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प्रदेश में 1 मई से शुरू हुई जनगणना के तहत प्रगणक घर-घर पहुंच रहे हैं। इस दौरान वे लोगों से मकान उनके की छत, फर्श, घर की सुविधाओं, जाति आदि से जुड़े 33 सवालों के जवाब मांग रहे हैं। देखने में आ रहा है कि इस तरह के सवालों से लोग नाराज भी हो रहे हैं। उनके सामने आशंकाएं भी सामने आ रही हैं। कहीं सरकारी सुविधाएं बंद होने का डर है, तो कहीं आयकर या जीएसटी जांच की आशंका। इन्हीं शंकाओं के कारण कई लोग सही जानकारी देने से बच रहे हैं, जबकि कुछ जगह सवालों की वजह से प्रगणकों से विवाद की स्थिति भी बन रही है। राजधानी रायपुर समेत कई जगह प्रगणकों से बदसलूकी की घटनाएं भी सामने आ रही है। जनगणना जैसे काम में जरूरी है कि लोग घर पहुंच रहे इन सुपरवाइजर्स का सहयोग करें और उन्हें फॉर्म में तय 33 सवालों की सही जानकारी दें। अपने बैंक खाते, ओटीपी, स्कैनर आदि न दें। जनगणना को साइबर अटैक और डेटा लीक से सुरक्षित रखने के लिए सरकार ने 6-लेयर सिक्योरिटी सिस्टम लागू किया है। यानी किसी भी स्तर पर डेटा मोबाइल में स्थायी रूप से उपलब्ध नहीं रहेगा। अधिकारियों के अनुसार जनगणना के दौरान जुटाई जाने वाली व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय और लीकप्रूफ है। इसका उपयोग केवल जनसंख्या, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और विकास योजनाओं की रूपरेखा तैयार करने के लिए किया जाएगा। यह डेटा किसी व्यक्ति के खिलाफ टैक्स जांच, जीएसटी कार्रवाई, पुलिस जांच या सरकारी सुविधाओं को रोकने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों का कहना है कि गलत या अधूरी जानकारी का सीधा असर राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय योजनाओं पर पड़ सकता है। जनगणना डेटा लीक की कोई आशंका नहीं है। यह जानकारी किसी केंद्रीय या राज्य सरकारी एजेंसी को कार्रवाई के लिए उपलब्ध नहीं कराई जाती। इसका उपयोग केवल योजनाएं बनाने के लिए सांख्यिकीय रूप में होता है। लोगों को घबराने या प्रगणकों से विवाद करने की जरूरत नहीं है। -कार्तिकेय गोयल, निदेशक, जनगणना निदेशालय छग
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