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जिले के तालनार और गुमियापाल इलाके में तरल पहाड़ पर खनन को लेकर जारी गतिरोध ने नया मोड़ ले लिया है। सरकार ने जिस पहाड़ को खनन के लिए आरती स्पंज कंपनी को लीज पर दिया है, उसे ग्रामीणों ने पिछले 10 साल से रोक रखा है। अब अलनार में हुई बैठक में ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि उन्हें सरकारी पट्टा मंजूर नहीं है। अगर कंपनी को काम करना है, तो उसे सरकार के बजाय सीधे ग्राम सभा से सौदा करना होगा। गुमियापाल के आश्रित अलनार गांव में स्थित तरल पहाड़ में सरकार ने आरती स्पंज कंपनी को खनन की अनुमति दी है, लेकिन ग्रामीण एक दशक से विरोध पर अड़े हैं। इससे पहले देव माइनिंग कंपनी ने भी कई बार काम शुरू करने की कोशिश की, जिसे ग्रामीणों ने नाकाम कर दिया। इसी साल जनवरी में जब कंपनी के कर्मचारी सर्वे और साइट निरीक्षण के लिए पहुंचे थे, तब उन्हें गांव की सरहद पर ही रोक कर वापस भेज दिया गया था। हाल ही में पहुंचे पेटी ठेकेदारों को भी ग्रामीणों ने गांव में घुसने नहीं दिया। ग्रामीणों ने यह शर्तें भी रखी… फर्जी दस्तखत से नंदराज पहाड़ भी लीज पर दे चुके ग्रामीणों का आरोप है कि 2014 में तरल पहाड़ की लीज जिस ग्रामसभा के आधार पर दी गई, उसमें केवल 10 लोगों के हस्ताक्षर हैं। इसी तरह नंदराज पहाड़ की ग्रामसभा में भी 160 फर्जी दस्तखत की शिकायत है, जिसकी जांच रिपोर्ट शासन के पास लंबित है। ग्रामीणों का कहना है कि 10 लोगों की कथित सहमति के आधार पर पूरे इलाके का भविष्य तय नहीं किया जा सकता। लाभ और अधिकार गांव को देंगे, तभी विचार करेंगे बैठक में सामाजिक कार्यकर्ता मनीष कुंजाम और सोनी सोरी ने किसी भी शर्त पर खनन का विरोध किया है। उनका कहना है कि पहाड़ को बचाने के लिए आंदोलन और तेज किया जाएगा। वहीं स्थानीय प्रतिनिधि मंगल कुंजाम और सोमरू की मौजूदगी में ग्रामीणों के एक गुट ने ‘शर्तों के साथ खनन’ का विकल्प रखा है। 2014 की ग्रामसभा के फर्जी होने की जहां तक बात है, तो हम इसकी जांच करवाएंगे। पहाड़ के लीज को लेकर अनुबंध ग्रामसभा और निजी कंपनी के बीच का विषय है। इस पर दोनों आपसी सहमति से रास्ता निकाल सकते हैं। – देवेश ध्रुव, कलेक्टर, दंतेवाड़ा
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