी तहसील स्थित महानदी के अमेठी एनीकेट पर एक अनोखा नजारा देखने को मिल रहा है। जहां एक ओर सरकारी योजनाओं के तहत बना 15 करोड़ रुपए का जलघरोहण प्लांट बेकार पड़ा है, वहीं दूसरी ओर गांव के किसानों ने अपनी देसी समझ और मेहनत से सूखी पड़ी महानदी से 300 एकड़ में धान की फसल उगा दी है। गर्मी के मौसम में बेरोजगारी का सामना कर रहे ग्रामीणों के लिए यह देसी जुगाड़ आय का जरिया बन गया है। एनीकेट में पानी की कमी से जल परियोजना बेकार स्थानीय किसानों का कहना है कि पिछले दस वर्षों से पीएचई विभाग के अधिकारी और इंजीनियर पलारी नगर पंचायत को पानी उपलब्ध कराने में विफल रहे हैं। एनीकेट से पलारी तक 15 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भी स्थापित किया गया, लेकिन नदी में पानी की कमी के कारण यह पूरी योजना धरी की धरी रह गई। इसके विपरीत, गांव के किसानों ने बिना किसी इंजीनियरिंग डिग्री या सरकारी बजट के, महानदी के सूखे तल में 10-12 फीट गहरे गड्ढे खोदे। इन गड्ढों में सबमर्सिबल पंप लगाकर, उन्होंने दर्जन भर पाइपलाइनों के माध्यम से 300 एकड़ खेतों तक पानी पहुंचाया। आज इसी ‘सूखी’ नदी के पानी से पूरा खेत धान से लहलहा रहा है। सबमर्सिबल पंप से 300 एकड़ खेतों की सिंचाई किसानों ने बताया कि जहां पढ़े-लिखे अधिकारी 15 करोड़ रुपए खर्च कर भी शहर को पानी नहीं दे पाए, वहीं उन्होंने अपनी सूझबूझ से 300 एकड़ भूमि की सिंचाई कर दी। किसानों के अनुसार, “उनके पास किताबें हैं, हमारे पास जमीन का अनुभव। हमने गड्ढा खोदा, पंप लगाया और दो किलोमीटर दूर तक पानी पहुंचाकर 300 एकड़ सींच दी। अब धान की कटाई शुरू हो गई है।” इस तस्वीर में एक तरफ पीएचई विभाग का करोड़ों का वाटर प्लांट बना है, लेकिन वहां पानी की एक बूंद भी नहीं पहुंच रही है। वहीं दूसरी तरफ किसानों ने दर्जन भर सबमर्सिबल मशीनें लगाकर लगातार पानी निकाल रहे हैं। किसानों का कहना है कि भले ही वे ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं, लेकिन उन्हें पता है कि पानी कहां मिलेगा। उन्होंने महानदी के सूखे एनीकेट के पास गड्ढा खोदकर पानी निकाला और उसी से अपने खेतों की सिंचाई की। सभी किसानों के सामूहिक प्रयास से फसल तैयार हो रही है। अब कई खेतों में धान की कटाई भी शुरू हो गई है, जबकि कुछ खेतों में अभी समय लग रहा है। पीएचई विभाग के सब इंजीनियर संदीप लारेंस ने बताया कि वाटर प्लांट और पाइपलाइन तो बन गई है, लेकिन महानदी सूख जाने से एनीकेट में पानी ही नहीं है।
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