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बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर छत्तीसगढ़ के साहित्यकार शिव ग्वालानी और पूर्व पार्षद कविता ग्वालानी ने हिमाचल प्रदेश के मैक्लोडगंज स्थित दलाई लामा हाउस में दलाई लामा से आत्मीय मुलाकात की। इस दौरान ग्वालानी दंपति ने अपनी पुस्तक “दास्तानें कश्मीर” भेंट की और तिब्बती संस्कृति व साहित्य पर चर्चा की। मुलाकात के दौरान लेखक शिव ग्वालानी ने अपनी पुस्तक में शामिल तिब्बती लोककथा का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि किताब में प्रसिद्ध लेखिका हेलेना ब्लावात्स्की से जुड़ी एक प्रचलित कथा का विस्तार से वर्णन है, जिसमें ‘तुलकु’ अवस्था और आध्यात्मिक लेखन की मान्यताओं को दर्शाया गया है। ग्वालानी ने यह अंश दलाई लामा को पढ़कर सुनाया, जिसे सुनकर वे भावुक हो उठे। दलाई लामा से तिब्बती भाषा में हुआ संवाद साहित्यकार ग्वालानी ने बताया कि दलाई लामा मुख्यतः तिब्बती भाषा में संवाद करते हैं, जिसे एक लामा और अधिकारी अनुवाद के माध्यम से अंग्रेजी में समझाते रहे। इस संवाद के दौरान लेखक ने अपनी किताब के वैश्विक प्रकाशन और विषयवस्तु के बारे में विस्तार से जानकारी दी। लेखक ने अपनी पूर्व पुस्तक “मास्टर ऑफ नथिंग” का भी उल्लेख किया और बताया कि इसमें कश्मीरी संस्कृति पर लिखे अध्याय को पढ़कर फारूक अब्दुल्ला उनसे मिलने रायपुर आए थे। इसी अनुभव को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने “दास्तानें कश्मीर” को अलग रूप में प्रस्तुत किया है, जो हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में प्रकाशित होगी। दलाई लामा से लिया आशीर्वाद मुलाकात के दौरान ग्वालानी दंपति ने भविष्य में तिब्बत की राजधानी ल्हासा जाने की इच्छा जताई, जिस पर दलाई लामा ने उन्हें आशीर्वाद दिया। दोनों ने अपनी-अपनी सांस्कृतिक परंपराओं के अनुसार अभिवादन किया—दलाई लामा ने तिब्बती रीति से हाथ जोड़कर स्वागत किया, वहीं ग्वालानी दंपति ने भारतीय परंपरा अनुसार पैसे छूकर आशीर्वाद लिया।
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