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कांकेर-नारायणपुर सीमा पर IED ब्लास्ट में शहीद हुए DRG जवान कॉन्स्टेबल संजय गढ़पाले का शव रविवार को गृह ग्राम हाराडूला पहुंचा। शहीद के अंतिम दर्शन के लिए सैकड़ों ग्रामीण उमड़ पड़े, जिससे पूरे गांव में शोक का माहौल छा गया। ग्राम हाराडूला में शहीद संजय गढ़पाले को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। सुरक्षाबलों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया और उनके साथियों ने सलामी देकर शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की। अंतिम संस्कार के दौरान परिजन, ग्रामीण और आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे लोगों ने नम आंखों से शहीद को विदाई दी। शहीद संजय गढ़पाले की सगाई 15 अप्रैल को हुई थी और शादी 15 जनवरी 2027 को होनी तय थी। ‘डी-माइनिंग’ अभियान पर निकली थी टीम यह घटना 2 मई 2026 को थाना छोटेबेठिया क्षेत्र में हुई थी। सुरक्षा बलों की एक टीम एरिया डॉमिनेशन और सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘डी-माइनिंग’ अभियान पर निकली थी। इसी दौरान एक छुपाकर रखा गया IED अचानक विस्फोटित हो गया। इस विस्फोट की चपेट में आने से इंस्पेक्टर सुखराम वट्टी, कॉन्स्टेबल कृष्णा कोमरा और कॉन्स्टेबल संजय गढ़पाले गंभीर रूप से घायल होकर घटनास्थल पर ही शहीद हो गए। एक अन्य जवान, कॉन्स्टेबल परमानंद कोमरा घायल हुए हैं, जिन्हें बेहतर उपचार दिया जा रहा है। IG ने की घटना की पुष्टि बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) सुंदरराज पट्टिलिंगम ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि कांकेर जिला पुलिस की टीम आईईडी को निष्क्रिय कर रही थी। इसी दौरान वह अचानक विस्फोटित हो गया, जिससे यह दुखद हादसा हुआ। 29 साल की उम्र में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान शहीद कॉन्स्टेबल संजय गढ़पाले महज 29 वर्ष के थे। उन्होंने कम उम्र में ही देश सेवा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया। संजय गढ़पाले का जन्म 14 फरवरी 1997 को ग्राम हाराडुला में एक साधारण कृषक परिवार में हुआ था। गांव से ही पूरी की स्कूली शिक्षा संजय ने अपनी प्राथमिक शिक्षा से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई अपने ही गांव हाराडुला में पूरी की। इसके बाद वे स्नातक (कॉलेज) की पढ़ाई के लिए चारामा में अध्ययनरत थे। पढ़ाई के साथ-साथ संजय के मन में देश सेवा का जज्बा था। अपनी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने वर्ष 2022 में प्रतिष्ठित ‘बस्तर फाइटर्स’ में स्थान हासिल किया। DRG हॉक टीम में थे तैनात संजय गढ़पाले की नियुक्ति 2 सितंबर 2022 को हुई थी। वे डीआरजी हॉक टीम, थाना छोटेबेठिया में तैनात थे और नक्सल प्रभावित क्षेत्र में सक्रिय रूप से अपनी सेवाएं दे रहे थे।
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