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दुर्ग में गुरुवार को केंद्रीय गोंड महासभा धमधागढ़ के बैनर तले 17 जिलों से पहुंचे करीब 3000 आदिवासी समाज के लोगों ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया। इस प्रदर्शन के कारण शहर का सबसे व्यस्त पटेल चौक लगभग तीन घंटे तक पूरी तरह जाम रहा। दोपहर 4 बजे शुरू हुआ यह प्रदर्शन शाम 7 बजे तक चला, जिससे पूरे शहर में चक्का जाम जैसी स्थिति बन गई। दुर्ग में संभवतः यह पहला अवसर था जब किसी सामाजिक संगठन के आंदोलन ने मुख्य मार्ग को इतनी देर तक बाधित रखा। लोग वैकल्पिक रास्ते खोजते रहे, लेकिन शहर का ट्रैफिक सिस्टम पूरी तरह चरमरा गया। आंदोलन की मुख्य वजह केंद्रीय गोंड महासभा धमधागढ़ के प्रधान कार्यालय और कचना धुरवा देवालय में हुई तालाबंदी थी। समाज का आरोप है कि प्रशासन ने राजनीतिक दबाव में आकर इन भवनों पर ताला लगवाया और निर्वाचित पदाधिकारियों को उनका अधिकार नहीं सौंपा। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, 12 अक्टूबर 2025 को हुए चुनाव में कमलेश ध्रुव (सोरी) अध्यक्ष चुने गए थे। हालांकि, पूर्व अध्यक्ष मंगल दास ठाकुर ने इस चुनाव को चुनौती दी, जिससे विवाद खड़ा हो गया। यह मामला फर्म्स एवं सोसायटी तक पहुंचा, जहां से कई आदेश जारी हुए। समाज ने दावा किया कि 8 मार्च 2026 को हुई विशेष सभा में 16 जिलों के प्रतिनिधियों, जिला अध्यक्षों, महिला प्रभाग, युवा प्रभाग और वरिष्ठजनों की उपस्थिति में चुनाव परिणाम को वैध माना गया। इस सभा में कमलेश ध्रुव की कार्यकारिणी को 2030 तक के लिए अनुमोदित किया गया था, लेकिन इसके बावजूद भवन का कब्जा नहीं सौंपा गया। प्रदर्शन के दौरान मंच से लगातार प्रशासन और पूर्व पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए। समाज के लोगों ने कहा कि वर्षों से संस्था का हिसाब-किताब नहीं दिया गया है और अब एक व्यक्ति की वजह से पूरे समाज को बंधक बनाकर रखा जा रहा है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि पूर्व अध्यक्ष मंगल दास ठाकुर के कार्यकाल में वर्ष 2016 से 2024 तक वार्षिक विवरणी तक जमा नहीं की गई। वहीं यह भी कहा गया कि कमलेश ध्रुव के अध्यक्ष चुने जाने के बाद भी उन्हें पदभार नहीं सौंपा गया। समाज के नेताओं ने मंच से कहा कि प्रशासन केवल “एक व्यक्ति विशेष” की सुन रहा है और पूरे गोंड समाज की उपेक्षा की जा रही है। इसी नाराजगी ने आंदोलन को और उग्र बना दिया। “जब-जब गोंड समाज सड़क पर उतरा…” आंदोलन के दौरान केंद्रीय गोंड महासभा धमधागढ़ के अध्यक्ष कमलेश ध्रुव ने बेहद आक्रामक अंदाज में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि गोंड समाज छत्तीसगढ़ की सत्ता और समाज दोनों का बड़ा हिस्सा है और अब उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “जिस दिन गोंड समाज रूठता है, उस दिन सत्ता को भी सुनना पड़ता है। जब-जब हमारा समाज सड़क पर उतरा है, तब-तब अपनी बात मनवाकर ही लौटा है।” कमलेश ध्रुव ने दावा किया कि पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर ने संवेदनशीलता दिखाते हुए देवालय का ताला खोलने की अनुशंसा कर दी है और 24 घंटे के भीतर समाज को उसका अधिकार वापस मिल जाएगा। पूर्व अध्यक्ष एमडी ठाकुर पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि “जीतने वाले लोग पराजित लोगों की चर्चा नहीं करते।” हालांकि उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भवन को लेकर डर और विवाद जानबूझकर पैदा किया गया। भारी पुलिस बल, हर मोर्चे पर निगरानी प्रदर्शन को देखते हुए दुर्ग पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर था। जिले सहित आसपास के कई जिलों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। पटेल चौक, कलेक्ट्रेट और आसपास के संवेदनशील इलाकों में पुलिस की भारी तैनाती की गई थी। हालात को देखते हुए प्रशासन लगातार प्रदर्शनकारियों को समझाने में जुटा रहा। कई बार पुलिस अधिकारियों और समाज के नेताओं के बीच सड़क पर ही बातचीत हुई। हालांकि भीड़ अपनी मांगों पर अड़ी रही। आखिरकार समाज की ओर से पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से मिलने पहुंचा। लंबी चर्चा के बाद प्रशासन ने आश्वासन दिया कि 24 घंटे के भीतर भवन का ताला खोल दिया जाएगा और समाज को उपयोग की अनुमति दी जाएगी। इसके बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ। प्रशासन ने क्या कहा? एसडीएम उत्तम ध्रुव ने बताया कि केंद्रीय गोंड महासभा धमधागढ़ के निर्वाचन और समिति विवाद को लेकर मामला लंबित था। इसी कारण भवन को बंद रखा गया था। उन्होंने कहा कि समाज की ओर से भवन खोलने और उपयोग की मांग रखी गई थी, जिस पर विचार करने के बाद जिला प्रशासन ने भवन खोलने का निर्णय लिया है।
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