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दुर्ग जिले में शुक्रवार को राज्य अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) संघ के बैनर तले करीब 1100 शिक्षकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। शिक्षा मंत्री के गृह जिले में पहुंचे शिक्षकों ने कलेक्ट्रेट परिसर में धरना देकर शासन के खिलाफ नाराजगी जताई और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने “नियमितीकरण दो”, “समान काम समान वेतन” और “12 माह वेतन दो” जैसे नारे लगाए। ये हैं प्रमुख मांगें अतिथि शिक्षकों ने अपनी मांगों में शिक्षा विभाग में संविलियन या समायोजन, 12 महीने का वेतन, ग्रीष्मकालीन अवकाश का मानदेय और समान कार्य समान वेतन लागू करने की मांग रखी। संघ का कहना है कि वे वर्षों से नियमित व्याख्याताओं की तरह जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन उन्हें अस्थायी मानकर कम वेतन और सीमित सुविधाएं दी जा रही हैं। वर्षों से दे रहे सेवाएं संघ प्रतिनिधियों ने बताया कि वर्ष 2015-16 से अतिथि शिक्षक स्कूलों में लगातार सेवाएं दे रहे हैं। वे पढ़ाई के साथ-साथ बोर्ड परीक्षा, मूल्यांकन, आईसीटी प्रशिक्षण और अन्य शासकीय कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद उन्हें केवल 10 महीने का मानदेय दिया जाता है, जिससे बाकी दो महीने बिना आय के गुजरते हैं। शिक्षकों ने सुनाई अपनी पीड़ा कांकेर से आए शिक्षक वीरेंद्र कुमार यादव ने कहा कि वे वर्षों से बच्चों का भविष्य बना रहे हैं, लेकिन उनका खुद का भविष्य असुरक्षित है। उन्होंने बताया कि 10 महीने पढ़ाने के बाद 2 महीने घर बैठना पड़ता है, जिससे परिवार चलाना मुश्किल हो जाता है। कई साथी सेवा करते-करते दुनिया छोड़ गए, लेकिन उनके परिवारों को कोई सहारा नहीं मिला। महिला शिक्षकों ने भी उठाई आवाज कोरिया से आई शिक्षिका रानी आसमा ने कहा कि वर्ष 2016 से लगातार आंदोलन के बावजूद मांगें अधूरी हैं। अलग-अलग सरकारों ने सिर्फ आश्वासन दिया, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि अन्य योजनाओं के शिक्षकों को 12 महीने वेतन और बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं, जबकि अतिथि शिक्षकों को आधा वेतन और सीमित अवधि का भुगतान मिलता है। हाईकोर्ट आदेश का भी जिक्र संघ ने ज्ञापन में बिलासपुर हाईकोर्ट के फैसले का हवाला दिया, जिसमें ग्रीष्मकालीन अवकाश का मानदेय और अन्य सुविधाएं देने की बात कही गई है। शिक्षकों का कहना है कि जमीनी स्तर पर अब तक इसका लाभ नहीं मिला। अब समाधान चाहिए प्रदर्शन के अंत में शिक्षकों ने कहा कि अब वे सिर्फ आश्वासन से संतुष्ट नहीं होंगे। उन्होंने मांग की कि आगामी कैबिनेट बैठक में उनकी मांगों पर ठोस निर्णय लिया जाए, ताकि उन्हें स्थायी रोजगार, सम्मानजनक वेतन और सुरक्षित भविष्य मिल सके।
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