![]()
संभाग के सरकारी अस्पतालों में नवजात बच्चों को सुरक्षा देने के लिए भेजी गई ओरल पोलियो वैक्सीन की ताजा खेप में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। कई जिलों में सप्लाई की गई वैक्सीन की कांच की शीशियां अंदर से टूटी और चटकी हुई मिली हैं। मामला उजागर होते ही स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। वैसे तो कांच की शीशियां टूटने के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन कोल्ड सेंटरों में तापमान शून्य डिग्री के नीचे जाने को मुख्य वजह माना जा रहा है। अलग-अलग जिलों के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारियों ने इसकी लिखित शिकायत तुरंत राज्य टीकाकरण अधिकारी से की है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य मुख्यालय रायपुर से बस्तर के अफसरों को कड़े और स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत साफ कहा गया है कि जितनी भी वायल टूटी हुई मिली हैं, उन्हें किसी भी हाल में इस्तेमाल न किया जाए और स्थानीय स्तर पर ही बायो-मेडिकल वेस्ट गाइडलाइंस का पालन करते हुए तुरंत नष्ट कर दिया जाए। विशेषज्ञों की राय: इसलिए टूटी शीशियां… एक वायल 250 रुपए का, लाखों रुपए का नुकसान: सरकारी थोक खरीद में एक वायल की कीमत 220 से 250 रुपए बैठती है। बस्तर संभाग में नष्ट हुई कुल 8550 से अधिक वायल्स के कारण सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का सीधा नुकसान उठाना पड़ा है। दंतेवाड़ा-जगदलपुर में ज्यादा नुकसान
बस्तर में सबसे बड़ी खेप 40,000 खुराक की आई थी। इसमें से जांच के दौरान रिकॉर्ड 7000 वायल टूटी हुई पाई गईं। दंतेवाड़ा जिले में 5000 पोलियो खुराक की खेप पहुंची थी। इसमें से 1500 वायल पूरी तरह टूटी निकलीं। सुकमा में केवल 50 वायल ही टूटी मिली हैं, जिन्हें नष्ट करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। जानें…कहां बनती है वैक्सीन
भारत में ओरल पोलियो वैक्सीन का मुख्य उत्पादन हैदराबाद के भारत बायोटेक और उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर स्थित बिबकोल जैसी प्रमुख राष्ट्रीय लैब्स में होता है। मैन्युफैक्चरिंग प्लांट से निकलने के बाद इस वैक्सीन को विशेष रेफ्रिजरेटेड वैन के जरिए रायपुर स्थित स्टेट वैक्सीन स्टोर पहुंचाया जाता है।
<
