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Home » ‘पता था प्रेमी शादीशुदा है, तो रेप का केस गलत’, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपित को किया बरी
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‘पता था प्रेमी शादीशुदा है, तो रेप का केस गलत’, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपित को किया बरी

By adminApril 26, 2026No Comments2 Mins Read
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छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने विवाहित पुरुष और दुष्कर्म को लेकर अहम फैसला सुनाया है। …और पढ़ें

Publish Date: Sat, 25 Apr 2026 07:30:54 PM (IST)Updated Date: Sat, 25 Apr 2026 07:30:54 PM (IST)

'पता था प्रेमी शादीशुदा है, तो रेप का केस गलत', छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपित को किया बरी
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने महिला की अपील को खारिज किया
  2. शादीशुदा होने की जानकारी पर रेप का आरोप मान्य नहीं
  3. हिंदू विवाह अधिनियम के तहत इकरारनामा शून्य माना गया

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने विवाहित पुरुष और दुष्कर्म को लेकर अहम फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, अगर महिला को पहले से पता हो कि पुरुष शादीशुदा है और उसके साथ संबंध बनाती है, तो बाद में वह उस पर शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने या धोखाधड़ी का आरोप नहीं लगा सकती।

हाई कोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ निचली अदालत द्वारा आरोपी को बरी करने के फैसले को बरकरार रखते हुए महिला की अपील को खारिज कर दी है। इस मामले में महिला ने खुद पैरवी की।

पढ़िए क्या है पूरा मामला?

छत्तीसगढ़ डोंगरगढ़ निवासी महिला ने अपनी याचिका में बताया कि उसकी शादी 8 मई 2008 को महेश के साथ हुई थी और 21 जनवरी 2009 को शादी का इकरारनामा तैयार किया गया था। महिला का दावा है कि दोनों पति-पत्नी की तरह रह रहे थे। इस दौरान उनके बीच शारीरिक संबंध भी बने।

महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उसने अलग-अलग यात्राओं पर 85 हजार रुपए खर्च किए। जब उसने और पैसे देने से मना किया तो महेश ने उसे घर से निकाल दिया, जिसके बाद महिला ने महेश पर धोखाधड़ी करने का आरोप लगाते हुए निचली अदालत में मामला पेश किया था। मामले की सुनवाई के बाद निचली अदालत ने महिला की याचिका को खारिज कर दिया था।

शादी का इकरारनामा हिंदू विवाह अधिनियम के तहत शून्य

महिला ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की थी। केस की सुनवाई के दौरान महिला ने अपने मामले की पैरवी खुद की। याचिका की सुनवाई जस्टिस संजय एस. अग्रवाल की सिंगल बेंच में हुई। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि आईपीसी की धारा 493 के तहत अपराध का मुख्य तत्व धोखाधड़ी है, जिसमें पुरुष महिला को यह विश्वास दिलाता है कि वह उसकी वैध पत्नी है।



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