जशपुर में अवैध 'बीसी' नेटवर्क का बढ़ता जाल:अनौपचारिक लेनदेन से बढ़ रहे विवाद और कानूनी मामले, कार्रवाई की मांग

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जशपुरनगर जिले में अवैध ‘बीसी’ (बिजनेस क्लब) नेटवर्क तेजी से फैल रहा है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक इसकी पहुंच बढ़ने के साथ ही इसके दुष्प्रभाव भी सामने आने लगे हैं। मौखिक भरोसे पर होने वाले इस वित्तीय लेन-देन के कारण आर्थिक विवाद, पारिवारिक तनाव और न्यायालयों में मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जानकारों के मुताबिक, बीसी समूह में सदस्य हर महीने तय राशि जमा करते हैं और जरूरत पड़ने पर किसी एक सदस्य को पूरी रकम दी जाती है। बाद में उसे मूल राशि के साथ अतिरिक्त रकम लौटानी होती है। हालांकि इस पूरी प्रक्रिया में कोई वैधानिक दस्तावेज या लिखित अनुबंध नहीं होता, जिससे विवाद होने पर कानूनी परेशानी खड़ी हो जाती है। एक सदस्य की चूक से पूरा समूह प्रभावित कई लोग अधिक लाभ या ब्याज का लालच देकर बड़ी रकम उठा लेते हैं, लेकिन समय पर भुगतान नहीं कर पाते। इसका असर पूरे समूह पर पड़ता है। ऐसे मामलों में आपसी रिश्ते खराब हो रहे हैं, परिवार आर्थिक संकट में फंस रहे हैं और कई विवाद अदालत तक पहुंच रहे हैं। वकील ने बताया कानूनी खतरा अधिवक्ता सत्य प्रकाश तिवारी के अनुसार, इस तरह का बीसी संचालन अवैध वित्तीय लेन-देन की श्रेणी में आ सकता है। यदि किसी मामले की जांच होती है तो परिस्थितियों के अनुसार धन देने और लेने वाले दोनों कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं। उन्होंने बिना लिखित दस्तावेज के बड़े पैमाने पर धन के लेन-देन को गंभीर कानूनी जोखिम बताया। प्रशासन से कार्रवाई की मांग स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अधिकांश मामलों में लिखित प्रमाण नहीं होने और नकद लेन-देन के कारण पीड़ित पुलिस तक भी नहीं पहुंच पाते। लोगों ने प्रशासन से अवैध वित्तीय नेटवर्क की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। चेक बाउंस मामले में महिला को 6 माह की सजा इधर, जिला न्यायालय ने चेक बाउंस के एक मामले में आरोपी महिला को 6 माह के कारावास की सजा सुनाई है। वादी पक्ष के अधिवक्ता सुदीप मुखर्जी के अनुसार, व्यवसाय के सिलसिले में 12 लाख रुपये उधार लेने के बाद आरोपी ने भुगतान के लिए चेक दिया था, लेकिन खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण चेक बाउंस हो गया। वादी ने परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत परिवाद दायर किया। जिला न्यायालय ने साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराते हुए 6 माह की सजा सुनाई तथा 12 लाख रुपये की राशि लौटाने का भी आदेश दिया ।
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