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कोरबा जिले के रिसदी स्थित वन विभाग की चिड़ियाघर नर्सरी में मंगलवार दोपहर भीषण आग लग गई। दोपहर करीब 4 बजे शुरू हुई आग ने कुछ ही देर में विकराल रूप ले लिया और कई एकड़ क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया। दूर-दूर तक उठती लपटें और काले धुएं का गुबार देखकर आसपास के लोग मौके पर जमा हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग इतनी तेजी से फैली कि नर्सरी में मौजूद पौधों और पेड़ों को बचाने का मौका ही नहीं मिला। वन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे, लेकिन सीमित संसाधनों के कारण उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। पशु-पक्षियों पर भी खतरा, घोंसले छोड़कर उड़ते दिखे पक्षी कर्मचारियों ने पेड़ों की डालियों और उपलब्ध पानी की मदद से आग बुझाने की कोशिश की। लंबी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। इस आग से नर्सरी क्षेत्र में रहने वाले पशु-पक्षी और अन्य जीव-जंतुओं का जीवन भी खतरे में पड़ गया। आग की लपटों से बचने के लिए पक्षी अपने घोंसले छोड़कर उड़ते नजर आए, जबकि छोटे जीव-जंतु इधर-उधर भागते दिखाई दिए। कई कीमती पौधे और सालों पुराने पेड़ जलकर राख हो गए। असामाजिक तत्वों पर शक, पहले भी लग चुकी है आग प्रारंभिक जांच में आग लगने के पीछे असामाजिक तत्वों की भूमिका होने की आशंका जताई जा रही है। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि नर्सरी में जानबूझकर आग लगाई गई हो सकती है। गौरतलब है कि करीब एक माह पहले भी इसी नर्सरी में आग लगने की घटना हुई थी, जिससे विभाग की चिंता बढ़ गई है। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल घटना के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी गई। उनका कहना है कि एक महीने के भीतर दूसरी बार आग लगना वन विभाग की लापरवाही को दर्शाता है। लोगों ने आरोप लगाया कि नर्सरी में न तो पर्याप्त सुरक्षा गार्ड हैं और न ही अग्नि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम। जांच शुरू, नुकसान का आकलन जारी वन विभाग के अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पूरे नर्सरी क्षेत्र का निरीक्षण कर नुकसान का आकलन किया जा रहा है। विभाग ने अज्ञात लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है। पर्यावरण प्रेमियों में आक्रोश लगातार हो रही आग की घटनाओं से पर्यावरण प्रेमियों में भी गहरी नाराजगी है। उन्होंने दोषियों की जल्द पहचान कर सख्त कार्रवाई करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
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