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छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश में नक्सल गतिविधियों में सहयोग करने वाले संगठनों पर नकेल कसा है। इसके तहत राज्य में सार्वजनिक व्यवस्था, शांति और लोक परिशांति बनाए रखने के उद्देश्य से कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) और उससे जुड़े छह अग्र (फ्रंट) संगठनों पर लगे प्रतिबंध को एक वर्ष के लिए और विस्तारित कर दिया है। राज्य शासन ने माना है कि इन संगठनों की गतिविधियां राज्य की सुरक्षा और संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज में बाधक बन रही हैं। यह नई अधिसूचना 12 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी और अगले एक वर्ष की तक लागू रहेगी। राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ विशेष जन सुरक्षा अधिनियम, 2005 (क्रमांक 14 सन् 2006) की धारा-3 की उपधारा (1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह निर्णय लिया है। विरोध व महिला कैडर भर्ती करने में सक्रिय थे संगठन
क्रांतिकारी आदिवासी महिला संघ नामक यह संगठन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया का एक प्रमुख अग्र (फ्रंट) संगठन है, जो महिलाओं के बीच विचारधारा के विस्तार का कार्य करता है। इसका प्राथमिक उद्देश्य आदिवासी महिलाओं को संगठित करना और उन्हें माओवादी विचारधारा से जोड़ना है। यह माओवादी आंदोलन के लिए महिला कैडरों की भर्ती में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह संगठन न केवल राज्य के अंदरूनी और दुर्गम क्षेत्रों में सक्रिय है, बल्कि अब शहरी क्षेत्रों में भी अपने आधार का विस्तार करने का प्रयास कर रहा है। इसकी गतिविधियां राज्य की स्थापित संस्थाओं और उनके कार्यों में बाधक बन गई हैं। इसी तरह आरपीसी अथवा जनताना सरकार या रिवोल्यूशनरी पीपल्स काउंसिल को माओवादियों की समानांतर शासन व्यवस्था माना जाता है, जिसे शासन ने पूरी तरह से प्रतिबंधित किया है। यह संगठन माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में अपनी स्वयं की शासन व्यवस्था चलाने का प्रयास करता है। इसके तहत वे कथित तौर पर ‘अदालतें’, ‘कर वसूली’ और ‘प्रशासनिक कार्य’ करते हैं, जो विधि द्वारा स्थापित राज्य सरकार की सत्ता को चुनौती देते हैं। यह संगठन ग्रामीण स्तर पर अत्यधिक सक्रिय रहता है और स्थानीय संसाधनों पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश करता है। ‘जनताना सरकार’ के माध्यम से माओवादी अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और विकास कार्यों का विरोध करते हैं, जिससे यह सार्वजनिक शांति के लिए बड़ा खतरा बन गया है। इन संगठनों पर रहेगा प्रतिबंध
छत्तीसगढ़ विशेष जन सुरक्षा अधिनियम, 2005 के तहत जिन संगठनों को ‘विधि विरुद्ध’ घोषित किया गया है, उनमें मुख्य संगठन सीपीआई के अलावा निम्नलिखित छह संगठन शामिल हैं:- {दण्डकारण्य आदिवासी किसान मजदूर संघ {क्रांतिकारी आदिवासी महिला संघ {क्रांतिकारी आदिवासी बालक संघ {क्रांतिकारी किसान कमेटी महिला मुक्ति मंच {आरपीसी अथवा जनताना सरकार। प्रतिबंध बढ़ाने का मुख्य कारण
अधिसूचना के अनुसार, इन संगठनों के सदस्य न केवल राज्य के अंदरूनी इलाकों में सक्रिय हैं, बल्कि वे शहरी क्षेत्रों में भी अपने नेटवर्क का विस्तार करने का प्रयास कर रहे हैं । इनकी सक्रियता से सार्वजनिक शांति को खतरा उत्पन्न हो गया है और यह विधि द्वारा स्थापित सरकार के कार्यों में बाधा डाल रहे हैं, जिसके कारण इन्हें प्रतिबंधित करना आवश्यक समझा गया है।
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