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सक्ती जिले के सिंघीतराई के वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण बायलर विस्फोट मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चेयरमैन अनिल अग्रवाल, प्लांट प्रबंधन सहित 10 अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। 14 अप्रैल को हुए इस हादसे में अब तक 20 श्रमिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 15 अन्य घायल हैं। सिंघीतराई के वेदांता (एथेना) पावर प्लांट में 14 अप्रैल को हुआ बॉयलर धमाका अब महज हादसा नहीं, बल्कि लापरवाही और जल्दबाजी का नतीजा माना जा रहा है। 350 मेगावाट से सीधे 590 मेगावाट उत्पादन बढ़ाने का फैसला जांच के केंद्र में है। अब तक 20 मजदूरों की मौत हो चुकी है और 15 घायल जिंदगी के लिए जूझ रहे हैं। औद्योगिक सुरक्षा विभाग की 6 घंटे की सघन जांच के बाद पुलिस ने जिन 10 लोगों को आरोपी बनाया है, उनमें मुख्य उत्तरदायी वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल, प्लांट हेड देवेंद्र पटेल, साइट इंचार्ज (एनजीएसएल), ठेका कंपनी का प्रोजेक्ट मैनेजर, प्लांट की गतिविधियों का प्रमुख ऑपरेशन हेड, सुरक्षा मानकों की अनदेखी के लिए जिम्मेदारों पर केस दर्ज हुआ है। इनमें सेफ्टी ऑफिसर, प्रेशर मॉनिटरिंग में विफल तकनीकी अधिकारी बॉयलर इंचार्ज, दोपहर की पाली का सुपरवाइजर शिफ्ट इंचार्ज व पाइपलाइन की मरम्मत में कोताही बरतने वाला मेंटेनेंस इंजीनियर व दो अन्य अधिकारी शामिल हैं। एसपी प्रफुल्ल ठाकुर ने बताया कि लापरवाही मिलने पर वेदांता चेयरमैन सहित अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। जांच के लिए टीम बना दी गई है, जो भी रिपोर्ट आएगी, उसके आधार पर आरोपियों की संख्या बढ़ सकती है। इन धाराओं में दर्ज हुई एफआईआर 1. धारा 106(1) बीएनएस: लापरवाही से मौत: जब किसी की लापरवाही से मौत हो।
इसलिए लगी: बॉयलर निरीक्षक की रिपोर्ट में सुरक्षा मानकों की अनदेखी
स्थिति: गैर-जमानती, सख्त सजा संभव। 2. धारा 289 बीएनएस: मशीनरी में लापरवाही…खतरनाक मशीन के संचालन-मेंटेनेंस में चूक।
इसलिए लगी….बॉयलर में जरूरत से ज्यादा ईंधन भरा गया, रखरखाव भी कमजोर। 3. धारा 3(5) बीएनएस: साझा जिम्मेदारी…एक से ज्यादा लोगों की सामूहिक भूमिका
इसलिए लगी… मैनेजमेंट से लेकर ऑपरेशनल स्तर तक सभी की भूमिका संदिग्ध चश्मदीद बोले- बिजली उत्पादन बढ़ाने जल्दबाजी इसी से हुई दुर्घटना; दो हजार मजदूरों ने प्लांट छोड़ा हादसे के बाद शुरुआती जांच के दौरान मजदूरों-अफसरों से बातचीत में यह सामने आया है कि ओवरलोडिंग और पाइप लीकेज से ब्लास्ट हुआ है। मजदूरों के मुताबिक ब्लास्ट के समय न सायरन बजा और न ही कोई अलर्ट जारी किया गया। हादसे के बाद अफरा-तफरी मच गई और डर के कारण प्लांट के पीछे लेबर क्वार्टर में रहने वाले 2000 से ज्यादा मजदूर घर लौट गए हैं। अब गिनती के करीब 50 मजदूर ही बचे हैं। भास्कर की टीम ने भी ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर मजदूरों से बातचीत की। एक घंटे में तेजी से बढ़ाया गया लोड
हादसे के बाद औद्योगिक सुरक्षा विभाग के बॉयलर इंस्पेक्टर उज्ज्वल गुप्ता की टीम ने बुधवार को 6 घंटे जांच की। शुरुआती जांच में सामने आया कि उत्पादन बढ़ाने के लिए बॉयलर का लोड एक घंटे में तेजी से बढ़ाया गया, जिससे हादसा हुआ। झारखंड से काम करने आए फिटर इंदर देव राणा ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या इंजीनियरिंग स्तर की है। प्लांट को उसकी क्षमता से ज्यादा लोड पर चलाया गया। पहले से ही गर्मी ज्यादा थी, ऐसे में ओवरलोड चलाने की जरूरत नहीं थी। बंगाल से काम करने आए फिटर सुमित कोले ने बताया कि वे पिछले एक साल से प्लांट में काम कर रहे हैं। धमाके के बाद पूरा इलाका धूल और धुएं से भर गया, लेकिन इसके बावजूद प्लांट के अंदर कोई सायरन नहीं बजा और न ही कोई अलर्ट जारी हुआ। सिर्फ एक तेज धमाका हुआ और देखते ही देखते हादसा हो गया। उन्होंने बताया कि प्लांट में मौके पर एंबुलेंस तक उपलब्ध नहीं थी। घायलों को बसों में लादकर अस्पताल भेजना पड़ा और हालात बेहद खराब थे।
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